स्वतंत्रता दिवस केवल आजादी का उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह देश की उन असाधारण कामों को सम्मानित करने का भी दिन है, जिन्होंने भारत का मान बढ़ाया है। स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में डॉ. गगनदीप कंग एक ऐसा ही जगमगाता नाम हैं। भारत में बच्चों में होने वाले संक्रमणों से बचाव के लिए टीकों के विकास में उनका योगदान अतुलनीय रहा है। अपनी लगन, नजरिया और अटूट मेहनत के बल पर उन्होंने न केवल करोड़ों मासूमों की जान बचाई, बल्कि दुनियाभर की महिलाओं और युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का एक नया अध्याय भी लिखा। ऐसे में इनके जर्नी के बारे में जानना तो बनता है। जानते हैं आगे...
रॉयल सोसाइटी में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला वैज्ञानिक
लंदन की प्रतिष्ठित संस्था 'रॉयल सोसाइटी' के करीब चार सौ से अधिक वर्षों के लंबे इतिहास में डॉ. गगनदीप कंग पहली ऐसी भारतीय महिला वैज्ञानिक हैं जिन्हें फेलो (FRS) चुना गया।
- मेडिकल शिक्षा और शोध: वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) से एमबीबीएस, एमडी और पीएचडी की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने बेलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन से पोस्टडॉक्टोरल रिसर्च किया।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान: वे सीएमसी वेल्लोर के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइंसेज विभाग में माइक्रोबायोलॉजी की प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रही हैं। साथ ही जॉन होपकिंस यूनिवर्सिटी और टफ्ट्स यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों से भी जुड़ी रही हैं।
भारत की 'वैक्सीन गॉडमदर' और रोबोवैक का निर्माण
पब्लिक हेल्थ सेंटर में अभूतपूर्व योगदान देने के कारण डॉ. गगनदीप कंग को सम्मान से भारत की 'वैक्सीन गॉडमदर' भी कहा जाता है।
- रोटावायरस टीकों का विकास: बच्चों में डायरिया और आंतों से जुड़े गंभीर संक्रमण से निपटने के लिए उन्होंने भारत बायोटेक के साथ मिलकर 'रोटावैक'स्वदेशी वैक्सीन तैयार करने में केंद्रीय भूमिका निभाई।
- टाइफाइड और पोलिया पर शोध: उन्होंने देश स्तर पर रोटावायरस और टाइफाइड की निगरानी के लिए नेशनल नेटवर्क तैयार किए और पोलिओ वैक्सीन के ट्रायल में अहम भूमिका निभाई।
- कोविड-19 से लड़ाई में योगदान: वे भारत सरकार के ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (THSTI) की कार्यकारी निदेशक रहीं, जहां महामारी के दौर में उनकी रिसर्च बेहद उपयोगी साबित हुई।
राष्ट्रीय पुरस्कार
डॉ. कंग की उपलब्धियां और उनका वैज्ञानिक स्किल्स पूरी दुनिया में सराहा गया है।
- इन्फोसिस प्राइज से सम्मानित: लाइफ साइंसेज के क्षेत्र में साल 2016 में उन्हें प्रतिष्ठित इन्फोसिस पुरस्कार से नवाजा गया।
- युवा महिला जैव-वैज्ञानिक पुरस्कार: साल 2006 में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर यंग वीमेन बायोसाइंटिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन में भूमिका: वे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), वेलकम ट्रस्ट और CEPI बोर्ड जैसी वैश्विक संस्थाओं की सलाहकार समितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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