बरसात के मौसम में मच्छरों से बचाव के लिए कॉइल, लिक्विड वेपोराइजर और एरोसोल स्प्रे का इस्तेमाल आम बात है। यह सच है कि ये प्रोडक्ट्स मच्छरों के काटने से बचाते हैं, लेकिन ये हर इंसान के लिए सुरक्षित या आरामदायक हों, ऐसा जरूरी नहीं है। सांस की बीमारी, अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए इनका धुआं नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में इन प्रोडक्ट्स का सही तरीके से इस्तेमाल करना और कमरे में वेंटिलेशन बनाए रखना बेहद जरूरी है। इस विषय पर हमने फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल में पल्मोनोलॉजी और स्लीप मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉ. पंकज छाबरा से भी बात की है। जानते हैं आगे...
कॉइल के क्या नुकसान हैं?
मच्छरों वाले कॉइल से स्वास्थ्य संबंधित कई समस्या हो जाती हैं, इनमें से एक है फेफड़े को नुकसान पहुंचाना-
कॉइल जब धीरे-धीरे जलता है, तो घना धुआं और बारीक कण निकलते हैं। बंद कमरे में देर तक इस धुएं के बीच रहने से गले, नाक और सांस की नली में जलन होने लगती है।
कॉइल के धुएं से लगातार संपर्क के कारण खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ और घबराहट जैसी शिकायतें हो सकती हैं। अस्थमा या सांस के पुराने मरीजों के लिए यह धुआं बहुत ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।
क्या लिक्विड वेपोराइजर कॉइल से बेहतर विकल्प है?
एक्सपर्ट के अनुसार, लिक्विड वैपोराइजर से कॉइल की तरह दिखाई देने वाला धुआं तो नहीं निकलता, लेकिन यह हवा में लगातार केमिकल छोड़ता रहता है। आमतौर पर दिशा-निर्देशों के तहत इसका इस्तेमाल करने से स्वस्थ लोगों को तुरंत बड़ी दिक्कत नहीं होती, लेकिन बाद में धीरे-धीरे परेशानी महसूस हो सकती है।
इस्तेमाल के दौरान बरतें ये सावधानियां
इसे पूरी तरह सुरक्षित मानकर बेफिक्र न हों और सोते समय अपने बिस्तर के ठीक पास या सिरहाने इसे लगाने से बचें। छोटे या बंद कमरों में इसे घंटों तक चलाकर न छोड़ें वरना आपको परेशानी हो सकती है।
मच्छर भगाने वाले स्प्रे का इस्तेमाल कितना सुरक्षित?
कमरे में स्प्रे छिड़कते समय अगर यह सीधे सांस के जरिए अंदर चला जाए, तो तुरंत गले में जलन और सांस की समस्या हो सकती है। जानें इस्तेमाल का तरीका-
- बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों की मौजूदगी में कभी भी स्प्रे न करें।
- स्प्रे करने के बाद कुछ देर के लिए कमरे को बंद करके बाहर चले जाएं और वापस आने से पहले खिड़की-दरवाजे खोलकर हवा पास होने दें।
एलर्जी के मरीज कैसे करें अपना बचाव?
जिन्हें धूल, धुएं या तेज केमिकल से एलर्जी है, उन्हें इन प्रोडक्ट्स के सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए। अगर किसी रिपेलेंट से लगातार खांसी, सीने में जकड़न या सांस फूलने की समस्या हो, तो उसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें और डॉक्टर से परामर्श लें।
मच्छरों से बचने के लिए रसायनों के बजाय खिड़कियों पर जाली लगवाएं और सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। घर के आसपास पानी जमा न होने दें और शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें।
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मच्छरों से सुरक्षित कैसे रहें?
घर में एक साथ कई तरह के रिपेलेंट का इस्तेमाल करने से बचें, इससे हवा में जहर बढ़ सकता है। प्राथमिकता हमेशा यह होनी चाहिए कि मच्छरों को पनपने न दिया जाए और घर के अंदर केमिकल का उपयोग कम से कम हो। अपने घर में पानी इकट्ठा न होने दें। शाम के वक्त खिड़की-दरवाजे बंद करें। अगर किसी प्रोडक्ट के इस्तेमाल के बाद सांस लेने में दिक्कत बनी रहे, तो तुरंत ताजी हवा में जाएं और स्थिति न सुधरने पर डॉक्टरी इलाज लें।
निष्कर्ष
घर के अंदर की हवा को जहरीला बनाए बिना मच्छरों से बचाव करना ही समझदारी है। सफाई, जाली का इस्तेमाल और सीमित मात्रा में रिपेलेंट का उपयोग आपको और आपके परिवार को स्वस्थ रख सकता है।
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