शिकागो की मिशिगन लेक के किनारे घूमते हुए अचानक सैम ने मेरा हाथ थाम लिया और भावुक होकर बोला, 'रिद्म, क्या सच में तुम दो महीने बाद वापस इंडिया चली जाओगी?' सैम के छूने से मेरे पूरे शरीर में मीठी सी हलचल होने लगी। कांपती आवाज में मैं बोली, 'जाना ही पड़ेगा।' वह रुक गया, 'क्या ऐसा नहीं हो सकता, तुम हमेशा के लिए यहीं रुक जाओ, मेरे पास।' जिस बात को सुनने के लिए मैं बेचैन थी, शायद सैम आज वही कहने जा रहा था। 'लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है? दो महीने बाद रिसर्च खत्म हो जाएगी, फिर मुझे इंडिया लौटना ही होगा।' सैम ने मेरा चेहरा अपने हाथों में थाम लिया और बोला, 'रिद्म, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। मुझसे शादी कर लोगी, तो सब हो जाएगा।'

मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई। न जाने कब से मैं ये शब्द सुनने के लिए बेचैन थी। 'सैम, कोई भी फैसला लेने से पहले क्या हमें अपने पेरेंट्स से नहीं पूछना चाहिए?' 'रिद्म, यहां बच्चे अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेने के लिए आजाद होते हैं। पेरेंट्स उनकी जिंदगी में दखल नहीं देते। हां, तुम अपने पेरेंट्स से जरूर पूछ लो, क्योंकि जहां तक मैं जानता हूं, तुम्हारे यहां ऐसा नहीं होता।' 'वे भी मना नहीं करेंगे। उन्हें अपनी बेटी पर पूरा भरोसा है।' कुछ देर बाद मैं अपने अपार्टमेंट लौटी तो मन में खुशियों की अनगिनत कलियां खिल रही थीं। मुझे देखते ही मेरी फ्रेंड एना बोली, 'क्या बात है हनी, बहुत खुश दिखाई दे रही हो,' 'बात ही कुछ ऐसी है। जानती हो, सैम मुझसे शादी करना चाहता है।' 'अरे, इतनी जल्दी तुमने शादी का फैसला भी कर लिया।

अभी वक्त ही कितना हुआ है तुम्हें सैम से मिले हुए, तुम उसे जानती ही कितना हो?' तभी रिद्म ने कहा -'एना, किसी को जानने-समझने के लिए ज्यादा वक्त की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी हम कुछ ही पलों में इंसान को समझ लेते हैं और कभी वर्षों साथ रहते हुए भी नहीं जान पाते। वैसे भी मेरी सिक्स्थ सेंस बहुत स्ट्रॉन्ग है। इंसान की सूरत देखकर समझ जाती हूं कि वह कैसा है।' मेरा आत्मविश्वास देखकर एना खामोश हो गई। रात में मैं बिस्तर पर लेटी तो इतनी खुश थी कि नींद आंखों से कोसों दूर थी।

पोस्ट ग्रेजुएशन में पूरे मेडिकल कॉलेज में टॉप करने के बाद कॉलेज की तरफ से मुझे ट्यूबरकुलोसिस कंट्रोल प्रोग्राम पर रिसर्च के लिए चुना गया और छह महीने के लिए मैं अमेरिका के खूबसूरत शहर शिकागो आ गई। मिशिगन लेक के पास एक होटल में मेरे ठहरने का इंतजाम किया गया था। रोज सुबह तैयार होकर मैं रिसर्च सेंटर जाती थी। वहीं मेरी दोस्ती एना से हुई और मैं उसी के अपार्टमेंट में रहने लगी। जैसे-जैसे मैं इस देश और यहां के लोगों को करीब से जानने लगी, मेरे मन में यहीं बस जाने की इच्छा बढ़ने लगी। इस खूबसूरत देश में रहना अपने आप में कितना अच्छा एहसास है।

यहां रोज की जिंदगी तनाव से दूर और आसान है। लोग ईमानदार और खुशमिजाज हैं और कोई किसी की जिंदगी में दखल नहीं देता। शायद किस्मत को भी यही मंजूर था। इसीलिए शिकागो के विलिस टॉवर पर सैम से मुलाकात हो गई। एना के हाथ से पर्स छीनकर भाग रहे एक अपराधी को उसने पकड़ लिया था। उस दिन कहां जानती थी कि उससे हुई यह छोटी सी मुलाकात मेरे भविष्य के दरवाजे पर हुई एक हल्की सी दस्तक है। 8-10 दिनों बाद रिसर्च सेंटर के बाहर फिर वह मिला। उसने मुझे कॉफी पीने के लिए पूछा, जिसे मैंने आसानी से स्वीकार कर लिया। वह करीब 30 साल का एक हैंडसम अमेरिकी युवक था, जो एक नामी कंपनी में इंजीनियर था। धीरे-धीरे सैम और मुझमें दोस्ती हो गई। मुझे पता भी नहीं चला कि कब यह दोस्ती प्यार में बदल गई।

रात-दिन अब सैम मेरे ख्यालों में रहने लगा। आज तक मैं अपना करियर बनाने में व्यस्त रही थी, सैम से मिलने के बाद जाना कि प्यार की खुमारी क्या होती है और आज जब उसने मुझे प्रपोज कर दिया है, तो मेरे पांव जमीन पर नहीं पड़ रहे हैं। सारी रात मैं सपनों की दुनिया में घूमती रही। सुबह उठते ही मैंने पापा को फोन मिलाकर सारी बात बताई। वह हैरान हो उठे। 'रिद्म, तुम एक डॉक्टर हो। मुझे तुमसे ऐसी बचकानी हरकत की उम्मीद नहीं थी। मैं तुम्हें बताने ही वाला था। मेरे मित्र डॉ. विनय शर्मा को जानती हो न। उन्होंने अपने बेटे डॉ. राहुल के लिए तुम्हारा हाथ मांगा है, तुम जानती हो राहुल और उसकी फैमिली कितनी अच्छी है, तुम वहां बहुत खुश रहोगी बेटा।'

रिद्म ने निराश होते हुए कहा- 'पापा, एक बार आप अमेरिका आएंगे और सैम से मिलेंगे तो आप भी मेरे फैसले से सहमत हो जाएंगे।' पापा ने मुझे समझाने की कोशिश की। डॉ. राहुल की अच्छाई के बारे में बताया, लेकिन मेरी बेचैनी और अपने फैसले पर भरोसे के आगे वह खामोश हो गए। अब मैं सैम से मिलने के लिए बेचैन थी। लेकिन व्यस्तता की वजह से वह मुझसे नहीं मिल पा रहा था।

लेखक- रेनू मंडल

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