जी हां, हार्ड वॉटर की समस्या आजकल कई शहरों में आम हो चुकी है और इसका असर वॉशिंग मशीन पर भी पड़ता है। इस तरह के पानी में कपड़ों को धोने से उनके साथ-साथ मशीन की क्वालिटी भी खराब होती है और इन 5 समस्याओं का सामना करना पड़ता है:
- डिटर्जेंट अच्छी तरह से काम नहीं करता: कठोर पानी में डिटर्जेंट अच्छी तरह से घुलता नहीं है और इस वजह से सही धुलाई नहीं हो पाती है। जिसके चलते कण कई बार कपड़ों पर ही जमा रह जाते हैं और डिटर्जेंट की खपत भी बढ़ जाती है।
- बार-बार सर्विसिंग की जरूरत पड़ती है: हार्ड पानी की वजह से मोटर और पुर्जों पर कई तरह की गंदगी आसानी से जमा हो जाती है जो टब क्लीन साइकिल से भी पूरी तरह से साफ नहीं होती है। ऐसे में मैकेनिक को बुलाकर सर्विसिंग कराने की जरूरत होती है, जिसका अतिरिक्त खर्च आता है।
- कपड़े अच्छी तरह से साफ नहीं होते हैं: खराब क्वालिटी का पानी कपड़ों को भी अच्छी तरह से साफ नहीं करता है और साथ ही उनके रंग व चमक को भी फीका कर देता है। इस वजह से नए कपड़े भी 2-3 धुलाई के बाद पुराने लगने लगते हैं और नाज़ुक कपड़ों को तो इसकी वजह से काफी नुकसान होता है।
- पुर्जे व मोटर जल्दी खराब होते हैं: यह पानी वॉशिंग मशीन की मोटर व पुर्जों पर स्केल का जमाव करता है जिसकी वजह से उनमें आसानी से खराबी आ जाती है और उन्हें समय से पहले बदलने की जरूरत पड़ती है और इसमें कई बार ज्यादा पैसे खर्च हो जाते हैं।
- मशीन की लाइफ कम हो जाती है: बार-बार सर्विसिंग कराने और पुर्जों को बदलने की वजह से वॉशिंग मशीन की लाइफ पर सीधा असर पड़ता है और उसे समय से पहले बदलने की जरूरत पड़ जाती है।
हालांकि, IFB, बॉश, Samsungऔर व्हर्लपूल जैसे अन्य ब्रांड अपनी वॉशिंग मशीन को इस तरह से डिज़ाइन करते हैं कि उनमें हार्ड पानी में भी कपड़ों को काफी अच्छी तरह से धोने की सुविधा मिल जाए। इनकी खास टेक्नोलॉजी कठोर पानी को ट्रीट करके उसे वॉशिंग मशीन के लिए पूरी तरह से सुरक्षित बनाती है और कपड़ों, मोटर और पुर्जों पर असर नहीं पड़ता है।
