घर में अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, तो समय पर एंबुलेंस सेवा मिलना किसी वरदान से कम नहीं होता। भारत में मेडिकल इमरजेंसी के लिए 102 और 108 जैसी एंबुलेंस सेवाएं उपलब्ध हैं। दोनों का मकसद मरीज को समय पर चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि 102 और 108 में क्या अंतर है और किस स्थिति में कौन सा नंबर डायल करना चाहिए?

क्या है 102 और 108 एंबुलेंस सेवा?

102 एंबुलेंस सेवा को जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK) के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत सरकार की एक पहल है। इसमें प्रेग्‍नेंट महिलाओं, नवजात शिशुओं और 5 साल तक के बच्चों को मुफ्त एंबुलेंस सेवा मिलती है। यह सेवा 24x7 उपलब्ध है और इसमें बेसिक लाइफ सपोर्ट वाली मशीन होती हैं।

वहीं, 108 एंबुलेंस सेवा इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (EMRI) और राज्य सरकार के सहयोग से चलाई जाने वाली एक व्यापक इमरजेंसी सेवा है। यह भी 24 घंटे उपलब्ध है, लेकिन इसमें एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट सिस्टम लगे होते हैं। यह सेवा सभी उम्र के लोगों के लिए है।

102 और 108 एंबुलेंस में 5 बड़े अंतर

 अगर आपको भी लगता है कि दोनों एक ही हैं, तो यहां जान लीजिए दोनों में क्या है बड़ा फर्क?

फीचर 102 एंबुलेंस 108 एंबुलेंस
किसके लिए  प्रेग्‍नेंट महिलाएं और बच्चे

सभी तरह की मेडिकल इमरजेंसी

एंबुलेंस बेसिक लाइफ सपोर्ट

एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट

सुविधाएं ऑक्सीजन, फर्स्ट-एडडिफिब्रिलेटर वेंटिलेटर, कार्डियक मॉनिटर पहुंचने का लक्ष्य 20-25 मिनट

10-15 मिनट

इलाका मुख्य रूप से ग्रामीण ग्रामीण और शहरी शुल्क मुफ्त

राज्य के अनुसार अलग-अलग

 

  • 102 एंबुलेंस सेवा पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाती है, जबकि 108 एंबुलेंस सेवा को राज्य सरकार फंड करती है और इसका प्रबंधन EMRI द्वारा किया जाता है।
  • 102 सेवा में बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस का इस्तेमाल होता है, जिसमें ऑक्सीजन सिलेंडर, फर्स्ट-एड किट जैसी जरूरी चीजें होती हैं। 108 में एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस होती हैं, जिनमें डिफिब्रिलेटर, वेंटिलेटर और कार्डियक मॉनिटर जैसे उपकरण लगे होते हैं।
  • दोनों ही सेवाएं जल्दी पहुंचने की कोशिश करती हैं। 102 एंबुलेंस का औसत टाइम 20-25 मिनट होता है, जबकि 108 एंबुलेंस 10-15 मिनट के अंदर मौके पर पहुंचने का लक्ष्य रखती है।

  • 102 सेवा मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए है। जबकि 108 सेवा हर तरह की इमरजेंसी जैसे एक्सीडेंट, हार्ट अटैक, स्ट्रोक आदि के लिए है।
  • 102 सेवा पूरी तरह से मुफ्त है और मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध है। वहीं 108 सेवा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मिलती है और कुछ राज्यों में इसके लिए मामूली शुल्क लिया जाता है।

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अगर 20 मिनट में एंबुलेंस न आए तो क्या करें?

एंबुलेंस को आने में थोड़ी देर हो सकती है, क्योंकि जाम काफी होता है। फिर भी अगर ज्यादा समय लगे, तो नीचे दी गई बातों का ध्यान रखें।

  • एंबुलेंस का दूसरा नंबर डायल किया जा सकता है।
  • प्राइवेट अस्पताल से डायरेक्ट एंबुलेंस बुला लें।
  • ज्यादा तबीयत खराब है, तो ऑटो, टैक्सी (Ola/Uber) या अपनी गाड़ी से मरीज को ले जाएं।
  • कंट्रोल रूम को फोन करके फिर से घर का पता बताएं।
  • मरीज का ध्यान दें। फोन पर डॉक्टर से सलाह लें।


घर में इमरजेंसी के वक्त घबराने के बजाय सही नंबर डायल करना सबसे जरूरी है। अगर घर में गर्भवती महिला या छोटा बच्चा है तो 102 आपके लिए मुफ्त और सबसे अच्छी सुविधा है, जबकि एक्सीडेंट, हार्ट अटैक या किसी भी गंभीर स्थिति के लिए 108 डायल करना ज्यादा समझदारी है।

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