पंजाबी गाने सुनते ही अगर आपके पैर अपने आप थिरकने लगते हैं, तो 'भाभो कहंदी ए पियारा सिंघा...' जैसे लोकगीत आपने जरूर सुने होंगे। खासकर शादी, मेहंदी या लेडीज संगीत में ऐसे गाने माहौल को एकदम बदल देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन चुलबुले से लगने वाले शब्दों का मतलब क्या है?
'भाभो' कौन है और 'वेलना' का यहां रोटी बेलने वाले बेलन से क्या कोई लेना-देना है? दरअसल, इस गाने के मजाकिया बोलों के पीछे पंजाब की पुरानी लोक संस्कृति, महिलाओं की नोंक-झोंक और हंसी-मजाक की एक पूरी कहानी छिपी हुई है। अगर आप भी हमेशा से यह गाना सुनती आई हैं, तो अब जब इसका मतलब भी जान लेंगी तो मजा और दोगुना हाे जाएगा। आज हम आपको अपने इस लेख में इसकी पूरी जानकारी दे रहे हैं। आइए जानते हैं-
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‘भाभो कहंदी’ में भाभो कौन है?
गाने में यह बोल तो एकदम पैर थिरकाने पर मजबूर कर देता है, लेकिन अगर आपको समझ नहीं आ रहा है कि इसमें भाभो कौन है और इसका मतलब क्या है तो बता दें कि इस शब्द का इस्तेमाल घर की भाभी या बड़ी महिला के लिए हुआ है। यानी यह रिश्ते को बताने वाला ही शब्द है। पुराने समय में महिलाएं घर-आंगन में काम करते हुए या शादी-ब्याह के मौके पर एक साथ बैठकर यह गिद्दा गाया करती थीं।
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‘वेलना’ का मतलब सिर्फ बेलन नहीं
अब आते हैं गाने के सबसे मजेदार शब्द 'वेलना' पर। इसे सुनते ही सबसे पहले लगता है कि रोटी बेलने वाले बेलन की बात हो रही है, लेकिन इस गाने में इसका मतलब रोटी बेलने वाला बेलन बिलकुल नहीं है। यहां 'वेलना' का इस्तेमाल कमाई और गहने बनवाने से जुड़े एक मजाकिया ताने के रूप में किया गया है। गाने में पियारा सिंघा से वेलना लाने को कहा जाता है, ताकि उससे होने वाली कमाई से सुंदर गहने बनवाए जा सकें।
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आसान शब्दों में कहें तो पत्नी अपने पति से गहनों की मांग कर रही है, लेकिन सीधे कहने के बजाय वह बहुत ही हंसमुख और मजेदार अंदाज में अपनी बात रख रही है।
गाने में है महिलाओं की मजेदार नोंक-झोंक
इस गाने में महिलाओं के बीच की हंसी-मजाक और मीठी छेड़छाड़ साफ दिखती है। एक तरफ जहां गहने बनवाने की ख्वाहिश है, वहीं दूसरी तरफ यह भी पूछा जाता है कि इन गहनों को देखकर किसे जलन होगी। इसका जवाब भी बहुत ही चटपटे अंदाज में सौतन पर जाकर टिक जाता है। यही वजह है कि यह गाना सिर्फ गहनों की मांग तक सीमित नहीं है बल्कि अपनों के बीच की एक हल्की-फुल्की और मजेदार बातचीत भी है।
सवाल-जवाब वाला अंदाज बनाता है माहौल
पंजाबी गिद्दे में इस तरह की बोलियां सिर्फ सुनने के लिए नहीं गाई जाती हैं। इनमें सवाल-जवाब और मजाक का अपना ही रंग होता है। जब महिलाएं एक साथ मिलकर इन्हें गाती हैं, तो पूरा माहौल मस्ती से भर जाता है।
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शादी और खुशी के मौकों की शान है यह गिद्दा
भाभो कहंदी जैसे गिद्दा पंजाब के घर-आंगनों से निकलकर आज शादी, संगीत और मेहंदी जैसी रस्मों की जान बन चुके हैं। गिद्दा हो या महिलाओं की कोई महफिल, ऐसे बोल बजते ही पूरे माहौल में खुशियों का रंग चढ़ जाता है। इस गीत की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसमें कोई भारी-भरकम बात नहीं है। इसके लिरिक्स ही लोगों को झूमने पर मजबूर कर देते हैं।
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