भागदौड़ भरी जिंदगी में हफ्ते भर काम करने के बाद सभी को संडे का इंतजार रहता है। सप्ताह के सात दिनों में सिर्फ रविवार ही ऐसा दिन होता है, जब ज्यादातर स्कूल, कॉलेज और ऑफिस बंद रहते हैं। क्या आप जानती हैं कि छुट्टी के लिए रविवार का दिन ही क्यों चुना गया? अगर नहीं, तो इस लेख में इसके पीछे का इतिहास जरूर जानें।
छुट्टी के लिए रविवार ही क्यों?
हफ्ते भर की व्यस्तता के बाद रविवार ही सुकून भरा दिन होता है। रविवार को ही अवकाश रहने के पीछे एक ऐतिहासिक वजह है। आइए जानते हैं छुट्टी के लिए रविवार का दिन तय होने का दिलचस्प कारण।
अंग्रेजों के जमाने में नहीं मिलती थी एक भी छुट्टी
यह बात ब्रिटिश शासन के दौर की है। उस समय फैक्ट्रियों और मिलों में काम करने वाले भारतीय मजदूरों को हफ्ते के सातों दिन लगातार काम करना पड़ता था। बिना किसी ब्रेक के काम करने से मजदूरों में बहुत ज्यादा शारीरिक और मानसिक थकान होने लगती थी।
नारायण मेघाजी लोखंडे ने उठाई मजदूरों की आवाज
इतिहासकारों के अनुसार, समाज सुधारक नारायण मेघाजी लोखंडे ने 19वीं शताब्दी के अंत में मजदूरों के हक के लिए आवाज उठाई। उन्होंने 1881 से लेकर 1884 के बीच मजदूरों को एकजुट कर कई आंदोलन किए और ब्रिटिश सरकार को मांग पत्र सौंपे। उनका कहना था कि लगातार काम करने वाले कर्मचारियों को हफ्ते में कम से कम एक दिन आराम और अपने परिवार के लिए जरूर मिलना चाहिए।
सालों के संघर्ष के बाद मिली रविवार की छुट्टी
मजदूरों की एकजुटता और नारायण मेघाजी लोखंडे के कई सालों तक लगातार संघर्ष करने के बाद आखिरकार ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा। 10 जून 1890 को अंग्रेजों ने रविवार को साप्ताहिक छुट्टी के रूप में स्वीकार कर लिया। आपको बता दें कि लोखंडे को भारत के शुरुआती श्रमिक आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण नेता भी माना जाता है।
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ब्रिटिश परंपरा और ईसाई धर्म भी था एक कारण
रविवार को ही छुट्टी का दिन चुनने का एक और प्रमुख कारण था। दरअसल, ब्रिटिश अधिकारियों के लिए ईसाई परंपरा के अनुसार रविवार प्रार्थना और विश्राम का दिन होता था। इस दिन अंग्रेज अफसर चर्च जाया करते थे, जिस वजह से सरकारी कामकाज पहले से ही धीमा रहता था। इसलिए भी रविवार का दिन फिक्स किया गया।
आज संडे बन चुका है 'फैमिली डे'
हालांकि, आज के समय में अस्पताल, मीडिया और कई कंपनियों में लोग रविवार को भी काम करते हैं, लेकिन उन्हें भी हफ्ते में किसी एक दिन साप्ताहिक छुट्टी जरूर मिलती है। आज के दौर में रविवार सिर्फ आराम का दिन नहीं, बल्कि अपनों के साथ समय बिताने का दिन बन गया है। इस दिन लोग दोस्तों से मिलते हैं, शॉपिंग करने जाते हैं और ट्रिप प्लान करते हैं।
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अब आप जान चुके हैं कि रविवार की छुट्टी के पीछे हमारे देश के मजदूर नेता का कितना बड़ा योगदान था। उम्मीद है कि आपको यह ऐतिहासिक जानकारी बहुत पसंद आई होगी। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।
Image Credit : magnific
