Dhanteras Utensil Buying Tradition: धनतेरस आते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। साल 2026 धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा। कुछ लोग सोने-चांदी के गहने खरीदते हैं, तो कुछ लोग नए बर्तन, दीपक और दूसरी उपयोगी चीजें खरीदते हैं। यकीनन आपने भी अपने घर में बड़े-बुजुर्गों को धनतेरस पर पीतल, तांबे या स्टील के बर्तन खरीदते देखा होगा। मगर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा इतनी लोकप्रिय क्यों है? आज के इस लेख में वाराणसी के पंडित राघवेंद्र तिवारी से जानते हैं इसके पीछे का मुख्या कारण और इसकी मान्यता।
धनतेरस पर बर्तन खरीदना क्यों माना जाता है शुभ?
धनतेरस को हिंदू धर्म में खरीदारी और नई शुरुआत के लिए शुभ दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन घर में नई वस्तुएं लाने से सुख-समृद्धि आती है। इसी वजह से लोग सोने-चांदी के अलावा बर्तन भी खरीदते हैं।
बर्तन ऐसी चीज हैं, जिनका इस्तेमाल हर घर में रोजाना होता है। पहले के समय में पीतल, तांबे और कांसे के बर्तनों को घर की महत्वपूर्ण संपत्ति माना जाता था। ऐसे में त्योहार के मौके पर नए बर्तन खरीदना घर की जरूरत पूरी करने और खुशहाली की कामना करने का एक तरीका भी था। इसी के साथ ही धीरे-धीरे यह परंपरा भारतीय परिवारों में लोकप्रिय होती चली गई।
भगवान धन्वंतरि से है इस परंपरा का संबंध
धनतेरस का संबंध भगवान धन्वंतरि से भी माना जाता है, जिन्हें हिंदू परंपरा में आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस दिन को धनतेरस या धनत्रयोदशी के रूप में मनाने की परंपरा जुड़ी है।
कलश और पात्र का संबंध बर्तनों से होने के कारण भी इस दिन बर्तन खरीदने को शुभ माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग परिवारों में इस परंपरा को लेकर मान्यताएं अलग हो सकती हैं। इसका मुख्य भाव स्वास्थ्य, समृद्धि और अच्छे जीवन की कामना करना है।
सोने-चांदी के बजाय बर्तन खरीदना भी है खास
धनतेरस पर हर व्यक्ति सोना या चांदी नहीं खरीद सकता। ऐसे में बर्तन खरीदना एक ऐसा विकल्प है, जिसे लोग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार चुन सकते हैं। इस दिन एक छोटा-सा कटोरा, थाली, गिलास या पूजा का पात्र खरीदकर भी परंपरा निभाई जा सकती है।
इसका एक पहलू यह भी है कि सोने-चांदी के गहनों का इस्तेमाल सीमित अवसरों पर होता है, लेकिन बर्तन रोजमर्रा के काम आते हैं। इसलिए परिवार अपनी जरूरत के हिसाब से ऐसी चीज खरीदते हैं, जिसका इस्तेमाल लंबे समय तक किया जा सके। इस तरह परंपरा के साथ घर की उपयोगिता का भी ध्यान रखा जाता है।
पहले पीतल और तांबे के बर्तनों की होती थी ज्यादा खरीदारी
पुराने समय में घरों में पीतल, तांबे और कांसे के बर्तनों का इस्तेमाल काफी आम था। इन धातुओं से बने बर्तनों को मजबूत होते थे और इन्हें लंबे समय तक संभालकर रखा जाता था। कई परिवारों में ये बर्तन पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस्तेमाल होते थे।
त्योहारों पर नए बर्तन खरीदना घर में नई चीज जोड़ने और घरेलू जरूरतों को पूरा करने का अवसर भी होता था। आज स्टील, कांच और दूसरी सामग्रियों के बर्तन बाजार में आसानी से मिल जाते हैं। इसलिए अब लोग अपनी पसंद, बजट और इस्तेमाल के अनुसार अलग-अलग तरह के बर्तन खरीदते हैं। यानी परंपरा वही है, लेकिन खरीदारी के विकल्प बदल गए हैं।
क्या धनतेरस पर बर्तन खरीदने का कोई खास नियम है?
हम जब कोई काम करते हैं, तो उसके पीछे के कारण और नियम के बारे में जानना चाहते हैं। ऐसे में धनतेरस को लेकर भी मन में सवाल आता है कि क्या धनतेरस पर बर्तन खरीदने को लेकर कोई खास नियम है? पंडित के अनुसार, धनतेरस पर बर्तन खरीदने को लेकर हर परिवार में एक जैसी परंपरा नहीं होती। कुछ लोग पीतल या तांबे के बर्तन खरीदना पसंद करते हैं, तो कुछ स्टील के बर्तन या पूजा के लिए छोटा-सा पात्र खरीदते हैं।
आमतौर पर लोग खरीदारी करते समय शुभता का ध्यान रखते हैं, लेकिन किसी खास धातु या बर्तन को खरीदना सभी के लिए अनिवार्य नहीं है। अपनी जरूरत और बजट के अनुसार खरीदारी करना ज्यादा व्यावहारिक है। त्योहार का उद्देश्य खुशियां बांटना और घर में सकारात्मक माहौल बनाना भी है, इसलिए केवल परंपरा निभाने के लिए अनावश्यक खर्च करने की जरूरत नहीं है।
बदलते समय में भी बरकरार है यह परंपरा
आज ऑनलाइन शॉपिंग और आधुनिक बाजारों के दौर में भी धनतेरस पर बर्तन खरीदने का चलन बना हुआ है। इसकी एक वजह यह है कि बर्तन हर घर की जरूरत हैं और इन्हें खरीदने के लिए बहुत बड़े बजट की आवश्यकता नहीं होती।
इसके अलावा, परिवारों में चली आ रही परंपराएं लोगों को अपनी संस्कृति से जोड़े रखती हैं। जब घर के बड़े लोग धनतेरस पर बर्तन खरीदते हैं, तो बच्चे भी इसके महत्व के बारे में सीखते हैं। इस तरह यह आदत केवल खरीदारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि परिवार की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन जाती है।
इस तरीके से इस त्योहार पर बर्तन खरीदने की परंपरा के पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ जीवन से जुड़ी व्यावहारिक सोच है। भगवान धन्वंतरि और अमृत कलश से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं इस दिन को विशेष बनाती हैं, वहीं बर्तनों की जरूरत इसे आम लोगों के लिए भी आसान परंपरा बनाती है।
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