जीवन में जोखिम उठाने वाले लोग ही हमेशा आगे बढ़ते हैं। चाहे निजी संबध हों या प्रोफेशनल, कई बार दिल मजबूत करके कठोर निर्णय लेना जरूरी हो जाता है। सफलता और खुशहाली से संबधित यह धारणा कई बार लोगों को भ्रमित कर देती है क्योंकि हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता दूसरे से अलग होती है। कोई दिमागी रूप से बहुत चुस्त होता है, तो कोई थोड़ा कमजोर। कोई शारीरिक रूप से बहुत स्वस्थ-सक्रिय रहता है, लेकिन सोचने-समझने या त्वरित ढंग से सही निर्णय लेने के मामले में वह अकसर पीछे रह जाता है। हर व्यक्ति की अपनी खूबियां-खामियां होती हैं। ऐसे में सभी को रिस्क लेने की सलाह देना अनुचित होगा। सफलता के लिए कड़ी मेहनत निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन व्यक्ति का यह प्रयास हमेशा सही दिशा में होना चाहिए, अन्यथा परिश्रम के बावजूद उसे कोई सकारात्मक परिणाम हासिल नहीं होगा।

दूसरों से तुलना है गलत

एमएनसी में कार्यरत रजत के दुखों का सबसे बड़ा कारण यही था कि उसके साथ एमबीए करने वाले सभी दोस्त हाई पैकेज वाली सैलरी पर विदेश चले गए, जबकि माता-पिता की देखभाल के कारण उसे अपने होम टाउन अहमदाबाद में ही रुकना पड़ा। जब भी उसके दोस्त छुट्टियों में भारत आते, तो उनकी समृद्धि की चकाचौंध देखकर रजत के मन में एक टीस उठती कि मैंने कोशिश नहीं की, वरना आज मैं भी ऐसी ही आरामदायक जिंदगी जी रहा होता।


अच्छा है थोडा कंफर्ट

बिना जाने-समझे दूसरों को देखकर किसी भी दिशा में आगे बढ़ने के लिए अपना रास्ता बदलने की आदत कई बार नुकसानदेह साबित हो सकती है। संधर्ष करना अच्छी बात है, पर इसके साथ ही अपनी बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी है। मिसाल के तौर पर अपने एक इंटरव्यू में अभिनेता आयुष्मान खुराना ने कहा था कि फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए हमेशा रेलवे प्लेटफॉर्म पर सोना जरूरी नहीं होता, मेरे पापा ने मुझे जरूरत भर पैसे दिए थे और मैं अपने दोस्तों के साथ उनके कमरे पर रुका था। कहने का आशय सिर्फ यही है कि अगर आप कामयाबी की लंबी रेस में शामिल होना चाहते हैं, तो उसके लिए पहले से थोड़ी ऊर्जा बचाकर रखना जरूरी है। जब आप शारीरिक-मानसिक रूप से फिट रहेंगे, तभी अपने लक्ष्य पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।

सही दिशा में हो प्रयास

कुछ लोग अकसर यह शिकायत करते हैं कि कड़ी मेहनत और लंबे संधर्ष के बावजूद उन्हें कामयाबी नहीं मिली। ऐसे लोगों के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि कहीं वे अपनी रुचि की विपरीत दिशा में तो नहीं जा रहे या फिर वे अपनी क्षमता से अधिक जिम्मेदारियों का बोझ तो नहीं उठा रहे? दोनों ही स्थितियों में असफलता के साथ व्यक्ति को तनाव और निराशा का सामना करना पड़ सकता है।

धैर्य से होगा समाधान

चाहे बिजनेस हो या नौकरी का शुरुआती दौर, या फिर दांपत्य जीवन में आपसी सामंजस्य से जुड़ा कोई मामला, हर जगह हालात को बेहतर बनाने के लिए केवल प्रयास करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि इसके साथ धैर्य का होना भी बहुत जरूरी है। हो सकता है पहले आपको बिजनेस में फायदे के बजाय नुकसान हो रहा हो, ऐसे में विचलित होने के बजाय धैर्य के साथ अपनी कार्यशैली का विश्लेषण करते हुए, गलतियों को सुधारने की कोशिश करें। इससे अगले प्रयास में आपको सफलता जरूर मिलेगी।

मन में न हो कोई ग्लानि

सीमित संसाधनों के साथ सादगीपूर्ण जिंदगी जीने में भी अलग ही खुशी और संतुष्टि होती है, लेकिन कम ही लोग इसकी अहमियत को पहचान पाते हैं। इस संदर्भ में वेलनेस एक्सपर्ट डॉ. अभिलाषा द्विवेदी कहती हैं, वर्तमान दौर में अधिकतर लोग यही सोचकर तनावग्रस्त रहते हैं कि वे दौलत-शोहरत पाने की अंधी दौड़ में शामिल नहीं हो पा रहे। आज के दौर में संतुष्ट रहने वाले लोगों को आलसी समझा जाता है, जबकि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। यह किसी व्यक्ति की निजी पसंद हो सकती है।

समझें संतुष्टि की अहमियत

मेहनती और महत्वाकांक्षी लोग ही जीवन में कामयाब होते हैं, इस सच्चाई से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके साथ ही इच्छाओं की भी एक सीमा होती है और उन्हें नियंत्रित करना बहुत जरूरी है। हर व्यक्ति के लिए सफलता के मायने अलग होते हैं। कुछ ऐसे भी होते हैं, जिनकी असीमित इच्छाओं का कोई अंत नहीं होता, तो कुछ के लिए आरामदायक जीवन जीने के लायक बुनियादी सुविधाएं ही पर्याप्त होती हैं।

सुकून की तलाश

  • कुछ पल बिना किसी काम के आंखें बंद करके खाली बैठें, उस वक्त आपके आसपास मोबाइल भी नहीं होना चाहिए।
  • किसी बडी सफलता का इंतजार करने के बजाय रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों में खुशियां तलाशें।
  • परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं।
  • अपनी रुचि से जुड़े कार्यों के लिए समय जरुर निकालें।
  • जरुरतमंदों की मदद करें, इससे सच्ची खुशी मिलती है।

लेखक - विनीता

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