पेरेंट्स इस बात से परेशान हो जाते हैं कि उनका बच्चा अपनी उम्र के बच्चों के साथ खेलने या बात करने के बजाय बड़ों के साथ बैठना ज्यादा पसंद करता है। जब भी घर में कोई मेहमान आता है या बातचीत होती है, तो वह बच्चों के खेल छोड़कर बड़ों की चर्चा का हिस्सा बन जाता है। शुरुआत में यह एक आम बात लगती है, लेकिन लंबे समय में यह उसके सामाजिक विकास को प्रभावित कर सकती है। बच्चों के मानसिक विकास के लिए उनका अपने हमउम्र दोस्तों के साथ घुलना-मिलना बेहद जरूरी है। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि बच्चे ऐसा क्यों करते हैं और इस आदत को कैसे सुधारा जाए? इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...

बच्चे ऐसा क्यों करते हैं?

जो बच्चे अपनी उम्र से ज्यादा समझदार या मैच्योर होते हैं, उन्हें अपने हमउम्र बच्चों के साथ की गई बातें बचकानी और बोरिंग लगने लगती हैं। इसके अलावा, इकलौते बच्चों को बड़ों से ज्यादा ध्यान और तारीफ मिलती है। 

कुछ बच्चे स्वभाव से शर्मीले होते हैं, जिसके कारण वे दोस्तों के बीच होने वाली खींचतान या रिजेक्शन से डरते हैं और बड़ों के बीच खुद को ज्यादा सेफ महसूस करते हैं।

इस स्थिति से कैसे निपटें?

  • बच्चे पर दबाव बनाने या उसे डांटने के बजाय धैर्य से काम लें। सबसे पहले बच्चे को धीरे-धीरे दूसरे बच्चों के साथ घुलने-मिलने के मौके दें।
  • आप घर पर छोटी-छोटी प्ले-डेट्स रख सकते हैं, जहां केवल 1-2 बच्चे ही आएं, ताकि आपका बच्चा आराम से मिल सके।
  • उसे ऐसी एक्टिविटीज या स्पोर्ट्स क्लास में डालें जहां टीम वर्क की जरूरत होती है। जब वह दूसरे बच्चों के साथ थोड़ा भी समय बिताए तो उसकी सराहना करें।

एक्सपर्ट की राय

जब घर में बड़े आपस में बातचीत कर रहे हों, तो बच्चे को प्यार से टोकें। उससे कहें कि यह बड़ों की बातचीत है, आप अपने खिलौनों के साथ खेलें या अपनी ड्राइंग पूरी करें। माता-पिता को खुद भी बच्चे के साथ दोस्त बनकर खेलना चाहिए।

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Images: magnific