जब भी हम इतिहास के पन्ने पलटते हैं, तो कई ऐसी महान हस्तियों का नाम सामने आता है, जिनके बारे में जानकर न केवल गर्व महसूस होता है, बल्कि उनकी कहानी भी बहुत दिलचस्प होती है। इतिहास के पन्नों पर आप नजर डालेंगे, तो यह भी पता चलेगा कि कैसे कई महिलाओं ने देश के विकास, नारी शिक्षा महिलाओं के हक और उस दौर की कुरीतियों को दौर करने की दिशा में काम किया। ऐसी ही एक महिला थीं भोपाल की आखिरी महिला नवाब सुल्तान जहां बेगम। उन्होंने न केवल भोपाल के विकास के लिए काम किया, बल्कि देश की तस्वीर बदलने और महिला शिक्षा की वकालत करने में भी अहम भूमिका निभाई। शिक्षा, प्रगति और नवाचारों के लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है। हमारी खास सीरीज 'Her Story: महिलाएं जिन्होंने बदल दी दुनिया' में हम आपको ऐसी ही महिलाओं के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने अपने हौसले और हिम्मत से इतिहास बदलने की हिम्मत दिखाई। चलिए आज इस सीरीज में सुल्तान जहां बेगम के बारे में जानते हैं।
भोपाल की आखिरी महिला नवाब थीं बेगम सुल्तान जहां
सुल्तान जहां बेगम का जन्म 9 जुलाई 1858 को हुआ था। उनकी गिनती इतिहास की प्रगतिशील महिला शासकों में की जाती है। उन्होंने साल 1901 से साल 1926 तक शासन किया। उन्होंने अपनी माता के निधन के बाद भोपाल की गद्दी संभाली थी। उनकी सोच बहुत दूरदर्शी थी और उन्होंने भोपाल के लिए विकास के लिए कई काम किए थे। बेगम्स ऑफ भोपाल पर शोध करने वाली एक स्वतंत्र पत्रकार ने उनके बारे में लिखा था कि वह भोपाल को बिल्कुल यूरोपियन स्टाइल में विकसित करने की कोशिश कर रही थीं। अगर वह कुछ साल और जिंदा रहतीं, तो भोपाल की दशा कुछ और ही होती।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की संस्थापक चांसलर थीं
बेगम सुल्तान का पूरा नाम हज्जाह नवाब डेम सुल्तान जहां बेगम था। वह महिला शिक्षा की पैरवी करती थीं और उन्होंने अपने शासनकाल में भोपाल में कई बड़े शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की थी। उन्होंने भोपाल में प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य किया था। बेगम सुल्तान जहां अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की संस्थापक चांसलर थीं। वह विश्व इतिहास में किसी विश्वविद्यालय की पहली महिला चांसलर बनीं। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कई कदम उठाए थे।
महिलाओं के विकास के लिए किए थे कई काम
बेगम सुल्तान जहां ने महिलाओं के विकास के लिए कई काम किए थे। उनका मानना था कि किसी भी शहर, समाज या देश की उन्नति के लिए महिलाओं की शिक्षा बहुत जरूरी है। उन्होंने महिलाओं के लिए एक कला विद्यालय भी शुरू किया था, जहां उन्हें कई ऐसी ट्रेनिंग दी जाती थीं जिनसे वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। उन्होंने शिक्षा पर स्वास्थ्य पर कई किताबें लिखी थीं।
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सैफ अली खान से था यह रिश्ता
बेगम सुल्तान जहां, सैफ अली खान की दादी की दादी थीं। उनकी बेटी साजिदा सुल्तान की शादी पटौदी के नवाब इफ्तिखार अली खान से हुई थी और उनके बेटे मंसूर अली खान पटौदी ने शर्मिला टैगोर से शादी की थी।
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'महिलाएं जिनके हौसले ने बदल दिया इतिहास' सीरीज में हम रोजाना ऐसी ही साहसी और दुनिया को बदलने का हौसला रखने वाली महिलाओं की कहानी आप तक पहुंचाते रहेंगे। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। साथ ही ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
