Fri Sep 11, 2026 | Updated 07:43 PM IST

Main Hoon Apni Dhanlaxmi Part-30:क्या आपकी उम्र और लक्ष्य के अनुरूप है पोर्टफोलियो? यहां जानें जरूरी नियम 

कुछ समय पहले हमने इस स्तंभ में दो सप्ताह तक संपत्ति में विविधता और वर्गीकरण की आवश्यकता पर बात की। इक्विटी, ऋण फंड्स और गोल्ड में धन के निवेश की चर्चा की। विभिन्न परिसंपत्तियों में धन का आवंटन करते समय आपकी आयु, लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता व सहजता को देखा जाता है।
Updated:- 2026-06-16, 13:38 IST
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यदि आप शुरुआत से ही इस स्तंभ की नियमित पाठक है तो इन बातों को लेकर आपकी समझ संभवत: सुदृढ़ हुई होगी। यदि हाल ही स्तंभ को पढ़ना शुरू किया है तो आपको एक बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि वित्तीय स्थिति को संवारने के लिए मात्र अच्छे निवेश विकल्पों का चयन ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि इसमें आपकी परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए कई बातों का तालमेल मायने रखता है। आज हम कुछ ऐसी व्यावहारिक बातों की चर्चा करेंगे जो आपके लिए लाभदायक हो सकती हैं।
दरअसल मैंने बीते कई वर्षों में निवेश व अपना पोर्टफोलियो बनाते समय जो कुछ महसूस किया उसे साझा करूंगी। बहुत से लोग उस समय अपने निवेश की शुरुआत करते हैं, जब पहली नौकरी लगती, बोनस प्राप्त होता या फिर किसी अच्छे मित्र से इस विषय में कोई सलाह मिलती। इसके बाद वह आगामी कुछ वर्षों तक पूरी तस्वीर को पुन: देखते तक नहीं। उनका जीवन बस यूं ही चलता रहता है। इस दौरान उनकी आय में बदलाव आता है, बच्चों का जन्म होता है। अभिभावकों की आयु बढ़ती है, लक्ष्य भी बदलते हैं।

porfolio is important

30 वर्ष की आयु में जो निवेश उचित प्रतीत होता था, उसका तालमेल उम्र के 40वें पड़ाव तक पहुंचते हुए गड़बड़ाने लगता है। हालांकि 42 वर्ष की आयु में लोगों को इस बात का अहसास तक नहीं होता, क्योंकि वे तस्वीर को व्यापकता में देखने के बजाय व्यक्तिगत दृष्टिकोण से निवेश को देखते हैं। इस सप्ताह हम तस्वीर को समग्रता में देखने का प्रयास करेंगे। जहां पर हम आज खड़े हैं, वहीं से इसे देखने की शुरुआत करनी चाहिए। पिछले दो सप्ताह में हमने बाजार के उतार-चढ़ावों और म्यूचुअल फंड्स की बात की। ये कोई अनहोनी नहीं होती, बल्कि बाजार में तो अनिश्चितता रहती ही है।

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आपमें से बहुत से लोग इक्विटी निवेश पर नजर रखते होंगे। हो सकता है कि ये सब देखकर असहज भी महसूस करते हों। बहुत से लोगों ने सवाल किया कि उम्र बढ़ने पर परिसंपत्तियों में पूर्व में किया गया निवेश का अनुपात कितना सही है। ये बहुत अच्छा सवाल है। बाजार को देखकर असहज हो जाना अक्सर एक संकेत होता है। हालांकि ये इस बात को नहीं दर्शाता कि आपका निवेश बुरा है, पर आपकी निवेश राशि के आवंटन और जोखिम उठाने की क्षमता के मध्य अंतर को अवश्य इंगित करता है।

एक सामान्य सा अभ्यास करें। अपने हर प्रकार के निवेश पर नजर डालें। इसमें इक्विटी म्यूचुअल फंड्स, एसआइपी, फिक्स्ड डिपॉजिट, गोल्ड, पीपीएफ, डेट फंड्स, निवेश के लिहाज से खरीदी गई रियल एस्टेट संपत्ति सभी कुछ आते हैं। अब उन्हें मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में विभाजित करें।
पहली श्रेणी में वो धन आता है, जिस धन की आपको शीघ्र आवश्यकता पड़ने वाली है, जिसे किसी कीमत पर हाथ से जाने नहीं दे सकतीं। इमरजेंसी फंड, अल्पकालिक जमा बचत, सालभर बाद के किसी लक्ष्य के लिए बचाकर रखी गई धनराशि इसी श्रेणी में आएगी। इसमें तरलता होनी चाहिए। उसे बचत अकाउंट, लिक्विड फंड्स, अल्पकालिक डेट फंड्स में सुरक्षित रखना चाहिए। यदि वो धनराशि इक्विटी में लगी है तो इस समस्या का समाधान अभी करें। उस धन को ऐसे निवेश मद में स्थानांतरित करें। ये काम टालना नहीं चाहिए।

