‘जीरो बिल’ मुफ्त से मजबूत तक: पंजाब की ऊर्जा क्रांति की कहानी

पंजाब में लागू ‘जीरो बिल’ नीति केवल राहत योजना नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी ऊर्जा सुधार है। 300 यूनिट मुफ्त बिजली ने जहां उपभोक्ताओं का बोझ कम किया, वहीं सरकार ने समानांतर रूप से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नींव भी मजबूत की है। इस नीति से घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने हजारों रुपये की बचत हो रही है, जिससे आंतरिक खपत बढ़ी है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है। किसान वर्ग को निर्बाध बिजली मिलने से कृषि उत्पादकता में स्थिरता आई है।
गोइंदवाल थर्मल पावर प्लांट का अधिग्रहण
इस योजना का सबसे अहम कदम गोइंदवाल थर्मल पावर प्लांट का अधिग्रहण रहा। 540 मेगावाट क्षमता वाला यह संयंत्र अब राज्य के नियंत्रण में है और निजी कंपनियों पर निर्भरता कम कर रहा है। इसका नाम श्री गुरु अमरदास जी के नाम पर रखा जाना सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी प्रतीक है।
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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का फोकस
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का फोकस स्पष्ट है ऐसी ऊर्जा व्यवस्था जो सस्ती, स्थायी और जनता के हित में हो। मुफ्त बिजली के साथ-साथ उत्पादन, वितरण और नियंत्रण को मजबूत करना इसी रणनीति का हिस्सा है।
आज पंजाब न केवल अपने नागरिकों को राहत दे रहा है, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए एक आधुनिक, संतुलित और आत्मनिर्भर ऊर्जा मॉडल तैयार कर रहा है। ‘जीरो बिल’ क्रांति इस बदलाव की आधारशिला बन चुकी है।
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