अब 8वीं के छात्र पढ़ेंगे ज्यूडीशियरी के पेंडिंग केस और पूर्व CJI के बयान, जानें NCERT का यह कदम बच्चों के लिए है कितना सही?
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एनसीईआरटी यानी नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने आठवीं क्लास की नई सोशल साइंस टेक्सबुक में ज्यूडिशरी में करप्शन पर एक सेक्शन की शुरुआत कर दी है। बता दें कि ऐसा पहली बार होगा जब आठवीं के बच्चे ज्यूडिशरी में करप्शन क्या होता है, इसके बारे में जानेंगे और संक्षिप्त में पढ़ेंगे। इस चैप्टर में सुप्रीम कोर्ट के 81 हजार हाई कोर्ट के 62 लाख 40 हजार, सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या बताई है। ऐसे में यह जाना तो बनता है कि आखिर इस तरीके की एजुकेशन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव डाल सकती है। अगर आप भी इस बारे में जानना चाहती हैं तो आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि यदि आठवीं क्लास के बच्चे ज्यूडिशरी में करप्शन और पेंटिंग के बारे में पढ़ते हैं तो उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए यह ऐसा करना कितना सही है। इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...
स्टूडेंट के लिए ऐसा करना कितना सही है?
- बता दें, अक्सर स्कूली शिक्षा में उन चीजों को बताया जाता है जो वास्तविकता से काफी दूर रहते हैं। ऐसे में यह कदम कई तरीकों से फायदेमंद साबित हो सकता है।
बता दें कि जब बच्चे सिस्टम की चुनौतों के बारे में पढ़ेंगे तो वे रटने की बजाय सवाल पूछेंगे और समस्याओं को समझने का भी विकास होगा, जो बच्चों के फ्यूचर के लिए बेहद उपयोगी है।
- वहीं, बच्चों को यह भी समझना चाहिए कि न्याय मिलने में देरी क्यों होती है। समाज में इसका क्या प्रभाव पड़ता है। यह उन्हें भविष्य के जागरूक और जिम्मेदारी नागरिक बनाता है।
- बता दें कि इस तरीके का कदम बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान देगा। हालांकि किताबी ज्ञान जरूरी है, लेकिन जमीनी हकीकत से भी बच्चों को रूबरू होना चाहिए।
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क्या कहती हैं एक्सपर्ट?
बता दें, एक्सपर्ट का मानना है, आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए इन विषयों को समझना थोड़ा सा कठिन हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि टीचर्स अपना 100% दें।
यहां पर टीचर्स की भूमिका ज्यादा अहम हो जाती है। उन्हें बच्चों को समझना होगा कि किसी संस्थान की कमियों को उजागर करने का अर्थ उसे कमजोर दिखाना नहीं है बल्कि उसमें सुधार करने के तरीके के बारे में बताना है।
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