दूसरी श्रेणी में वह धन आता है, जिसे आप दो से सात साल बाद के लक्ष्य के लिए जोड़ रही हैं जैसे घर की खरीद, बच्चों की शिक्षा, करियर से योजनाबद्ध ब्रेक। इस धनराशि में सतत बढ़त आवश्यक है, लेकिन बाजार के बड़े उतार-चढ़ाव के प्रभावों से उसे सुरक्षित रखना भी आवश्यक है। हाइब्रिड फंड्स, कारपोरेट बांड फंड्स, पारंपरिक हाइब्रिड फंड्स इस निवेश को सुरक्षित बनाते हैं। यदि आपका पूरा धन इक्विटी में है तो आप अपने लक्ष्य पूर्ति के लिए अत्यधिक जोखिम उठा रही हैं। यदि पूरा धन फिक्स्ड डिपॉजिट्स में रखा है तो जिस स्तर से मुद्रास्फीति बढ़ रही है, उससे काफी धीमी गति धन बढ़ेगा और लक्ष्य साधने में मुश्किल हो सकती है।

तीसरी श्रेणी में दीर्घकालिक परिसंपत्तियां आती हैं। सात वर्ष या उसके बाद की आवश्यकता के लिहाज से जो धन जोड़ रही हैं वो इस श्रेणी में आएगा। सेवानिवृत्ति या नई पीढ़ी के लक्ष्यों की पूर्ति या आर्थिक स्वतंत्रता के लिए सोचे समझे प्रयास इसके अंतर्गत आएंगे। इस दृष्टि से इक्विटी निवेश बिल्कुल सटीक है। लंबी समयावधि के कारण बाजार की हलचलों का दबाव समाप्त होता है। अवधि का फलक जितना बड़ा होगा, उतना ही आप बाजार के अस्थायी उतार-चढ़ावों को लेकर सहज महसूस करेंगे।
अब उपरोक्त तीन श्रेणियों के अनुरूप अपनी परिसंपत्तियों को देखें। आप क्या लक्ष्य लेकर चल रही हैं और वास्तविकता क्या है, दोनों का आकलन करें।

main hoon apni dhanlaxmi part 30

बहुत से लोग पाएंगे कि निवेश राशि का आवंटन लक्ष्य से बहुत इतर चला गया और उन्हें इसका अहसास तक नहीं हुआ। इक्विटी बाजार की मजबूती के कुछ वर्ष बड़ी राहत भी दे सकते हैं, यदि 40 प्रतिशत निवेश राशि इक्विटी में लगी है तो वह अन्य निवेशों की तुलना में 60 प्रतिशत हो जाएगी, क्योंकि इक्विटी निवेश में धन तेजी से बढ़ता है। इस प्रकार पोर्टफोलियो के अन्य निवेशों के मध्य अंतर आना बुरी खबर नहीं है। इसका आशय मात्र इतना है कि अब आपको अपनी आयु व जीवन के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए पुन: संतुलन बिठाने की आवश्यकता है।

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कुछ लोग इसके विपरीत भी महसूस कर सकते हैं। बाजार को लेकर लंबे समय की चिंता के परिणामस्वरूप उन्होंने अपना लगभग सारा निवेश फिक्स्ड डिपॉजिट्स और गोल्ड में किया, इक्विटी में बहुत थोड़ा धन लगाया। जो लोग उम्र के 30वें पड़ाव या 40 वर्ष से कम आयु के हैं, उनके लिए ऐसा सोचना अत्यधिक रूढ़िवादी हो सकता है। सुरक्षा से हम सहज होते हैं, लेकिन दीर्घकाल में आपको इसका खामियाजा भी उठाना पड़ सकता है, प्रतिफल कम मिलेगा जबकि बढ़ती महंगाई की वास्तविकता से जूझना ही पड़ेगा। यहां ये सवाल नहीं उठता कि जो निवेश किया है वो कितना अच्छा या उचित है। आपने जिस समय जो भी निवेश किया, वह उचित ही प्रतीत हुआ होगा। सवाल ये है कि क्या वह निवेश आपकी आयु को ध्यान में रखते हुए लक्ष्यों को प्रतिबिंबित करता है। मुझे अपने निवेश से कितना प्रतिफल चाहिए, साथ ही अनिश्चितता को मैं कितना झेल पाने की स्थिति में हूं, ये जानना-समझना चाहिए।

यदि बीते कुछ हफ्तों में बाजार में लगातार गिरावट के कारण आप अपना सबकुछ बेचना चाहते हैं तो ये भी एक संकेत है। इससे पता लगता है कि आपने जोखिम उठाने की अपनी क्षमता से अधिक धन बाजार में लगाया है। पोर्टफोलियो ऐसा होना चाहिए कि रात को चैन की नींद सो सकें। यदि ऐसा नहीं हो पा रहा है तो उसमें बदलाव की आवश्यकता है। परिसंपत्तियों के विकल्पों को बदलने की आवश्यकता नहीं है, बस आपको उनमें धन के आवंटन अनुपात पर ध्यान देना होगा।
इस हफ्ते, एक घंटे का समय निकालें। अपने प्रत्येक निवेश की सूची बनाएं। उसे उपरोक्त तीन श्रेणियों में विभाजित करें। किस मद में कितना प्रतिशत निवेशित है, इसकी गणना करें। फिर ईमानदारी से सवाल करें कि क्या ये मेरी उम्र को ध्यान में रखते हुए सही है? यदि ऐसा है तो अपने पोर्टफोलियो को लेकर ये आपके आत्मविश्वास का परिचायक है। यदि ऐसा नहीं है तो अब आपको पता है कि किन विषयों पर आपको संजीदगी से सोचने या किसी सलाहकार की सलाह की आवश्यकता है।
धन का सही उपयोग बेहतरीन निवेशों का चयन मात्र नहीं होता, बल्कि ये देखना महत्वपूर्ण है कि जिस लक्ष्य पूर्ति व जीवन की कामना रखती हैं, निवेश भी उसके अनुरूप हो।
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