हरियाणवी शादियों में डांस और गाने का अपना ही क्रेज होता है। ढोल की थाप हो या डीजे पर बजता कोई पुराना देसी गाना, शादी में आए लोग खुद को डांस करने से रोक ही नहीं पाते हैं। ऐसा ही एक गाना है, 'जीजा तू काला, मैं गोरी घणी'। आपने भी इसे शादी या किसी डांस वीडियो में जरूर सुना होगा। इसकी म्यूजिक इतनी जबरदस्त है कि पूरा माहौल जोश से भर जाता है, लेकिन जब आप इस गीत के शब्दों का मतलब जानेंगी तो आपको हंसी छूट जाएगी।
दरअसल, इस गाने में एक साली अपने जीजा को उसके काले रंग को लेकर छेड़ती है और फिर उसके साथ फोटो खिंचवाने की भी जिद करती है। यही छोटी-सी बात गाने को मजेदार बना देती है। इस गाने का इतिहास भी दशकों पुराना है। इसके बाद भी शादी-ब्याह में इसका जलवा कम नहीं हुआ है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं-
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'जीजा तू काला, मैं गोरी घणी' का क्या है मतलब?
इस गाने की सबसे खास बात इसके सीधे-सादे, लेकिन मजेदार बोल ही हैं। हरियाणवी में घणी का मतलब होता है बहुत ज्यादा। वहीं जणी का इस्तेमाल यहां किसी इंसान के लिए किया गया है। गाने में साली अपने जीजा से कहती है कि वह सांवले हैं और वह खुद बहुत गोरी है। इसके बाद वह दोनों की साथ में फोटो खिंचवाने की बात करती है।
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यानी पूरी बात कुछ ऐसी है कि साली अपने जीजा को छेड़ते हुए कह रही है कि हम दोनों का रंग अलग है, लेकिन फोटो तो साथ में खिंचवाएंगे ही। इसी अंदाज में वह अपने जीजा की टांग खींचती है। ऐसे में जब शादी-ब्याह के मौके पर जब यह गाना बजता है, तो हंसी-मजाक का माहौल बन जाता है।
गाने में दिखती है जीजा-साली की मजेदार नोकझोंक
हमारे यहां भारतीय घरों में जीजा और साली के रिश्ते में अक्सर हंसी-मजाक देखने को मिलता है। इस गीत में भी साली शादी के मौके पर अपने जीजा को छेड़ती है, उनसे मजाक करती है और जूते छिपाने जैसी रस्मों में भी खूब हंसी-मजाक होता है। यह गाना भी इसी रिश्ते को मजेदार अंदाज में दिखाता है। इस गीत में साली अपने जीजा के रंग को लेकर मजाक करती है, लेकिन उसकी बातों में नाराजगी नहीं बल्कि अपनापन नजर आता है। वह जीजा को चिढ़ाते हुए उनके साथ फोटो भी खिंचवाना चाहती है।
1984 की फिल्म 'चंद्रावल' से जुड़ा है यह गाना
आपको बता दें कि यह हरियाणवी गीत सिर्फ शादी का लोकगीत नहीं है। इसे हरियाणवी फिल्म चंद्रावल से भी खास पहचान मिली थी। यह फिल्म साल 1984 में रिलीज हुई थी और इसके गाने खूब पसंद किए गए थे। 'जीजा तू काला, मैं गोरी घणी' भी इसी फिल्म क है। इसे दिलराज कौर और विजया मजूमदार ने गाया था, जबकि इसके लिरिक्स देवी शंकर प्रभाकर ने लिखे और म्यूजिक जे. कौशिक ने तैयार किया था।
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शादी में क्यों बजाया जाता है यह गाना?
हरियाणवी शादियों में पुराने गानों की अपनी खास जगह है। कुछ गाने ऐसे होते हैं, जिन्हें सुनते ही लोगों को शादी का माहौल याद आ जाता है। 'जीजा तू काला, मैं गोरी घणी' भी उन्हीं में से एक है। शादी में इसे बजाने की कुछ खास वजहें हैं। जैसे-
- इसके बोल शादी में होने वाले हंसी-मजाक से परफेक्ट मैच करते हैं।
- गाने के शब्द ऐसे हैं कि लोग जल्दी समझ लेते हैं और साथ में गा भी सकते हैं।
- इसकी म्यूजिक पर महिलाएं और लड़कियां मिलकर डांस कर सकती हैं।
- घर के बड़े लोगों को यह गाना पुराने समय की शादियों की याद दिला देता है।
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इस गाने की असली मजेदार बात क्या है?
इस गाने की सबसे मजेदार बात यह है कि साली अपने जीजा को छेड़ने का कोई मौका नहीं छोड़ती है। यानी इस गाने में चिढ़ाना भी है और अपनापन भी दिखता है।
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