भारत में हर साल आज यानी 15 सितंबर को राष्ट्रीय इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। यह खास दिन एक बेहद की खास हस्ती को समर्पित है। असल में आज देश के महान इंजीनियर, राजनेता, अर्थशास्त्री और राष्ट्रनिर्माता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म हुआ था और उन्हीं के जयंती के अवसर पर यह दिन सेलिब्रेट किया जाता है। असल में इसका उद्देश्य सर विश्वेश्वरैया के देश के विकास में योगदान के लिए उन्हें याद करने के साथ उन सभी इंजीनियर्स के काम को सराहने और उन्हें प्रोत्साहित करना है, जो टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। चलिए आपको बताते हैं कि विश्वेश्वरैया कौन थे, उन्होंने देश के लिए क्या कुछ किया था और इस दिन की शुरुआत कब हुई थी?
सर विश्वेश्वरैया कौन थे?
विश्वेश्वरैया ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कई ऐसे काम किए, जो इतिहास के पन्नों में आज भी अंकित हैं और जिनके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने भारत में सिंचाई और तकनीकी शिक्षा को एक नई दिशा दी। उनके बनाए बांध आज भी देश की उन्नति में अपना योगदान दे रहे हैं। कृष्णराज सागर बांध, पुणे के खड़कवासला जलाशय में बांध और ग्वालियर में तिगरा बांध उन्हीं की देन हैं। उन्होंने कई बड़ी फैक्ट्रीज और शैक्षणिक संस्थानों की भी स्थापना की थी। उन्होंने अपने काम को सिर्फ इमारत या सड़क बनाने तक सीमित नहीं रखा था, बल्कि देश के विकास के कई हिस्सों में योगदान दिया था।
मैसूर रियासत के दीवान से भारत रत्न तक...
विश्वेश्वरैया ने अपनी काबिलियत के दम पर मैसूर रियासत के दीवान का पद हासिल किया था। उन्होंने अपनी कोशिशों के जरिए मैसूर को औद्योगिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए कई काम भी किए थे, जिनके लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा। बता दें कि पहले वह मैसूर में चीफ इंजीनियर के तौर पर काम करते थे, लेकिन बाद में उन्हें मैसूर का दीवान बना दिया गया था। साल 1955 में भारत सरकार की तरफ से देश निर्माण में उनके अविस्मरणीय योगदान के लिए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। इसके बाद साल 1968 में भारत सरकार ने उनकी जन्मतिथि को 'अभियंता दिवस' घोषित किया गया था। इसके बाद से हर साल उनकी याद में यह दिन मनाया जाता है।
मुश्किलों में बीता था बचपन
15 सितंबर 1860 को मैसूर के कोलार में जन्मे डॉ. एम विश्वेश्वरैया का बचपन काफी मुश्किलों में बीता था। बचपन में ही उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद बमुश्किल उनकी पढ़ाई जारी रखी गई और उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी की। साल 1883 में उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी।
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क्यों कहे जाते हैं कर्नाटक के भागीरथ?
सर विश्वेश्वरैया ने देश की उन्नति में कई तरीकों से योगदान दिया था। उन्हें कर्नाटक का भागीरथ भी कहा जाता है। दरअसल उन्होंने कावेरी नदी पर कृष्णराज सागर बांध का डिजाइन तैयार करके मांड्या और मैसूर की पानी की दिक्कत को दूर किया था और इस धरती पर विकास की गंगा बहाने की वजह से उन्हें यह नाम मिला था।
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