Online Fraud Money Recovery: दिवाली-दशहरे के टाइम शॉपिंग ऑफर और कैशबैक के नाम पर ठगी सबसे ज्यादा बढ़ जाती है। एक लिंक पर क्लिक किया, OTP बताया और देखते ही देखते खाते से हजारों रुपये गायब। अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो घबराने का वक्त नहीं है, एक्शन का वक्त है। फ्रॉड के बाद के पहले 2 घंटे को गोल्डन आवर (Golden Hour) कहा जाता है, इसी में आपका पैसा होल्ड या फ्रीज हो सकता है। सही जगह शिकायत की तो पैसा वापस आने के पूरे चांस हैं। आइए दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट मुफ्ती उसामा नदवी से जानते हैं कि कैसे डिजिटल फ्रॉड के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है?

क्या होता है डिजिटल फ्रॉड?

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ऑनलाइन पैसा कटते ही वो हमेशा के लिए चला गया है, लेकिन ऐसा नहीं है। आपका पैसा तुरंत ठग के पास नहीं जाता है, वो कुछ देर के लिए बैंक और पेमेंट गेटवे के बीच अटका रहता है। RBI के नियम के मुताबिक, अगर आप 3 दिन के अंदर फ्रॉड रिपोर्ट करते हैं तो बैंक को आपकी रकम लौटानी होती है।

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1. सबसे पहले सबूत सेव करें

जैसे ही फ्रॉड का पता चले, स्क्रीनशॉट लेना शुरू करें। कितनी रकम कटी, किस तारीख और टाइम पर कटी, ट्रांजेक्शन ID क्या थी, किस नंबर से कॉल या मैसेज आया था; सारी जानकारी एक जगह नोट कर लें। यही डिटेल बैंक और साइबर सेल सबसे पहले मांगेगी। बिना सबूत के शिकायत कमजोर पड़ जाती है। इसलिए, इन बातों का सबसे ज्यादा ध्यान रखें।

2. तुरंत ब्लॉक कराएं बैंक और UPI

पैसा कटते ही देर बिल्कुल न करें। अपने बैंक के 24x7 कस्टमर केयर नंबर या ऐप के चैट सपोर्ट पर कॉल करें। अपना कार्ड, नेटबैंकिंग और UPI ID तुरंत होटलिस्ट या ब्लॉक करने को कहें। इससे ठग आपके खाते से और पैसे नहीं निकाल पाएगा। बैंक में इस कॉल का रेफरेंस नंबर जरूर ले लें।

3. 1930 और Cybercrime.gov.in पर तुरंत शिकायत

ठगी में ये सबसे जरूरी स्टेप है। नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। ये नंबर 24 घंटे चालू रहता है। साथ ही, cybercrime.gov.in पोर्टल पर जाकर 'Report Financial Fraud' पर अपनी शिकायत दर्ज करें। यहां शिकायत दर्ज होते ही आपका केस सीधे बैंक के फ्रॉड डिपार्टमेंट और पुलिस तक पहुंच जाता है और लेन-देन को फ्रीज करने की प्रोसेस शुरू हो जाती है।

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4. FIR दर्ज कराना क्यों जरूरी है?

अगर रकम बड़ी है जैसे 50 हजार से ज्यादा; तो सिर्फ ऑनलाइन शिकायत से काम नहीं चलेगा। अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में जाकर लिखित FIR या e-FIR कराएं। FIR होने पर पुलिस को कानूनी तौर पर आपके केस में बैंक अकाउंट ट्रैक करने और होल्ड कराने की पावर मिल जाती है।

5. पेमेंट गेटवे को करें मेल

अगर फ्रॉड किसी लिंक, वेबसाइट या ऐप के जरिए हुआ है, तो Razorpay, Paytm, PhonePe, Google Pay जैसे गेटवे को मेल करें। अपनी शिकायत में ट्रांजेक्शन ID, तारीख और cybercrime पोर्टल का Acknowledgement नंबर लिखें। गेटवे कंपनियां संदिग्ध मर्चेंट अकाउंट को तुरंत सस्पेंड कर देती हैं।

6. अकाउंट फ्रीज करने के लिए लिखित आवेदन करें

बैंक को सिर्फ कॉल करना काफी नहीं है। ब्रांच में जाकर या ईमेल से एक लिखित एप्लिकेशन दें कि जिस अकाउंट में आपका पैसा गया है, उसे 'Lien' या 'Freeze' किया जाए। इस एप्लिकेशन के साथ अपनी FIR कॉपी और साइबर क्राइम रिपोर्ट जरूर लगाएं। इसी से आपके पैसे के आगे जाने पर रोक लगती है।

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7. क्लेम नंबर लेकर फॉलो-अप करते रहें

शिकायत के बाद बैंक आपको एक Complaint Reference Number देगा। उसे संभाल कर रखें। हर 2-3 दिन में बैंक से स्टेटस अपडेट मांगते रहें। RBI के अनुसार, अगर आपने 3 वर्किंग डेज के अंदर फ्रॉड की सूचना दी है और आपकी कोई लापरवाही नहीं है, तो बैंक को 10 दिन के अंदर पैसा वापस करना होता है।

ऑनलाइन फ्रॉड के बाद शर्मिंदा होकर चुप बैठ जाना सबसे बड़ी गलती है। ठग इसी का फायदा उठाते हैं। याद रखिए, शिकायत ही आपकी रिकवरी है। 1930 पर कॉल, बैंक को ब्लॉक और cybercrime.gov.in; ये तीन काम अगर आप 1 घंटे के अंदर कर लेते हैं तो 80% मामलों में पैसा वापस आने की उम्मीद रहती है। और हां, कभी भी OTP, PIN या स्क्रीन शेयर ऐप किसी के साथ शेयर न करें। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।