दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 साल की उम्र में निधन, इन गानों के लिए हमेशा की जाएंगी याद; लता मंगेशकर जैसी आवाज होने का उठाना पड़ा था नुकसान

दिग्गज सिंगर सुमन कल्याणपुर का कल यानी रविवार, 31 मई को निधन हो गया है। वह 89 साल की थीं। 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे' और 'तुमने पुकारा और हम चले आए' जैसे खूबसूरत गानों को उन्होंने अपनी आवाज से सजायाथा। उन्होंने कई ऐसे गानों में आवाज दी, जो पीढ़ियों तक सुने जाएंगे और उन्हें याद किया जाएगा। आशा भोंसले के निधन के कुछ हफ्तों बाद उनके जाने से इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है। बताया जा रहा है कि वो पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं और कल मुंबई स्थित उनके आवास पर उनका निधन हो गया। 1960-70 के दशक में जब इंडस्ट्री में लता मंगेशकर के नाम के चर्चे थे, उस वक्त उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी। हालांकि, लता मंगेशकर जैसी आवाज होने का उन्हें खामियाजा भी भुगतना पड़ा था।
इन गानों के जरिए फैंस के दिलों में रहेंगी सुमन कल्याणपुर

सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को भारत के (अब बांग्लादेश के) भवानीपुर में हुआ था। उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, भोजपुरी, गुजराती, कन्नड़, मैथिली और पंजाबी भाषा में गाने गाए। फिल्मी गानों के अलावा उन्होंने मराठी अभंग, भजन और गजल में भी आवाज दी। उन्होंने पहले पेंटिंग की पढ़ाई की थी, लेकिन संगीत में रुझान होने के चलते उन्होंने कई दिग्गज गुरुओं से संगीत सीखा और अपनी मधुर आवाज से सबका दिल जीत लिया। उन्होंने 'ना ना करते प्यार', 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे', 'तुमने पुकारा और हम चले आए', 'आजहूं ना आए बलमवा', 'इतना है तुमसे प्यार मुझे' और 'बहना ने भाई की कलाई' जैसे गानों में अपनी आवाज दी। रफी साहब के साथ उन्होंने कई गाने गाए, जो काफी पॉपुलर हुए। सुमन कल्याणपुर और मोहम्मद रफी ने 100 से भी ज्यादा गानों के लिए डुएट किया।
लता मंगेशकर से मिलती थी आवाज
सुमन कल्याणपुर के करियर की शुरुआत साल 1954 में हुई थी और 1960-70 के दशक में वो काफी पॉपुलर हो गई थीं। उनकी आवाज की टोन और बारीकियां लगा मंगेशकर से काफी मिलती थी और इसलिए कई बार उनकी आवाज को लता मंगेशकर की आवाज समझ लिया जाता था। 80 के दशक के अंतिम सालों में दूरदर्शन पर लोकप्रिय शो 'छायागीत' प्रसारित हो रहा था और उसमें 'ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे ' गाना प्ले हुआ और शो के सिंगर्स का नाम मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर बताया गया। इसके बाद सुमन कल्याणपुर ने प्रसार भारती के ऑफिस में फोन करके कहा कि यह गाना उनकी मां सुमन कल्याणपुर ने गाया है। इसके अलावा भी कई ऐसे गाने हैं, जो सुमन कल्याणपुर ने गाए लेकिन लोग आज भी उन्हें लता मंगेशकर का गाया हुआ समझते हैं। यहां तक कि उस वक्त रेडियो पर भी उनके गानों को लेकर ऐसा भ्रम पैदा होता था और कई बार रिकॉर्ड्स पर भी कभी-कभी गलत नाम लिखे होते थे।
कहा जाता है कि लता मंगेशकर की फीस उस वक्त पर काफी ज्यादा थी और ऐसे में कई प्रोड्यूसर्स सुमन कल्याणपुर को अपने गानों में लेना चाहते थे क्योंकि उनकी आवाज हूबहू लता मंगेशकर जैसी थी। कई लोग कहने लगे थे कि इंडस्ट्री को दूसरी लता मिल गई, लेकिन ये बात जब लता मंगेशकर के कानों तक पहुंची, तो उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आई। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि लता मंगेशकर ने कई प्रोड्यूसर्स से साफ कह दिया था कि अगर वो सुमन के साथ काम करेंगे, तो वो उनके साथ काम नहीं करेंगी और इसका काफी असर सुमन कल्याणपुर के करियर पर पड़ा था।
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सुमन कल्याणपुर के जाने से उनके चाहने वालों को गहरा सदमा लगा है। वो बेशक अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपने गानों के जरिए वो हमेशा फैंस के दिलों में रहेंगी। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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