Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष बस कुछ ही दिनों में शुरू होने वाला है। यह समय हमारे पितरों को याद करने का होता है। यह करीब 15-16 दिन तक चलता है और मुख्य श्राद्ध 27 सितंबर से शुरू होगा। इस दौरान हमें बहुत से ऐसे शब्द हैं जिनका मतलब नहीं पता होता है। तो आइए जानते हैं पितृपक्ष से जुड़े ये 10  शब्द जो आपको जरूर जानने चाहिए, ताकि आप पूरे विधि-विधान से पितरों को प्रसन्न कर सकें।

पितृपक्ष से जुड़े 10 जरूरी शब्द और उनका मतलब

पितृपक्ष के दौरान तर्पण, पिंडदान, कुश और पितृपक्ष 2026 से जुड़े इन 10 शब्दों का सरल अर्थ नीचे दिया गया है। आइए इनके बारे में ज्योतिषाचार्य सिद्धार्थ एस कुमार विस्‍तार में जानते हैं।

1. तर्पण

पितृपक्ष में तर्पण का मतलब अपने पितरों को संतुष्ट करना होता है। ऐसे में अपने पितरों को कुश,काले तिल और जल से पितरों को अंजलि अर्पित की जाती है।

2. पिंडदान

पितृपक्ष में अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया जाता है। ऐसे में मोक्ष के लिए चावल, जौ, घी और काले तिल से बने पिंड (गोले) को अर्पित किया जाता है।

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3. श्राद्ध

श्राद्ध का मतलब होता है 'श्रद्धा से किया गया काम'। पितृपक्ष में अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और प्रेम प्रकट करने के लिए जो पूजा, तर्पण और दान किया जाता है, उसे श्राद्ध कहते हैं।

4. पितृपक्ष

हिंदू धर्म में पितृपक्ष वह समय है, जब लोग अपने पितरों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और उनकी शांति के लिए तर्पण, पिंडदान करते हैं। यह 16 चंद्र दिनों का समय होता है।

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5. कुश

पितृपक्ष में कुश एक काफी पवित्र और जरूरी घास है, जिसके बिना तर्पण और पिंडदान के काम अधूरे माने जाते हैं। इसलिए, इसका होना काफी जरूरी माना गया है।

6. काले तिल

पितृपक्ष में तर्पण और पिंडदान करते वक्त काले तिल का उपयोग जरूर होता है। ऐसा कहा जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

7. सर्वपितृ अमावस्या

सर्वपितृ अमावस्या पितृपक्ष का आखिरी और सबसे जरूरी दिन माना जाता है। इस दिन सभी ज्ञात या अज्ञात तिथियों वाले पितरों का एक साथ श्राद्ध किया जाता है।

8. गोदान

पितृपक्ष में गोदान का मतलब है अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए योग्य ब्राह्मण को गाय दान करना।

9. ब्राह्मण भोजन

पितृपक्ष में श्राद्ध की तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। मान्यता है कि भोजन का अंश सीधे पितरों तक पहुंचता है।

10. अक्षयवट

पितृपक्ष में अक्षयवट का मतलब वो प्राचीन वट वृक्ष है जो कभी नष्ट नहीं होता है। ये वृक्ष  गया जी में स्थित है। इस अक्षयवट  के नीचे पितरों की तृप्ति और मोक्ष के लिए पिंडदान व श्राद्ध कर्म किया जाता है।

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अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य केवल आप तक सही जानकारी पहुंचाना है।

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