आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और इंटरनेट ने जहां हमारी जिंदगी को बेहद आसान बना दिया है। मगर इसके कुछ गंभीर और डरावने पहलू भी हैं। आज के समय में ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, मॉर्फ्ड तस्वीरें या वीडियो वायरल करने की धमकियां देकर लोगों को मानसिक रूप से ब्लैकमेल करने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जब किसी महिला को ऐसी धमकी मिलती है, तो उसे समझ नहीं आता है कि क्या करें? इतना ही नहीं बल्कि अधिकतर मामलों में लोग डरकर चुप हो जाते हैं और ब्लैकमेलर के हिसाब से काम करते हैं।

मगर इस स्थिति में घबराने के बजाय सूझबूझ और कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना आपके लिए मददगार साबित हो सकता है। आज के इस लेख में हम आपको कुछ ऐसी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो इस स्थिति में जरूर अपनाने चाहिए। इसके लिए हमने साइबर एक्सपर्ट अंकित देव अर्पण और इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता नीतेश पटेल से कानूनी और साइबर प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त की है।

फोटो वायरल करने की धमकी मिलने पर करें ये 3 काम

जब भी आपको कोई निजी फोटो या वीडियो वायरल करने की धमकी दे, तो सबसे पहले इन तीन बातों का विशेष ध्यान रखें। इसकी मदद से आप खुद को सुरक्षित रख सकती हैं।

  1. ब्लैकमेलर्स का सबसे पहला हथियार आपका डर होता है। वे आपसे पैसों की डिमांड करेंगे। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि एक बार पैसे देने पर ब्लैकमेलर्स की मांग खत्म नहीं होती, बल्कि उनका हौसला और बढ़ जाता है। इसलिए अपनी कमजोरी दिखाने के बजाय हिम्मत से काम लें।
  2. देने वाले शख्स के मैसेज, चैट, कॉल रिकॉर्डिंग, उसकी प्रोफाइल के स्क्रीनशॉट और यदि कोई यूपीआई आईडी या बैंक खाता नंबर दिया गया है, तो उसे डिलीट बिल्कुल न करें। यह सारा डेटा अपराधियों तक पहुंचने और उन्हें सजा दिलाने का सबसे बड़ा सबूत बनता है।
  3. घटना को छिपाने या टालने की गलती बिल्कुल न करें। तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर जाएं या नजदीकी साइबर थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी शिकायत होगी, सबूत मिटने से पहले उतनी ही सख्त कार्रवाई हो सकती है। इसके साथ 1091 पर कॉल करे।

फोटो लीक होने से पहले रोकने के लिए क्या करें?

ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि प्राइवेट फोटो लीक होने से पहले ही उसे इंटरनेट पर वायरल होने से रोका जा सकता है। इसके लिए StopNCII.org (स्टॉप नॉन-कंसेंसुअल इंटीमेट इमेज) का इस्तेमाल कर सकती हैं। यह एक प्रकार का 'टेक्नोलॉजी सेल्फ-डिफेंस' टूल है, जो विशेष रूप से महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

इस टूल की खासियत यह है कि आपको अपनी निजी तस्वीरें इस पर अपलोड नहीं करनी पड़तीं। यह आपके डिवाइस पर ही फोटो का एक सुरक्षित 'डिजिटल हैश' यानी डिजिटल फिंगरप्रिंट तैयार कर देता है। इसके बाद फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड्स और मेटा जैसे दिग्गज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स उस हैश के आधार पर उस तस्वीर को अपने सिस्टम पर अपलोड ही नहीं होने देते।

फोटो वायरल करने की धमकी मिलने को लेकर कानूनी प्रक्रिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता नीतेश पटेल के अनुसार, ऐसे अपराधियों के खिलाफ बेहद कड़े प्रावधान मौजूद हैं। भारतीय कानून के तहत किसी की निजी तस्वीरों का गलत इस्तेमाल करना, उन्हें प्रसारित करने की धमकी देना और मानसिक प्रताड़ना देना एक गंभीर गैर-जमानती अपराध है।

  • आईटी एक्ट (Information Technology Act, 2000) धारा 66E- किसी भी व्यक्ति की निजी तस्वीरों या अंगों की तस्वीरें उसकी सहमति के बिना कैप्चर करने, पब्लिश करने या ट्रांसमिट करने पर रोक लगाती है।
  • धारा 67 और 67A- इलेक्ट्रॉनिक रूप में अशिष्ट, अश्लील या यौन रूप से स्पष्ट सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करने पर कड़ा दंड देती है। यह एक गैर-जमानती अपराध है जिसमें 5 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS): धारा 77 (Voyeurism & Dissemination)- किसी महिला की निजी तस्वीरों को उसकी सहमति के बिना लेना या आगे शेयर/प्रसारित करना गंभीर अपराध मानता है। धारा 308 (Extortion): तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर पैसे या अन्य किसी चीज़ की मांग करना (वसूली करना)।
  • धारा 351 (Criminal Intimidation)- किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर डराना-धमकाना।
  • धारा 356 (Defamation)- मानहानि और चरित्र हनन के इरादे से गलत या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करना।

फोटो ब्लैकमेलिंग पर साइबर प्रक्रिया क्या है?

साइबर एक्सपर्ट अंकित देव अर्पण का कहना है कि आज के समय में अपराधी तकनीक का गलत इस्तेमाल करके लोगों की निजी जिंदगियों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे मामलों में सबसे बड़ा हथियार जागरूकता और तकनीकी सतर्कता है। जब भी कोई डिजिटल ब्लैकमेलिंग का शिकार होता है, तो उसका डिजिटल फुटप्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य ही पुलिस को असली मुरजिम तक पहुंचाता है। घबराहट में आकर अपराधी की हर बात मानने या चैट डिलीट करने से केस कमजोर हो जाता है, इसलिए तकनीकी सबूतों को संभालकर रखना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

इन बातों का ध्यान रखकर आप अपने साथ होने वाले अपराध को रोक सकती हैं। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से। 

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