शायद मेरी ही गलती रही होगी, तभी ऐसा हुआ, सॉरी मैं आपके लिए दूसरी चाय बना देती हूं, कोई बात नहीं, मैं पैदल ही चला जाती हूं, हर बार मेरे ही साथ ऐसी गड़बड़ क्यों हो जाती है? आपसी बातचीत के दौरान कुछ महिलाएं अक्सर ऐसे वाक्यों का इस्तेमाल करती हैं। दरअसल ऐसी महिलाएं केवल दूसरों के बारे में ही नहीं, बल्कि अपने बारे में नेगेटिव सोच रखती हैं। इसी वजह से हर बुरी स्थिति के लिए स्वयं को दोषी मानने लगती हैं। अगर आपको भी ऐसा ही महसूस होता है, तो इस आर्टिकल को जरूर पढ़ें।
हर बात के लिए खुद को दोषी क्यों मानती हैं कुछ महिलाएं?
सर गंगाराम हॉस्पिटल की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. आरती आनंद के अनुसार, जो महिलाएं शुरू से ही इंट्रोवर्ट और शर्मीले स्वभाव की होती हैं, वे बहुत कम बोलती हैं और दूसरों के सामने खुलकर अपनी भावनाओं का इजहार नहीं कर पाती। इसीलिए वे जब भी किसी से नाराज होती हैं, तो उसके सामने अपने विचार नहीं रख पाती, लेकिन ऐसी नकारात्मक बातें लगातार उन्हें परेशान कर रही होती हैं। फिर एक वक्त ऐसा भी आता है, जब ये अपनी उदासी के लिए खुद को दोषी मानने लगती हैं।
कुछ महिलाएं अपनी इमेज के प्रति ज्यादा सचेत होती हैं। इसी वजह से दूसरों के सामने नाराजगी जाहिर नहीं करती। ऐसे में ये सारा गुस्सा खुद पर ही उतारती हैं। इसी तरह जिन बच्चों की परवरिश सख्त अनुशासन भरे माहौल में होती है, वे स्वभाव से दब्बू बन जाते हैं और बड़े होने के बाद भी दूसरों के सामने अपनी असहमति जाहिर नहीं कर पाते। ऐसी महिलाएं कोई गलती न होने पर भी स्वयं को दोषी मान लेती हैं और चुप रहकर खुद को ही सजा दे रही होती हैं। जिनमें इमोशनल इंटेलिजेंस की कमी होती है और जो अपनी मनोदशा और भावनाओं के उतार-चढ़ाव को पहचान नहीं पाती, ऐसी भी हमेशा भ्रमित रहती हैं। अक्सर छोटी-छोटी बातों पर उनका मूड ऑफ होता है, लेकिन वे इसकी वजह तलाश नहीं पाती। अंत में खुद को ही सजा देने लगती हैं।
वैसे तो यह समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन जिन लड़कियों को बचपन से ही सहनशील होना सिखाया जाता है, हर बात के लिए स्वयं को दोषी समझना उनकी आदत बन जाती है। शादी के बाद वे परिवार के हर सदस्य की जरूरतें पूरी करती हैं, लेकिन उनके पास अपने लिए सोचने का वक्त नहीं होता। इससे उनका मन हमेशा खिन्न रहता है। परिवार का माहौल शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए वे किसी से कोई शिकायत नहीं करतीं, लेकिन गुस्से में आकर अपनी रुचि से जुड़ी उन सारी गतिविधियों का त्याग करने लगती हैं, जिनसे उन्हें सच्ची खुशी मिलती है और स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है।
नुकसानदेह है खुद को दोषी मानने की आदत
स्वयं से नाराज रहने वाली महिलाएं हर पल अपना ही नुकसान कर रही होती है। ऐसे में वे आत्मविश्वास खो देती हैं और कोई भी कार्य शुरू करने से पहले इनके मन में यह दुविधा रहती है कि कहीं मुझसे कोई गलती न हो जाए। समय के साथ दृष्टिकोण नकारात्मक होने लगता है। हमेशा तनावग्रस्त रहने की वजह से प्रोफेशनल लाइफ में इनकी कार्यकुशलता भी घटने लगती है, जो इनके करियर के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होती है। भोजन में अरुचि और नींद की कमी के कारण इन्हें एनीमिया, हाई या लो ब्लडप्रेशर और माइग्रेन जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं। लंबे समय तक ऐसी मनोदशा में जीने से डिप्रेशन भी हो सकता है।
परफेक्शन की आदत
कुछ महिलाएं सनकी होने की हद तक परफेक्शनिस्ट होती हैं। उन्हें खुद या दूसरों से होने वाली मामूली-सी गलती भी इन्हें बर्दाश्त नहीं होती। सर्वश्रेष्ठ ढंग से कार्य करने की धुन में कई बार थोड़ी देर या मामूली सी कोई चूक हो जाती है, तो ये बुरी तरह बौखला जाती हैं। ऐसी महिलाओं में अपनी गलतियां स्वीकारने का साहस नहीं होता। इसलिए, खुद को दोषी मानकर बहुत जल्दी निराश हो जाती हैं और इनके लिए ऐसी मनोदशा से बाहर निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसी महिलाओं को यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि गलतियां सभी से होती हैं और कोई भी पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता। चाहे कोई कितना ही अनुभवी और समझदार क्यों न हो, कभी न कभी उससे गलती हो ही जाती है।
