बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन न सिर्फ ज्योतिर्लिंग के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां लगने वाले पारंपरिक मेले भी दुनिया भर में फेमस हैं। उज्जैन में हर साल कार्तिक के पवित्र महीने में शिप्रा नदी के तट पर एक बहुत बड़ा मेला आयोजित किया जाता है। हम बात कर रहे हैं उज्जैन के प्रसिद्ध 'कार्तिक मेले' की। यह मध्य प्रदेश के सबसे बड़े और सबसे पुराने मेलों में से एक माना जाता है। यह मेला देव प्रबोधिनी एकादशी से शुरू होकर पूरे एक महीने तक चलता है।
उज्जैन के प्रसिद्ध कार्तिक मेले में धार्मिक आस्था, लोक कला, व्यापार और मनोरंजन का परफेक्ट कॉम्बिनेशन देखने को मिलता है। शिप्रा तट के रामघाट और आसपास के घाटों पर शाम होते ही पूरा माहौल रोशनी से जगमगा उठता है। आइए जानते हैं इस मेले के बारे में विस्तार से।
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उज्जैन का प्रसिद्ध कार्तिक मेला
भारत सरकार का डिजिटल सांस्कृतिक मंच और सहपीडिया आर्काइव के आधिकारिक पोर्टल के मुताबिक उज्जैन का कार्तिक मेला आज से नहीं, बल्कि कई सौ सालों से लगता आ रहा है। सनातन धर्म में कार्तिक मास को सबसे फल देने वाला महीना माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस पूरे महीने में मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के तट पर स्नान करने और दीपदान करने से सभी पापों का नाश होता है। इस मेले में हिस्सा लेने के लिए देश भर से साधु-संत और श्रद्धालु यहां आते हैं।
कार्तिक मेले का इतिहास
उज्जैन नगर निगम के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार इस मेले की शुरुआत ग्वालियर रियासत के सिंधिया राजवंश के शासनकाल के दौरान हुई थी। उस समय के महाराजाओं ने स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने और दूर-दूर से आने वाले तीर्थयात्रियों को शिप्रा तट पर एकत्र करने के लिए इस मेले का आयोजन किया था। आजादी के बाद इस मेले के आयोजन की जिम्मेदारी उज्जैन नगर निगम ने संभाल ली। आज यह मेला मालवी संस्कृति, लोक संगीत और ट्रेडिशनल खानपान को बढ़ावा देने का सेंटर बन चुका है।
उज्जैन कार्तिक मेले की खासियत
अगर आप भी इस मेले में जाने का मन बना रही हैं, तो इसकी कुछ खास बातों के बारे में जरूर जान लें -
- इस मेले में आपको मालवा का स्वाद चखने को मिलेगा।
- यहां जाकर आप गरमा-गरम दाल-बाफले, भुट्टे का कीस, गराडू, मावा जलेबी और पोहा-जलेबी का आनंद ले सकती हैं।
- इस मेले में आपको मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश की कई खूबसूरत हैंडीक्राफ्ट चीजें मिल जाएंगी।
- आप अपने घर को सजाने के लिए यहां से बहुत सारा सामान खरीद सकती हैं।
- मेले में हर शाम अलग-अलग तरह के लोक नृत्य, कबीर भजन, कवि सम्मेलन और संगीत के कई स्टेज देखने को मिलते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र स्नान और दीपदान की परंपरा
कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस मेले में सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। इस खास दिन लाखों श्रद्धालु शिप्रा नदी के तट पर पवित्र स्नान करके दीपदान करते हैं। शाम के समय शिप्रा नदी के तट पर भव्य महाआरती भी होती है। आरती के समय शिप्रा नदी के जल में तैरते हुए हजारों जलते दीपक देखना अपने आप में अद्भुत अनुभव होता है।
निष्कर्ष:अगर आप उज्जैन जाने का प्लान बना रही हैं, तो कार्तिक मेला घूमने जरूर जाएं। इस मेले में आप आस्था, परंपरा और संस्कृति का एक बेहतरीन संगम देख सकती हैं। यहां आपको मालवा के प्रसिद्ध व्यंजनों से लेकर तरह-तरह की हस्तशिल्प चीजें आसानी से मिल जाएंगी। यह यात्रा आपके लिए एक बेहद यादगार और खूबसूरत अनुभव साबित होगी। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।
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