हैलोवीन का नाम हम जैसे ही सुनते हैं, हमारी आंखों के सामने एक बड़ा-सा कद्दू आ जाता है, जिस पर डरावनी आंखें, नाक और मुंह बने होते हैं। कई लोग इसके अंदर लाइट जलाकर घर के बाहर या खिड़की पर रखते हैं, लेकिन क्या आप जानती हैं कि हैलोवीन पर डरावने चेहरे बनाने की यह परंपरा हमेशा से कद्दू पर ही नहीं थी?
हैलोवीन के मौके पर पहले लोग इसके लिए कद्दू की जगह शलजम का इस्तेमाल किया करते थे। आयरलैंड में शुरू हुई इस परंपरा के पीछे जैक नाम के एक शख्स की कहानी भी जुड़ी हुई है। यही कहानी आगे चलकर Jack-o'-Lantern के नाम से फेमस हुई। इसकी दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका पहुंचने के बाद इस परंपरा में कद्दू की एंट्री हुई और आज वही हैलोवीन की पहचान बन गया है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं-
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क्या है Jack-o'-Lantern की कहानी?
आपको बता दें कि Jack-o'-Lantern के पीछे जैक नाम के एक शख्स की पुरानी लोककथा सुनने को मिलती है। बताया जाता है कि मरने के बाद जैक को न तो स्वर्ग में जगह मिली और न ही नरक में। ऐसे में उसे भटकते रहना पड़ता था। उसके पास रास्ता देखने के लिए सिर्फ जलता हुआ कोयला ही था। ऐसे में जैक ने इस जलते हुए कोयले को एक शलजम को खोखला किया और उसी के अंदर रख लिया। इससे उसे अंधेरे में रास्ता देखने में मदद मिलती थी। इसी के बाद से शलजम के अंदर रोशनी रखने और उस पर डरावना चेहरा बनाने की परंपरा जुड़ गई।
कद्दू नहीं पहले शलजम पर बनते थे डरावने चेहरे
बताया जाता है कि आयरलैंड में लोग हैलोवीन के समय शलजम को अंदर से खोखला करते थे। फिर उस पर आंख, नाक और मुंह जैसे डरावने डिजाइन बनाते थे। इसके अंदर जलता हुआ कोयला रखकर रोशनी की जाती थी। ऐसा माना जाता था कि डरावने चेहरे वाली इन रोशन शलजमों से बुरी आत्माएं दूर रहती हैं। धीरे-धीरे यह तरीका हैलोवीन की परंपरा बन गया।
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अमेरिका पहुंचकर कद्दू बना हैलोवीन का हिस्सा
इसके बाद जब आयरलैंड के लोग अमेरिका पहुंचे, तो उनके साथ यह परंपरा भी वहीं पहुंच गई, लेकिन वहां उन्हें शलजम की जगह कद्दू का इस्तेमाल करना ज्यादा आसान लगा। क्योंकि कद्दू वहां आसानी से मिल जाता था और उसका शेप भी बड़ा होता था। इसके बाद लोगों ने कद्दू को अंदर से खोखला करके उस पर डरावने चेहरे बनाने शुरू कर दिए। उसके अंदर रोशनी रखी जाने लगी और देखते ही देखते कद्दू वाला Jack-o'-Lantern हैलोवीन की पहचान बन गया।
आज भी क्यों खास है यह परंपरा?
आज हैलोवीन पर घरों, दुकानों और पार्टियों में डरावने चेहरे वाले कद्दू देखने को मिलते हैं। हालांकि, इस परंपरा की शुरुआत कद्दू से नहीं हुई थी। इसके पीछे आयरलैंड की शलजम और जैक की लोककथा जुड़ी है।
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