इसलिए चाहे घर हो या ऑफिस, प्रतिदिन हर कार्य में खुद से शत-प्रतिशत परफेक्शन की उम्मीद न रखें। हो सकता है किसी दिन आपके घर में बहुत अच्छी सब्जी बनी हो, लेकिन जब कभी आपने मेहमानों को बुलाया हो, तो उस रोज खाने में नमक ज्यादा हो जाए। इसके बाद आप ऐसा न सोचें कि मुझे खाना बनाना ही नहीं आता, इसीलिए अक्सर मुझसे ऐसी गलती हो जाती है। ऐसा किसी के भी साथ हो सकता है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके, इस तरह की ग्लानि से बाहर निकलने की कोशिश करें।
सीखें माफ करना
आत्मकेंद्रित महिलाओं की सोच संकुचित होती है। अगर कभी दूसरों की कोई बात इन्हें नापसंद होती है तो वे उनके सामने अपनी नाराजगी जाहिर नहीं करती, लेकिन उनकी बातों को दिल पर ले लेती हैं। बाद में कटु अनुभवों को याद करके दुखी होती हैं। ऐसे में वे केवल दूसरों को ही नहीं, बल्कि खुद को भी आसानी से माफ नहीं कर पाती। इसी वजह से हमेशा उदास और परेशान रहती हैं। अगर इंसान दूसरों के साथ खुद को भी माफ करना सीख जाए तो उसकी कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा। हर बात के लिए खुद को दोषी मानने की प्रवृत्ति घातक साबित होती है। तनावमुक्त रहने के लिए अगर कभी किसी व्यक्ति से कोई विवाद या मतभेद होता है, तो बातचीत से उसे वहीं खत्म कर देना चाहिए।
नजरिया बदलने की है जरूरत
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सभी का स्वभाव एक जैसा नहीं होता। ऐसा हो सकता है आप अपने तरीके से सब कुछ सही कर रही हों, लेकिन दूसरों को वही बातें गलत लगती हों। हमारे परिवार और समाज में कई तरह के लोग होते हैं। कोई भी कार्य शुरू करने से पहले उसके अच्छे या बुरे परिणाम पर तार्किक ढंग से विचार करें, फिर जो सही लगे वही करें। यहां आपको एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि एक साथ सभी को खुश करना असंभव है, इसलिए कोई भी कार्य शुरू करने से पहले केवल अपनी अंतरात्मा से यह सवाल पूछें कि क्या यह कार्य नैतिक दृष्टि से सही है? अगर आपको वह ठीक लगे, तो दूसरे क्या सोचेंगे, कहीं कोई मुझसे नाराज तो नहीं हो जाएगा? जैसी बातों की परवाह किए बिना निडर होकर वही करें, जो आपको सही लगे।
समय के साथ व्यक्ति को अपना नजरिया बदलने की कोशिश करनी चाहिए। कुछ ऐसा सोचते हैं कि अपनी छोटी-छोटी गलतियों के लिए माफी मांगने से लोग आपकी विनम्रता का लिहाज करते हुए आपके साथ शालीन व्यवहार करेंगे, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता। कुछ लोग आपके इस सद्गुण को कमजोरी समझकर आपका भावनात्मक शोषण शुरू कर देते हैं। इसलिए, अपने लिए जीना सीखें।
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यह बात हमेशा याद रखें कि यह जीवन मूल्यवान है। इसे व्यर्थ की चिंता में बर्बाद न करें। अगर किसी दिन सुबह-सुबह थोड़ी देर से आंख खुली या ऑफिस मीटिंग में प्रेजेंटेशन बॉस के मन मुताबिक तैयार नहीं हुआ, तो इसके लिए खुद को गुनाहगार न समझें। ऐसी छोटी-छोटी गलतियां भी हमारे कामकाज का जरूरी हिस्सा होती हैं और उन्हीं से सीखते हुए हम जीवन में आगे बढ़ते हैं।
अंत में, यह बात हमेशा याद रखें कि जीवन का हर पल बेहद कीमती है। इसलिए दुखद यादों को भुलाकर हमें हमेशा अपने उज्ज्वल भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। हमें दूसरों को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी खुशियों के लिए जीना चाहिए।
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कुछ जरूरी बातें
अगर आपके साथ भी ऐसी समस्या होती है, तो तुरंत सचेत हो जाएं। अगर किसी व्यक्ति की कोई बात आपको बुरी लगती है उसे जरूर बताएं, लेकिन खुद पर नाराज होने की आदत छोड़ दें।
- गलतियां सभी से होती हैं, लेकिन छोटी-छोटी बातों के लिए स्वयं को दोषी न मानें।
- अपने अंदर क्रोध जमा करने से बेहतर यही होगा कि उसे किक बॉक्सिंग, जूडो, फुटबॉल जैसी एक्टिविटी के माध्यम से बाहर निकालें। जो ऐसा नहीं कर सकते, उनके लिए घर की सफाई और बागवानी जैसी एक्टिविटीज मददगार साबित होंगी।
- खुद से प्यार करना सीखें। यह बात हमेशा याद रखें कि अपनी भलाई के बारे में सोचने वाले लोग स्वार्थी नहीं, बल्कि समझदार होते हैं। इसलिए हमेशा अच्छा सोचें और खुश रहें।
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लेखक- विनीता
Image Credit: magnific.com
