आज के आधुनिक दौर में हर घर के अंदर आपको खूबसूरत इंटीरियर देखने को मिल ही जाएगा। चमचमाते मार्बल, टाइल्स और पक्के सीमेंट के फर्श अब लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं, लेकिन एक समय ऐसा था जब गांवों और कस्बों में कच्चे घरों को मिट्टी और गोबर से लीपा जाता था। क्या आपने कभी सोचा है, इससे घर लीपने के पीछे क्या वजह थी? अगर नहीं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

क्यों पहले मिट्टी-गोबर से लीपे जाते थे घर? 

पहले के समय में घर के आंगन को मिट्टी-गोबर से लीपना आम बात थी। यह केवल घर को चमकाने, साफ-सफाई या संस्कृति का हिस्सा ही नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरा और अद्भुत वैज्ञानिक कारण भी छुपा हुआ था।

1. घर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने के लिए

आजकल लोग गर्मी से बचने के लिए एसी या कूलर का सहारा लेते हैं, लेकिन पुराने समय में ये चीजें नहीं हुआ करती थीं। ऐसे में मिट्टी-गोबर से लीपना घरों को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने में मदद करता था। मिट्टी और गोबर से लीपे गए घर के अंदर का तापमान मौसम के हिसाब से संतुलित रहता था। मिट्टी में थर्मल इंसुलेशन के गुण होते हैं, जो बाहरी तापमान को नियंत्रित रखते हैं। इसी वजह से लोग घरों को गोबर और मिट्टी से लीपते थे। 

2. सैनिटाइजर और एंटी बैक्टीरियल सुरक्षा

गोबर का इस्तेमाल केवल लेप तैयार करने के लिए नहीं, बल्कि लोग इसका सैनिटाइजर के रूप में भी इस्तेमाल करते थे। विज्ञान भी यह मानता है कि गाय के गोबर में प्राकृतिक एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण होते हैं। ये हवा में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और कीटाणुओं को पनपने से रोकते हैं। बरसात में जब घरों के अंदर कीड़े-मकोड़े या फंगस आने का खतरा बढ़ जाता था, तब गोबर के लेप से इन परेशानियों से बचाव में मदद मिलती थी। 

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3. धूल और मिट्टी से बचाव

कच्ची मिट्टी के घरों में सबसे बड़ी समस्या धूल और मिट्टी उड़ने की होती थी। इस समस्या से बचने के लिए भी लोग अपने घरों में मिट्टी और गोबर का लेप बनाकर इससे फर्श को लीपते थे। सूखने के बाद यह मिश्रण मिट्टी के कणों को आपस में कसकर बांध देता है, जिससे घर साफ और धूल-मुक्त हो जाता है। इससे घर में झाड़ू लगाना भी आसान हो जाता था।

4. एनवायरमेंट और सस्टेनेबल लिविंग

मिट्टी और गोबर का यह मिश्रण नेचुरल और बायोडिग्रेडेबल होता है। यह प्रकृति से लिया जाता है और उपयोग के बाद वापस प्रकृति में ही विलीन हो जाता है, जिससे पर्यावरण को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचता। यह सस्टेनेबल लिविंग का सबसे पुराना और बेहतरीन उदाहरण था। हालांकि, आज भी भारत में ऐसे कई गांव हैं, जहां लीपने की यह परंपरा जारी है। 

 

मिट्टी और गोबर से घरों को लीपने की यह परंपरा केवल गरीबी या साधनहीनता की बात नहीं थी, बल्कि यह स्वास्थ्य, स्वच्छता और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने की एक वैज्ञानिक कला थी। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से। 

Image Credit : SHUTTERSTOCK/MAGNIFIC