बदलती टेक्नोलॉजी ने भारतीय रसोईघर में भी क्रांति लाने का काम किया है और मेहनत वाली सिल-बट्टे की पिसाई की जगह अब पोर्टेबल और कॉम्पैक्ट ब्लेंडर ने ले ली है। इन्होंने न सिर्फ हाथों से किए जाने वाले परिश्रम को कम किया बल्कि हाथों को होने वाली परेशानी भी इनके साथ कम हो गई। फिर चाहे चटनी बनानी हो, मसाले पीसने हों या दाल पीसनी हो, इनके साथ समय भी बचता है और साथ ही हाथ में दर्द और चोट लगने का खतरा भी नहीं रहता। आधुनिक ब्लेंडर इतने उपयोगी होते हैं कि इनमें आसानी से जूस, शेक और स्मूदी भी बनाए जा सकते हैं जो सिल-बट्टों में करना बिल्कुल भी मुमकिन नहीं था। फिर चाहे किचन मॉड्यूलर हो या सामान्य, आज के समय में ये हर किसी के लिए जरूरी बन चुके हैं।
क्यों आधुनिक ब्लेंडर ने ले ली सिल-बट्टे की जगह?
आधुनिक ब्लेंडर सिल-बट्टे की तुलना में कई मायनों में बेहतर है, जिनकी तुलना इस तरह से की जा सकती है:
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तुलना का पैमाना |
सिल-बट्टा |
आधुनिक ब्लेंडर |
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स्पीड और कार्यक्षमता |
इनके साथ पिसाई करने में काफी समय लगता है। |
हर तरह की चीजों को अच्छी तरह से कम समय में पीस सकते हैं। |
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इस्तेमाल |
ज्यादातर गीली चीजों को पीसने में परेशानी होती है। |
हर चीज को पीसने के लिए अलग-अलग जार और ब्लेड मिलते हैं। |
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सुविधा |
भारी-भरकम होते हैं और इस्तेमाल के दौरान चोट लगने का खतरा रहता है। हाथों पर काफी ज़ोर पड़ता है। |
इस्तेमाल करने में काफी सुविधाजनक होते हैं और बिल्कुल भी मेहनत नहीं करनी पड़ती। स्पीड को भी आसानी से कम ज्यादा किया जा सकता है। |
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साफ-सफाई और रख-रखाव |
इन्हें साफ करना काफी आसान होता है और स्टेनलेस स्टील से बने जार काफी मजबूत होते हैं। |
सफाई करने में परेशानी होती है और इस्तेमाल के बाद कई बार पिसी गई चीजों की गंध हटती नहीं है। |
