शादी का इंतज़ाम कितना बढ़िया था, सजावट से लेकर खाना, बारातियों की खातिरदारी, सब कुछ शानदार था। कितना मना किया कि इतना सब कुछ करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन दुल्हन के मम्मी-पापा माने ही नहीं। यह शादी तो सालों तक याद रहेगी। अपनी भाभी नैना से यह बात कहते हुए कमला देवी की आंखों में खुशी साफ नजर आ रही थी। साथ-साथ वह शादी में मिले चांदी के बर्तनों, सिक्कों और सोने की गिन्नियों को भी संभालकर रख रही थीं। 'सच कह रही हैं आप दीदी, ऐसी खातिरदारी और फिर किसी के भी नेग को न भूलना, बड़ी बात है। समधियों ने कोई कमी नहीं छोड़ी।' विमला देवी ने भी अपनी बहन की बात से सहमति जताई। 'मैं तो कहती हूं कि अपने विहान की तो किस्मत ही खुल गई, तभी तो ऐसा ससुराल मिला।' नैना बोली। 'ससुराल ही क्या, बहू भी क्या कम सुंदर और पढ़ी-लिखी है। इतने बड़े पद पर काम करती है, लेकिन जरा भी घमंड नहीं है।' विहान की चाची बोलीं तो ऐसा लगा, जैसे उनके मन में छिपा अपना दुख भी बाहर आने वाला है।

'जोड़ी भी दोनों की कितनी सुंदर लगती है, जैसे एक-दूसरे के लिए ही बने हों।' रिश्तेदारों की भीड़ में दोनों की तारीफें रुकने का नाम ही नहीं ले रही थीं। इसलिए कमला देवी को कहना ही पड़ा, 'मेरे बेटे-बहू को नजर मत लगाओ।' उनकी यह बात सुनते ही चारों तरफ हंसी गूंजने लगी। कमला देवी की बात का कोई बुरा मान जाए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता था। 'तुम नजर लगने दो तो लगेगी न। सबको तो अपने व्यवहार से अपना बना लेती हो। सच तो यह है कि अवनी बहुत खुशकिस्मत है कि उसे तुम्हारे जैसी सास मिली।' नैना ने अपनी ननद कमला देवी की तरफ प्यार से देखते हुए कहा। 

'बस-बस, बहुत हुआ। अब आप लोग भी आराम करें और अवनी को भी कमरे में जाने दें।' उन्होंने अवनी को वहां से उठाते हुए कहा। विहान चुपचाप एक कोने में खड़ा होकर सारी बातें सुन रहा था। वह बहुत खुश था कि उसे अवनी जैसी साथी मिली है। इतने अमीर पिता की बेटी होने के बावजूद उसमें जरा भी घमंड नहीं था। हालांकि जब अवनी ने उससे अपने प्यार का इजहार किया था और शादी करने की इच्छा जताई थी, तो एक पल के लिए वह डर गया था। उसे लगा था कि कहीं अवनी उसकी मिडिल क्लास सोच और रहन-सहन के साथ तालमेल न बैठा पाई तो उनके घर की शांति और खुशियां दोनों खराब हो जाएंगी। वह नहीं चाहता था कि जिस परिवार को उसकी मां ने इतने सालों की मेहनत से संभालकर रखा है, वह उसके घर बसाने की वजह से बिखर जाए। हालांकि वह यह भी जानता था कि उसकी मां अपनी समझदारी से अवनी को भी इस घर के माहौल में ढाल लेंगी। 'ऐसे ही थोड़े जाने देंगे आपको भाभी के पास, पहले मेरा नेग दो भैया।' विहान की छोटी बहन सुकन्या इठलाते हुए बोली। 'पांच का नोट रख ले और मेरा पीछा छोड़।' विहान ने उसे छेड़ते हुए कहा।

अवनी मुस्कुराते हुए बोली, 'सुकन्या, पांच हजार से कम मत लेना।' कमला देवी अपने घर के हर कोने में फैली खुशियों को देखकर नम हुई आंखों को साड़ी के पल्लू से छिपाने की कोशिश कर रही थीं। तभी उनके पति सुदर्शन बोले, 'कभी-कभी खुशी के आंसू भी बहने देने चाहिए।' पति की आंखों में अपने लिए दिख रहा प्यार और सम्मान ही तो वह ताकत था, जिसकी वजह से वह आज तक इस घर-गृहस्थी में किसी भी तरह की परेशानी आने नहीं देती थीं। अवनी खुश थी कि उसे विहान मिला और विहान तो जैसे उसे पाकर सातवें आसमान पर था। हनीमून खत्म हुआ और दोनों अपने-अपने काम में वापस लग गए। व्यस्त जिंदगी में जैसा होता है, उनके साथ भी वैसा ही था। दोनों को ही घर पहुंचते-पहुंचते देर हो जाती थी। घर आने और खाना खाने में ही दस-ग्यारह बज जाते थे। साथ बैठकर बात करने का समय ही नहीं मिल पाता था।

अवनी इतनी थकी हुई होती थी कि चाहकर भी वह किसी से बात नहीं कर पाती थी। सुकन्या कई बार कहती, 'भाभी, आपसे तो बात करने के लिए तरस जाते हैं।' तब वह कहती, 'यह संडे तुम्हारे नाम।' लेकिन न जाने कितने संडे आए और चले गए। सास को काम करते देख उसे अच्छा नहीं लगता था कि मम्मी दो-तीन नौकर क्यों नहीं रख लेतीं। इससे पहले उसे कभी घर का काम करने की जरूरत ही महसूस नहीं हुई थी। हर काम के लिए नौकर थे। इसलिए जब उसे खुद उठकर पानी लेना पड़ता था तो उसे चिढ़ होती थी।

उसके चेहरे पर परेशानी देखकर कमला देवी आगे बढ़कर उसकी मदद कर देती थीं। उनकी हमेशा यही कोशिश रहती थी कि अवनी को कोई काम न करना पड़े। वह ऑफिस से थककर आई है, यही बात वह सुकन्या से भी कहती थीं, ताकि वह भाभी से कोई काम करने के लिए न कहे। संडे को भी कमला देवी चाहती थीं कि विहान और अवनी कहीं घूमने चले जाएं, ताकि दोनों को अकेले में साथ समय बिताने का मौका मिले। वह समझती थीं कि एक ही घर में सबके साथ रहने पर चाहकर भी पति-पत्नी को अकेले समय नहीं मिल पाता। वह चाहती थीं कि अवनी आराम करे। इसी कोशिश में वह रहती थीं। इसलिए संडे को वह कई बार बाहर से खाना मंगवाने की कोशिश करती थीं। वह चाहती थीं कि सब लोग साथ बैठकर खाना खाएं।

विहान और अवनी की नई जिंदगी अब धीरे-धीरे एक ऐसे मोड़ पर पहुंचने वाली थी, जहां रिश्तों की असली परीक्षा शुरू होगी। अगले भाग में जानिए आगे क्या हुआ...

यह कहानी पूरी तरह से कल्पना पर आधारित है और इसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। यह केवल कहानी के उद्देश्य से लिखी गई है। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। ऐसी ही कहानी को पढ़ने के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ।

लेखक- सुमन बाजपेयी

Image credit- gemini, pradeep sen gupta

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