दिल्ली में बना रहे हैं सपनों का घर, जानें मकान की सही ऊंचाई कितनी होनी चाहिए?

दिल्ली में अपना घर बनाना हर किसी का सपना होता है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू करने से पहले दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और नगर निगम (MCD) के नियमों की पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है। अक्सर लोग घर बनवाते समय यह ध्यान नहीं देते कि कानूनन इमारत की ऊंचाई कितनी होनी चाहिए या कौन-कौन से सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। अगर आप भी दिल्ली में मकान का निर्माण करा रहे हैं, तो नियमों का पालन न करने पर कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यह जानना तो बनता है कि दिल्ली के बिल्डिंग बाय-लॉज के तहत मकान की ऊंचाई और सुरक्षा से जुड़ी क्या शर्तें हैं? पढ़ते हैं आगे...
कितनी ऊंची इमारत बनाने की है दिल्ली में इजाजत?
DDA के अनुसार, दिल्ली में किसी भी इमारत की अधिकतम ऊंचाई इस बात पर निर्भर करती है कि जमीन की कैटेगरी क्या है। अगर आप रिहायशी जमीन पर अपना निजी मकान बनवा रहे हैं-
- बिना स्टिल्ट पार्किंग वाली बिल्डिंग: यदि आप जमीन पर स्टिल्ट पार्किंग नहीं बनवा रहे हैं, तो इमारत की अधिकतम ऊंचाई 15 मीटर तक हो सकती है।
- स्टिल्ट पार्किंग के साथ इमारत: अगर ग्राउंड फ्लोर पर स्टिल्ट पार्किंग है, तो मकान की ऊंचाई अधिकतम 17.5 मीटर तक रखी जा सकती है।
यहां यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि यदि आपके मकान की ऊंचाई 15 मीटर से ज्यादा होती है, तो फायर डिपार्टमेंट से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना कानूनी रूप से जरूरी हो जाता है।

स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना क्यों है जरूरी?
मकान का नक्शा पास कराने के लिए केवल डिजाइन ही काफी नहीं है, बल्कि इमारत की मजबूती का सबूत भी देना होता है।
- भूकंप रोधी डिजाइन: किसी भी नए निर्माण के लिए मान्यता प्राप्त स्ट्रक्चरल इंजीनियर से भूकंप रोधी (Earthquake Resistant) डिजाइन का सर्टिफिकेट लेना जरूरी है।
- मकान में बदलाव या ज्यादा मंजिल: यदि आप किसी पुरानी इमारत पर नई मंजिल बनवा रहे हैं या घर की मुख्य लोड-बेयरिंग दीवार, पिलर या बीम को हटा रहे हैं, तो ऐसा करने से पहले स्ट्रक्चरल इंजीनियर की रिपोर्ट और MCD से लिखित मंजूरी लेना जरूरी है।
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फायर ब्रिगेड से जुड़े सुरक्षा नियम
दिल्ली दमकल सेवा (DFS) के मुताबिक, सुरक्षा मानकों को पूरा किए बिना ऊंची इमारतों के निर्माण की अनुमति नहीं मिलती-
- 15 मीटर से अधिक ऊंची रिहायशी इमारतों और 500 वर्ग मीटर से बड़े कवर एरिया के लिए फायर एनओसी (NOC) लेना जरूरी है।
- आपात स्थिति में फायर की गाड़ियों के पहुंचने के लिए बिल्डिंग तक कम से कम 6 मीटर चौड़ा साफ रास्ता होना चाहिए।
- इमारतों में ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर अलार्म, होज रील, इमरजेंसी पावर बैकअप और फायर लिफ्ट जैसी सुविधाएं होनी जरूरी है।

निर्माण पूरा होने पर इन दो सर्टिफिकेट की होती है जरूरत
बिना परमिशन के किया गया कोई भी निर्माण पूरी तरह से गैर-कानूनी माना जाता है। मकान का ढांचा तैयार हो जाने के बाद आपको दो मुख्य दस्तावेज पास रखने होते हैं-
- Occupancy Certificate (ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट): यह इस बात का प्रमाण है कि इमारत में रहने की अनुमति दी जा चुकी है।
- Completion Certificate (कंपलीशन सर्टिफिकेट): यह सर्टिफिकेट दिखाता है कि मकान का निर्माण अप्रूव नक्शे और सुरक्षा नियमों के अनुसार ही पूरा किया गया है।
निष्कर्ष
दिल्ली में मकान बनाते समय केवल नक्शा पास कराना ही काफी नहीं है, बल्कि ऊंचाई के मानकों, फायर सेफ्टी और स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट से जुड़े नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है।
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