ये हैं कानपुर की सबसे डरावनी जगहें


Yashasvi Yadav
30-03-2023, 17:28 IST
www.herzindagi.com

    कानपुर की चर्चित जगहों पर आप कई बार घूमने गए होंगे, लेकिन हम आपको यहां मौजूद डरावनी जगहों के बारे में बताएंगे।

जिन्नातों की मस्जिद

    कानपुर में स्थित डरावनी जगहों की बात होती है तो सबसे पहले जिन्नातों की मस्जिद का जिक्र ज़रूर होता है। कहा जाता है कि यह मस्जिद लगभग 350 साल से अधिक प्राचीन है। इस मस्जिद को लेकर यह डरावनी कहानी है कि मस्जिद का निर्माण रातों-रात जिन्नातों ने कर दिया था। जो लोग भूत-प्रेत से परेशान रहते हैं वो भी यहां जाते हैं।

सिविल लाइंस ग्रेव यार्ड

    कानपुर शहर के पौश इलाके में स्थित सिविल लाइंस ग्रेव यार्ड की डरावनी कहानी आपको संकोच में डाल सकती है। यहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि रात में यहां से गुजरने वाले व्यक्ति को भूत दिखाई देता है। सिविल लाइंस ग्रेव यार्ड में ऐसी कई आकस्मिक दुर्घटनाएं घटी हैं जिसे कई लोग भूत से जोड़कर देखते हैं।

जैना प्लेस

    कानपुर के रतनलाल में मौजूद जैना प्लेस भी डरावनी जगहों में शामिल है। जैना प्लेस एक प्राचीन इमारत है और कहा जाता है कि इस इमारत को बनाने वक्त कई कारीगर की अचानक ही मौत हो गई थी। कहा जाता है कि आज भी सूरज ढलते यहां कोई नहीं जाता है।

सुजातगंज

    कानपुर का सुजातगंज भी भूतिया जगह है। यहां की बातों ने बचपन में खूब डराया है। इस रास्ते पर कभी-कभी ऐसी घटनाएं घटती हैं, जिन्हें सुनने के बाद रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मेरे एक दोस्त के साथ इस रास्ते पर बहुत डरावनी घटना घटी, जब वो यहां से रात में गुज़र रहा था तो उसे लगा कोई उसकी बाइक पर बैठ गया है फिर आगे जाकर बाइक हल्की हो गई।

गंगा बैराज

    गंगा बैराज का बहता पानी और अटल गाट साथ ही वहां मिलने वाला ब्रेड मक्खन सब बहुत ही बेहतरीन है, लेकिन इन सब अच्छी बातों के बीच एक डरावनी बात भी गंगा बैराज से जुड़ी है, वो है इसका डरावना अतीत। आसपास रहने वाले लोगों का भी मानना है कि कोई अदृश्य शक्ति है, जो उन्हें परेशान करती है।

अनवरगंज का बंगला नंबर 128

    अनवरगंज के प्राइमरी स्कूल का बंगला नंबर 128 का कमरा जहां बच्चे जाने से डरते हैं और अध्यापकों का ट्रांसफ़र करना पड़ता है। स्कूल की टीचर रजनी गुप्ता ने बताया, एक कर्मचारी की पत्नी ने यहां पर फांसी लगाकर ख़ुदकुशी कर ली थी, तब से कहते हैं कि उसकी आत्मा कमरे में रहती है। इन बातों के बाद से यहां पर बहुत ही कम बच्चे आते हैं और रात होते ही आसपास सन्नाटा पसर जाता है।

खेरेश्वर धाम मंदिर

    कहा जाता है कि इस मंदिर को गुरू द्रोणाचार्य ने बनवाया था और इस मंदिर में शिवजी प्रकट हुए थे। यहां पर रोज़ रात 12 से 1 बजे के बीच अश्वत्थामा शिवलिंग की पूजा करने के लिए आते हैं क्योंकि गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा का जन्म भी यहीं हुआ था। रात में मन्दिर बंद होने के बाद जब सुबह 4 बजे खोला जाता है तो शिवलिंग पर चढ़े सफ़ेद फूल में से एक रंग लाल हो जाता है।

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