एक समय ऐसा था,जब मजदूरों के शोषण की कोई सीमा नहीं थी। अगर कोई श्रमिक इसके खिलाफ आवाज उठाने का साहस करता, तो उसे अपनी जान तक गंवानी पड़ जाती थी। इतिहास के पन्नों में कुछ ऐसे नाम दर्ज हैं, जिन्होंने मजदूरों के हक के लिए आवाज उठाई। उन्हीं में से एक हैं अनुसूया साराभाई। इन्हें गुजरात में श्रम आंदोलन की शुरुआत करने वाली पहली महिला के तौर पर जाना जाता है। आइए, नीचे दिए गए लेख में जानते हैं अनसूया साराभाई के बारे में-

कौन थी अनसूया साराभाई ?

अनसूया साराभाई का जन्म अहमदाबाद के एक बेहद अमीर और प्रतिष्ठित उद्योगपति परिवार में हुआ था। कम उम्र में अनसूया का विवाह हो गया था, लेकिन शादी लंबे समय तक नहीं चल पाई थी। अपने भाई के खिलाफ मजदूरों के हक की आवाज बुलंद करने वाली इस महिला का नाम अनसूया साराभाई था, जिन्हें लोग आदर से मोटाबेन भी कहते थे।

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मजदूरों के लिए भाई के खिलाफ अनसूया ने किया था आंदोलन

अनसूया साराभाई के भाई अंबालाल साराभाई अहमदाबाद के एक बहुत बड़े कपड़ा मिल मालिक थे। साल 1917 में अहमदाबाद के मिल मजदूरों की स्थिति बेहद खराब थी। वे बेहद कम मजदूरी और अमानवीय परिस्थितियों में काम कर रहे थे।

मजदूरों ने जब प्लेग बोनस और बेहतर मजदूरी की मांग की, तो मिल मालिकों ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया। अनसूया साराभाई से मजदूरों की यह परेशानी देखी नहीं गई, जिसके बाद उन्होंने अपने सगे भाई के खिलाफ खड़ी हो गई थीं।

अनसूया के साथ महात्मा गांधी ने भी किया था आंदोलन का समर्थन

भाई अंबालाल के खिलाफ जाकर अनसूया साराभाई ने मजदूरों का नेतृत्व किया। इसमें एक तरफ देश के सबसे बड़े मिल मालिकों में से एक अंबालाल साराभाई थे और दूसरी तरफ उनकी सगी बहन अनुसूया मजदूरों के हक के लिए उनके ही सामने खड़ी थीं। इस लड़ाई में बाद में महात्मा गांधी ने भी अनसूया जी का साथ दिया और मजदूरों के समर्थन में उपवास पर बैठे।

मजदूर महाजन संघ की हुई थी स्थापना

अनसूया साराभाई के इस संघर्ष के कारण मिल मालिकों को झुकना पड़ा और मजदूरों की मजदूरी में 35% की बढ़ोतरी की गई। इस जीत के बाद, साल 1920 में उन्होंने मजदूर महाजन संघ की स्थापना की, जो भारत के सबसे पुराने मजदूर संगठनों में से एक है। अनसूया के इस काम के कारण उन्हें लेबर मूवमेंट की जननी कहा जाने लगा गया।

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