हमारे यहां भारतीय घरों में शादी के समय दूल्हा ही बारात लेकर आता है। ऐसे में घर की महिलाएं उसे गारी सुनाएं, यह जानकर आपको थोड़ा अजीब लग सकता है। खासकर आज की जनरेशन तो शायद ही इसके बारे में जानती हो। क्योंकि आमतौर पर शादी में जब बारात आती है तो दूल्हे और उसके घरवालों का स्वागत किया जाता है, लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में शादी के समय गारी गाने की भी एक परंपरा रही है, जाे सालों से चली आ रही है।
खास बात यह है कि इन गानों में दूल्हे से लेकर उसके पिता, चाचा और बाकी रिश्तेदारों पर मजाकिया तंज कसा जाता है। ये गाने ऐसे होते हैं कि सामने वाले को सुनकर ही शर्म आ जाए। हालांकि, इन गानों का मतलब सच में किसी को बुरा-भला कहना नहीं होता है। समय के साथ ये परंपराएं बदल गईं हैं, लेकिन आज भी कई जगहों पर शादियों में गारी गाई जाती है। आज हम आपको अपने इस लेख में इस परंपरा के बारे में बता रहे हैं। आइए जानते हैं-
Image Credit- AI
यूपी के पूर्वांचल में होती है गारी की रस्म
गारी गीतों की बात होते ही अक्सर लोगों को लगता है कि यह परंपरा बिहार में ही निभाई जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में भी शादी के मौकों पर गारी गीत गाने का रिवाज है। जब बारात दुल्हन के घर आती है, तब घर की महिलाएं दूल्हे और बारात के स्वागत के दौरान ऐसे गीत गाती हैं। इन गीतों में दूल्हे के रंग-रूप और कद-काठी को लेकर भी मजाक किया जाता है। इसकी खास बात यह है कि इस गारी काे दूल्हा पक्ष भी बड़ी खुशी से सुनता है।
गारी गीत आखिर होते क्या हैं?
नाम से ही साफ है कि गारी गीतों में गारी यानी गाली वाली बातें होती हैं, लेकिन पुराने समय में इसका मतलब किसी को नीचा दिखाना या सच में उसका अपमान करना नहीं होता था। इन गीतों में दुल्हन पक्ष की महिलाएं दूल्हे और उसके परिवार वालों पर हंसी-मजाक में तंज करती थीं। दूल्हे के पिता यानी समधी, चाचा, फूफा और बाकी रिश्तेदार भी निशाना बनते थे। इसका मकसद शादी के माहौल को हंसी-खुशी से भरना होता था।
गारी गीतों में किन लोगों पर होता है मजाक?
अगर आप कभी भी गारी गीत सुनेंगी तो आपको समझ आएगा कि इनमें किन लोगों को निशाना बनाया जाता है। जैसे-
- दूल्हा
- दूल्हे के पिता यानी समधी
- चाचा
- फूफा
- दूल्हे की मां
- दूल्हे की बहन
- वर पक्ष के रिश्तेदार
खाने के समय निभाई जाती है गारी की परंपरा
आपको बता दें कि ये गारी गीत सिर्फ बारात के स्वागत के लिए ही नहीं होते हैं। जब दूल्हा पक्ष के लोग खाना खाने बैठते हैं, तब भी गारी गाई जाती है। इस दौरान दुल्हन पक्ष की महिलाएं अक्सर थोड़ी दूर बैठकर या पर्दे के पीछे से गारी गाती हैं। महिलाएं गीतों के जरिए एक-एक करके वर पक्ष के रिश्तेदारों पर तंज कसती हैं। गारी गीतों की एक और खास बात यह है कि इन्हें आमतौर पर कोई एक महिला अकेले नहीं गाती। महिलाएं मिलकर समूह में इन्हें गाती हैं।
बहुत पुरानी मानी जाती है गारी गाने की परंपरा
इसके इतिहास की बात करें तो यह काफी पुराना है। इसका कनेक्शन सीता-राम विवाह के समय से है। माना जाता है कि त्रेतायुग में जब भगवान राम माता सीता से विवाह करने मिथिला पहुंचे थे, तब वहां की महिलाओं ने दशरथ और वर पक्ष के लोगों का स्वागत तंज वाले गीतों से किया था। यानी शादी में वर पक्ष के साथ मजाक करने और गाने के जरिए नोंक-झोंक करने की परंपरा बहुत पुरानी है। हालांकि, यह बस एक मान्यता है। इसकी पुष्टि हरजिंदगी नहीं करती है।
यह भी पढ़ें- Punjabi Wedding Ritual: दुल्हन के कलाई हिलाते ही तय होता है शादी का अगला नंबर, बेहद खास है पंजाबियों का यह रिवाज
आखिर शादी में गारी क्यों गाई जाती?
ऐसा कहा जाता है कि पुराने समय में शादी के दौरान कई तरह की रस्में निभाई जाती थीं और घर रिश्तेदाराें से भरा होता था। ऐसे में गारी गीत हंसी-मजाक का ही हिस्सा हुआ करते थे। दुल्हन के घर की महिलाएं दूल्हा और उसके सगे संबंधियों से मजाक करती थीं। इसमें ताने जरूर होते थे, लेकिन कोई भी इसका बुरा नहीं मानता था।
अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Image Credit- Ai
-1789725987826_m.webp)