सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और अटूट प्रेम का प्रतीक है। हालांकि, इस पावन अवसर पर भद्रा काल का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। भद्रा काल में राखी बांधना पूरी तरह वर्जित है, क्योंकि यह एक अशुभ समय माना जाता है। ऐसे में सभी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि राखी बांधने की सही तिथि क्या है और  शुभ मुहूर्त के बारे में पता होना जरूरी है। इस लेख में दिए गए इनपुट वृंदावन के अनंतदास जी महाराज द्वारा दिए गए हैं। ऐसे में जानते हैं, क्या कहते हैं महाराज जी...

रक्षाबंधन तिथि और शुभ समय

साल 2026 में रक्षाबंधन से जुड़ी तिथियां और समय सारणी नीचे दी गई है-

विवरण समय और तिथि
रक्षाबंधन पर्व की तिथि 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)
राखी बांधने का शुभ समय सुबह 05:57 बजे से 09:48 बजे तक
शुभ मुहूर्त की कुल अवधि 03 घंटे 51 मिनट
भद्रा काल की स्थिति सूर्योदय से पूर्व ही भद्रा समाप्त
पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 27 अगस्त 2026 को सुबह 09:08 बजे
पूर्णिमा तिथि का समापन 28 अगस्त 2026 को सुबह 09:48 बजे

अगर सुबह के वक्त राखी न बांध पाएं तो आप अभिजीत मुहूर्त11:56 बजे से 12:48 बजे भी राखी बांध सकती हैं।

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राखी का आध्यात्मिक महत्व

सावन पूर्णिमा के दिन राखी बांधने की यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। ऐसे में इस दिन का आध्यात्मिक महत्व निम्न प्रकार है-

  • उपाकर्म संस्कार: ब्राह्मण समुदाय में श्रावण पूर्णिमा के दिन जनेऊ बदलने की परंपरा है, जिसे 'उपाकर्म' कहा जाता है।
  • रक्षासूत्र: पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवराज इंद्र को असुरों पर विजय प्राप्त करने के लिए रक्षासूत्र बांधा गया था।

पूजा की थाली कैसे तैयार करें?

रक्षाबंधन पर्व को विधि-विधान से संपन्न करने के लिए पूजा की थाली का सही होना जरूरी है।

  • सबसे पहले आप थाली में नया सूती कपड़ा बिछाएं और बीच में कुमकुम से स्वास्तिक या ओम का शुभ चिह्न बनाएं।
  • पूजा के लिए बिना टूटे हुए सफेद चावलों का प्रयोग करें।
  • हल्दी और चूने के मिश्रण से बनी शुद्ध रोली रखें। इसी से भाई के माथे पर तिलक किया जाता है।
  • थाली में एक बिना छिला हुआ साबुत नारियल या सुपारी रखें, जिसे बहनें पूजा के बाद भाई को देती हैं।
  • ताजा जल से भरा हुआ कलश समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है। इसी जल का उपयोग रोली का घोल बनाने के लिए किया जाता है।
  • पौराणिक नियमों के अनुसार, असली रक्षासूत्र एक छोटी पोटली होती है, जिसमें चावल, सफेद सरसों और सोने का धागा भरा जाता है। आजकल इसके स्थान पर बाजार में मिलने वाली सुंदर और फैंसी राखियों का प्रयोग होता है। थाली में हमेशा जोड़े में राखी रखें।

निष्कर्ष

रक्षाबंधन केवल एक धागा बांधने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह शास्त्रों में बताए गए नियमों, शुभ मुहूर्त और परंपराओं को सही ढंग से निभाने का पर्व है।

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Images: magnific/AI