भारतीय त्योहारों की धूम विदेशों तक देखने को मिलती है। भारत को त्योहारों का देश भी कहा जाता है, जहां हर महीने कोई न कोई नया त्योहार आ ही जाता है। लेकिन अगर आपने कभी ध्यान दिया होगा, तो पूरे साल में सितंबर से लेकर नवंबर तक के महीनों में त्योहारों की एक लंबी लड़ी देखने को मिलती है। 

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी से लेकर नवरात्रि, दशहरा और दिवाली तक, सभी बड़े-बड़े त्योहार इन्हीं महीनों में मनाए जाते हैं। अगर आप भी इसके पीछे का कारण नहीं जानती हैं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें। आज हम आपको इसके पीछे के सामाजिक, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और धार्मिक कारणों के बारे में बताएंगे।   

फसल की कटाई

जून से अगस्त का महीना किसानों के लिए जी-तोड़ मेहनत का समय होता है। इन महीनों में खरीफ की फसल बोई जाती है। ऐसे में सितंबर से नवंबर के बीच यह फसल पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है, जिससे किसानों के घरों में नई फसल और आर्थिक समृद्धि आती है। अन्न-धन रूपी लक्ष्मी के स्वागत और नई फसल की खुशी में लोग इन सभी त्योहारों को बड़े धूमधाम से मनाते हैं। 

सुहावना मौसम और अनुकूल वातावरण

सितंबर का महीना आते-आते धीरे-धीरे बारिश का दौर खत्म होने लगता है और वातावरण में हल्की-हल्की ठंडक व हल्की धूप का अहसास होने लगता है। इस सुहावने मौसम की शुरुआत एक नए उत्साह के साथ होती है। मौसम अच्छा होने की वजह से ही लोग रामलीला, रावण दहन और गरबा-डांस जैसी बाहरी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। 

पौराणिक और धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या वापस लौटे थे। उनके अयोध्या लौटने की खुशी में ही नगरवासियों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था, तभी से दिवाली मनाने की शुरुआत हुई। इसके अलावा, मां दुर्गा ने महिषासुर का वध करके अधर्म पर धर्म की विजय प्राप्त की थी, इसलिए इन्हीं महीनों के दौरान नवरात्रि और दशहरा का पर्व बड़े भक्ति भाव से मनाया जाता है।

राजा-महाराजाओं की नीतियां

ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो प्राचीन समय में राजा-महाराजा बरसात का मौसम खत्म होने के बाद ही अपने विजय अभियानों पर निकलते थे। इसके लिए वे शरद ऋतु और शारदीय नवरात्रि का समय चुनते थे, क्योंकि इस समय नदियां उफान पर नहीं होती थीं और रास्ते भी पूरी तरह साफ व सुगम होते थे।  

व्यापार और आर्थिक चक्र का जुड़ाव

आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो फसल काटने के बाद किसान उसे बेचकर पैसे इकट्ठा करते थे। यही परंपरा आज भी किसी न किसी रूप में जारी है। आज भी भारतीय परिवारों में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोने-चांदी और कपड़ों की सबसे ज्यादा खरीदारी इन्हीं महीनों के दौरान होती है, जिससे देश के बाजार में भी नई रौनक आ जाती है। 

निष्कर्ष: सितंबर से नवंबर के बीच भारतीय त्योहार मनाने के पीछे कोई एक नहीं, बल्कि कृषि चक्र, मौसम, ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण कारण हैं। अगर आप अब तक इसके कारणों से अनजान थीं, तो उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके बेहद काम आएगी। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हरजिंदगी से।  

(image credit: magnific)