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The Year Without a Summer: इतिहास का वो साल जब जून -जुलाई में भी नहीं पड़ी गर्मी, जानें क्या हुआ था?

यह एक ऐसा समय था जब जब गर्मी के मौसम में भी लोगों को धूप देखने को नहीं मिली थी। गर्मी का मौसम आया ही नहीं और बारिश औ सर्दी का मौसम शुरू हो गया था। ऐसा एक ही साल हुआ था, लेकिन इस बात से हर कोई हैरान रह गया था। उस समय भीषण ठंड से फसलें भी नष्ट हो गई थी
Updated:- 2026-06-18, 15:54 IST
1816 year without a summer volcano real story

साल में हर मौसम का महत्व बहुत ज्यादा है। धरती पर प्रकृति का संतुलन इन्हीं मौसम के कारण ही होता है। सोचिए अगर किसी साल धरती पर बारिश न हो, तो क्या होगा? इससे नदियां, तालाब और झीलें सूखने लगेंगी और जीव-जंतुओं का जिंदा रहना मुश्किल हो जाता है। इससे आपको भोजन मिलना भी मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि खेतों को पर्याप्त पानी नही मिलेगा, जिससे खेती नहीं हो पाएगी। इसी तरह अगर गर्मी और सर्दी का मौसम भी नहीं आएगा, तो वातावरण असंतुलित हो जाएगा, जिससे प्राकृतिक आपदा का खतरा बढ़ जाएगी। लेकिन क्या आप जानती है कि एक साल ऐसा भी था, जब गर्मी ही नहीं पड़ी थी। यह साल 1816 का समय था, जिसे गर्मी के बिना साल यानी The Year Without a Summer के नाम से जाना जाता है।

अचानक आ गई थी ठंड

साल 1816 में अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कई हिस्सों में मौसम अचानक इतना ठंडा हो गया कि कई हिस्सों में गर्मी के मौसम में बर्फबारी होने लगी थी। मई के महीने में ही कई इलाकों में अधिक ठंड की वजह से फसलें खराब हो गई थी। उस समय लोगों को समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि गर्मी ही चली गई। यह एक ऐसा साल भी था, जब लगभग अठारह सौ लोग ठंड से मर गए थे। जुलाई और अगस्त के दौरान पूरे न्यू इंग्लैंड और यूरोप में ऐसे हालात देखने को मिले थे, जब लोग अचानक गर्मी के मौसम में पड़ने वाली ठंड से परेशान हो गए थे।

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Year Without a Summer

उस साल क्यों नहीं आया गर्मी का मौसम

दरअसल, इंडोनेशिया के सुंबावा द्वीप पर स्थित माउंट टैम्बोरा ज्वालामुखी (Mount Tambora) के फटने से ऐसा हुआ था। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अप्रैल 1815 में यह ज्वालामुखी में फटा था और इसका असर एक साल बाद देखने को मिला। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह ब्लास्ट इतना ज्यादा तेज था कि बड़ी मात्रा में राख, धूल और गैस ने आसमान को कवर कर लिया था।

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Mount Tambora eruption

यह राख धीरे-धीरे दुनिया के कई हिस्सों तक फैल गई, जिससे सूर्य की किरणें धरती तक पहुंच ही नहीं पाई। सूर्य की किरणें धरी पर नहीं आने की वजह से कई जगहों पर गर्मी में भी सर्दी जैसा अनुभव होने लगा। प्रकृति में होने वाले इस बड़े बदलाव ने पूरी दुनिया के मौसम पर बहुत ज्यादा असर डाला था।

1816 climate anomaly

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image credit- magnific

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