जन्माष्टमी आते ही मथुरा और वृंदावन का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। दिल्ली और आसपास के इलाकों से हर साल बड़ी संख्या में लोग श्रीकृष्ण की नगरी में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस खास मौके पर मंदिरों की सजावट, भजन-कीर्तन और दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ पूरे माहौल को खास बना देती है। ऐसा इसिलए, क्योंकि तब शहर में काफी चहल-पहल और रौनक होती है। ऐसा माहौल आपको मथुरा और वृंदावन में अन्य दिनों में देखने को नहीं मिलेगा। आप भी अगर दिल्ली से अपने पूरे परिवार के साथ जन्माष्टमी पर जाने का सोच रहे हैं, तो यह आर्टिकल आपके काम आएगा। आज के इस आर्टिकल में हम आपको यात्रा और दर्शन जुड़ी जरूरी जानकारी विस्तार से बताएंगे।

जन्माष्टमी पर कैसा रहता है मथुरा-वृंदावन का माहौल?

जन्माष्टमी के मौके पर ज्यादातर लोग मथुरा-वृंदावन इसलिए जाते हैं, क्योंकि इस समय यहां के सभी मंदिरों की सजावट बेहद खूबसूरत होती है। सड़कों पर झांकिया निकलती है और चारों तरफ से श्रीकृष्ण के नाम की गूंज सुनाई देती है। ऐसे मौके पर शहर में घूमने में भी परेशानी नहीं होती, क्योंकि देर रात तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है।

किन मंदिरों में ज्यादा भीड़ मिल सकती है?

बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन के सबसे ज्यादा भीड़ वाले मंदिरों में से एक है। यहां आपको नॉर्मल दिनों में भी बहुत भीड़ देखने को मिलती है, ऐसे में जन्माष्टमी पर यहां दर्शन के लिए कई घंटों तक भी इंतजार करना पड़ जाता है।

  • द्वारकाधीश मंदिर, मथुरा
  • प्रेम मंदिर, वृंदावन
  • इस्कॉन मंदिर, वृंदावन

यात्रियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

बहुत छोटे बच्चों को भीड़ वाले मंदिरों में ले जाने बचें, क्योंकि लंबी लाइन में खड़ा होना होगा और गर्मी भी ज्यादा लगेगी। बुजुर्गों के साथ यात्रा का प्लान करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, क्योंकि कई जगह काफी देर तक पैदल चलना या लाइन में खड़ा होना पड़ सकता है।

  • अपनी गाड़ी को मंदिर के बिल्कुल पास ले जाने से बचें, क्योंकि लंबे जाम में फंस जाएंगे और पार्किंग की जगह भी मिलना मुश्किल हो जाता है।
  • भीड़ में परिवार के हर सदस्य के पास एक-दूसरे का मोबाइल नंबर जरूर दें, बच्चों की जेब में भी नंबर लिखकर डाल दें।
  • बहुत ज्यादा सामान लेकर मंदिर की ओर न जाएं, क्योंकि भीड़ में बैग संभालना परेशानी होगी।
  • पानी की छोटी बोतल साथ रखें और आरामदायक चप्पल पहनकर जाएं।
  • होटल पहले से बुक करें, क्योंकि बड़े मौके पर मथुरा-वृंदावन में कमरे जल्दी भर सकते हैं और महंगे भी हो जाते हैं।

निष्कर्ष- इससे आप समझ गए होंगे कि जन्माष्टमी पर आपको लगभग सभी मंदिरों में यहां भीड़ मिलने वाली है, इसलिए अपनी सेफ्टी के साथ-साथ परिवार की सेफ्टी का भी खास ध्यान रखना पड़ेगा। 

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