शारदीय नवरात्रि में देशभर में मां दुर्गा की पूजा की जाती है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इस त्योहार का रंग कुछ अलग ही नजर आता है। यहां बड़े-बड़े पंडाल, मां दुर्गा की सुंदर मूर्तियां और ढाक की आवाज लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच लेती है। इसी बंगाली संस्कृति का एक खास हिस्सा है अल्पना आर्ट।
यह फर्श पर चावल के घोल से बनाई जाने वाली सुंदर कला है। इसमें फूल, कमल और पैरों के निशान जैसे डिजाइन बनाए जाते हैं। दुर्गा पूजा के दौरान अल्पना घरों और पूजा की जगहों को सजाने के साथ शुभ शुरुआत और मां के स्वागत का प्रतीक भी है। ऐसे में अगर आप अभी तक इसके बारे में नहीं जानती थीं, तो हम विस्तार से इसकी जानकारी दे रहे हैं। आइए जानते हैं-
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क्या होती है अल्पना आर्ट?
आपको बता दें कि अल्पना वेस्ट बंगाल और बांग्लादेश की एक पुरानी लोक कला है। इसे कागज या कैनवास पर बनाने के बजाय सीधे जमीन या फर्श पर बनाया जाता है। त्योहारों, पूजा और शादी जैसे खास मौकों पर घर की महिलाएं इसे अपने हाथों से बनाती हैं। इसे बनाने के लिए-
- उंगलियों, सूती कपड़े या रुई लगी छोटी लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है।
- इसका सफेद रंग आमतौर पर चावल को पीसकर बनाए गए घोल से तैयार किया जाता है।
- कई घरों में सफेद डिजाइन को उभारने के लिए फर्श पर पहले लाल गेरू भी लगाया जाता है।
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दुर्गा पूजा में क्यों खास माना जाता है अल्पना?
शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के स्वागत के लिए घरों और पूजा की जगहों को अच्छे से सजाया जाता है। इसी दौरान अल्पना बनाई जाती है। इसके डिजाइन पूजा की जगह को सुंदर बना देते हैं।
- मां के स्वागत के लिए: अल्पना में पैरों के निशान बनाए जाते हैं, जो मां दुर्गा के घर आने का संकेत माने जाते हैं।
- कमल का फूल: इसे पवित्रता और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
- गोल डिजाइन: गोल आकार में बनी अल्पना पूजा की जगह के बीच में बनाई जाती है।
- प्रकृति के डिजाइन: धान की बालियां, मछली, सूरज और चांद जैसे डिजाइन भी इसमें बनाई जाती हैं।
सैकड़ों साल पुरानी है अल्पना वाली कला
अल्पना की शुरुआत सैकड़ों साल पहले हुई थी। माना जाता है कि इसका रिश्ता पुराने ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से रहा है। पहले लोग त्योहारों और खास मौकों पर घर के फर्श को सजाने के लिए प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करते थे। बाद में बंगाल के कलाकारों ने भी इस कला को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।
अल्पना के डिजाइन में छिपे हैं कई मतलब
बताया जाता है कि अल्पना में बनने वाले डिजाइन सिर्फ डेकोरेशन के लिए नहीं होते हैं। कई डिजाइन लोगों की मान्यताओं और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं। जैसे-
- कमल और पैरों के निशान: शुभ शुरुआत और देवी के स्वागत से कनेक्टेड हैं।
- मछली और धान: बंगाल के खानपान, खेती और खुशहाली की याद दिलाते हैं।
- सूरज और चांद: खूबसूरत दुनिया का प्रतीक है।
- दरवाजे के पास बने डिजाइन: घर के एंट्रेंस को सुंदर बनाने और मेहमानों का स्वागत करने के लिए बनाए जाते हैं।
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