रिलेशनशिप में लड़कियां क्यों हो जाती हैं ओवर पॉजेसिव? समझें इसके पीछे का साइंस

किसी भी रिश्ते में आने के बाद अपने पार्टनर की चिंता करना या छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना आम हो जाता है। कई बार यही केयर धीरे-धीरे पजेसिवनेस बन जाती है। खासकर लड़कियों में यह चीजें ज्यादा देखने को मिलती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि लड़के पजेसिव नहीं होते। दोनों ही अपने पार्टनर को लेकर ऐसा फील कर सकते हैं। इसके पीछे सिर्फ प्यार या आदत ही जिम्मेदार नहीं है।
दरअसल, जब आप किसी से इमोशनली बहुत डीपली कनेक्ट हो जाते हैं, तो आपका दिमाग उस इंसान को आपकी जिंदगी का सबसे खास हिस्सा मानने लगता है। इसके पीछे सिर्फ प्यार ही नहीं, बल्कि आपके शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव और आपके पुराने एक्सपीरियंस भी काम करते हैं। आइए डॉ. मुनिया भट्टाचार्य (सीनियर कंसलटेंट, साइकोलॉजी, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम) और डॉ. लीना परांजपे (पीएचडी, रिलेशनशिप और मैरिज एक्सपर्ट, रिलेशनशिप ट्रांसफॉर्मेशन कोच और स्पीकर) से जानते हैं कि क्यों ऐसा होता है?
ऑक्सीटोसिन हार्मोन बढ़ाता है अटैचमेंट
पजेसिवनेस को समझने के लिए सबसे पहले ऑक्सीटोसिन (Love Hormone) काे समझना जरूरी है। यह हार्मोन लोगों के बीच प्यार, अटैचमेंट और विश्वास बढ़ाता है। जब आप पार्टनर का हाथ पकड़ते हैं, गले लगाते हैं या साथ में क्वालिटी टाइम स्पेंड करते हैं, तो हमारे शरीर में ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन रिलीज होता है। इससे रिश्ता और ज्यादा डीपली कनेक्ट हो जाता है।
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वहीं आपका इमोशनल कनेक्शन बहुत स्ट्रॉन्ग होता है, तो दिमाग उस रिश्ते को हर हाल में सुरक्षित रखना चाहता है। इसलिए पार्टनर कहां जा रहा है, किससे बात कर रहा है, ऐसी छोटी-छोटी बातों पर भी तुरंत ध्यान जाने लगता है। इतना होने के साथ ही जब पार्टनर को खोने का डर सताने लगता है, तो इंसान जरूरत से ज्यादा पॉजेसिव होने लगता है।
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रिश्ते में जितना ज्यादा इमोशनल इन्वेस्टमेंट, उतनी ज्यादा चिंता
जब कोई इंसान किसी रिश्ते में अपना टाइम, विश्वास और इमोशंस इन्वेस्ट करता है, तो वो रिश्ता उसकी लाइफ का सबसे बड़ा हिस्सा बन जाता है। ऐसे में उस रिश्ते को खोने का जरा सा भी डर इंसान को अंदर से हिला देता है। ऐसे में अगर कोई लड़की अपने पार्टनर से अपनी हर बात शेयर करती है, तो वो उस रिश्ते को लेकर काफी सेंसिटिव हो जाती है।

ऐसे में कई बार हमें लगता है कि वह सिर्फ अपनी 'चिंता और प्यार' जता रही है, लेकिन सामने वाले को वही चीज ओवर-पॉजेसिवनेस और बंदिश लगने लगती है।
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पुराने रिश्ते का भी पड़ता है असर
हर पॉजेसिव बिहेवियर की वजह सिर्फ आपका इस बार वाला रिश्ता ही नहीं होता है। कई बार इसका कनेकशन इंसान के 'पास्ट एक्सपीरियंस' से भी जुड़ा होता है। अगर किसी का पास्ट में दिल टूटा है या धोखा मिला है, तो नए रिश्ते में भी उसे हमेशा डर रहता है कि फिर से उसका दिल न टूट जाए।
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इसी डर से वह पार्टनर पर हर वक्त नजर रखने लगता है। तुम कहां हो या किसके साथ हो, किससे बातें कर रहे हो, जैसे सवाल पूछता है। दरअसल, यह भी उसी इनसिक्योरिटी की वजह से ही होता है।
आसपास का माहौल भी डालता है असर
ऐसा भी कहा जाता है कि आपकी सोच सिर्फ आपके एक्सपीरियंस से नहीं, बल्कि आसपास के माहौल से भी बनती है। अगर आपने बचपन से अपनों को ऐसा प्यार करते देखा है जहां हर वक्त एक-दूसरे की लोकेशन और खबर रखना ही प्यार माना जाता था, तो आपको भी यह पजेसिवनेस नॉर्मल लग सकती है।
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वहीं, इंस्टाग्राम-रील्स पर भी आपने नोटिस किया होगा कि ओवर-पजेसिव रिश्तों को काफी रोमांटिक बनाकर दिखाया जाता है, इससे भी हमारी सोच पर कापफी असर पड़ता है।
क्या थोड़ी पजेसिवनेस गलत है?
हर तरह की पजेसिवनेस को हम गलत नहीं कह सकते हैं। पार्टनर को लेकर थोड़ी चिंता या उसे खोने का डर प्यार और लगाव ही होता है। जैसे पार्टनर देर से घर आए, तो उसकी चिंता होना तो स्वाभाविक ही है, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब यही चिंता शक बन जाती है।
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यह भी जानें
रिश्ते में जरूरत से ज्यादा पॉजेसिव होने के पीछे ये वजहें भी हो सकती है-
- कई बार पार्टनर को कंट्रोल करने की चाहत प्यार नहीं होता बल्कि सामने वाले को अपने हिसाब से चलाने की आदत होती है।
- अगर किसी को बचपन में अपनों से पूरा प्यार या अटेंशन नहीं मिला हो, तो उन्हें बड़े होकर लगता है कि वो प्यार के काबिल नहीं हैं। ऐसे में जब कोई पार्टनर मिलता है, तो उसे खोने के डर से वो हद से ज्यादा पजेसिव हो जाते हैं।
- कई बार ऐसा भी होता है कि पिछले रिश्ते के दर्द को भुलाए बिना जब कोई नए रिश्ते में आता है, तो पुरानी इनसिक्योरिटी और डर भी साथ चलती रहती है।
अगर आपका पार्टनर ओवर-पॉजेसिव हो रहा है, तो गुस्सा होने के बजाय उसकी इनसिक्योरिटी की वजह समझें। आपस में खुलकर बात करने से ही इस समस्या को सुलझाया जा सकता है। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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