रिश्तों में कई बार इंसान अपनी बात रखने से ज्यादा खुद को सही साबित करने में लगा देता है। किसी ने गलत समझ लिया, किसी को आपका व्यवहार पसंद नहीं आया या किसी ने आपके फैसले पर सवाल उठा दिया, तो ऐसे में हम तुरंत सफाई देने लगते हैं। धीरे-धीरे यह आदत मानसिक थकान और रिश्तों में तनाव की वजह बन सकती है।
हालांकि, हर बार चुप रहना भी सही नहीं है, क्योंकि इससे गलतफहमियां बढ़ सकती हैं और मन में नाराजगी जमा हो सकती है। ऐसे में असली समझदारी इस बात में है कि हमें कब अपनी बात को क्लियर रखना है, कब सामने वाले को सुनना है और कब बेवजह की बहस से खुद को अलग कर लेना है। आज के इस लेख में हम आपके इसके बारे में बताने जा रहे हैं।
गलतफहमी वाली सिचुएशन पर अपनी बात जरूर रखें
अगर आपके किसी करीबी ने आपकी बात का गलत मतलब निकाल लिया है, तो चुप रहने के बजाय उसे समझाना जरूरी है। खासकर तब, जब उस गलतफहमी से रिश्ते में दूरी आ सकती हो। उदाहरण के लिए, आपने व्यस्त होने के कारण किसी दोस्त का फोन नहीं उठाया और उसे लगा कि आप उससे नाराज हैं। ऐसी स्थिति में छोटी-सी बातचीत गलतफहमी दूर कर सकती है।
अपनी बात समझाते समय बड़े-बड़े तर्क देने या बार-बार माफी मांगने की जरूरत नहीं है। आप सीधे कह सकती हैं कि आप बिजी थी और आपका उसे नजरअंदाज करने का इरादा नहीं था। हेल्दी रिश्तों में खुलकर बात करना, एक-दूसरे की बात सुनना और गलतफहमियों को दूर करना जरूरी होता है।
इसे भी पढ़ें- क्या तनाव से हो सकते हैं मुंहासे और एक्जिमा, जानें कैसे स्ट्रेस बिगाड़ता है आपकी स्किन की रंगत?
बहस वाली स्थिति में खुद को एक्सप्लेन करने से बचें
हर व्यक्ति आपकी बात समझने के मकसद से सवाल नहीं पूछता। कई बार सामने वाला केवल अपनी बात सही साबित करना चाहता है। इस स्थिति में आप कितनी भी सफाई दे दें, वह आपकी बात में कोई न कोई कमी निकाल सकता है। ऐसी स्थिति में बार-बार खुद को सही साबित करने की कोशिश आपके स्ट्रेस का कारण भी बन सकती है।
अगर बातचीत में बार-बार वही ब्लेम रिपीट किए जा रहे हैं और कोई भी दूसरे की बात सुनने को तैयार नहीं है, तो कुछ समय के लिए रुक जाना बेहतर है। आप कह सकती हैं, "मैं अपनी बात समझा चुकी हूं। अगर हम शांति से बात करना चाहें, तो इस पर दोबारा चर्चा कर सकते हैं।" इसका मतलब समस्या से भागना नहीं, बल्कि बातचीत को बेवजह बिगड़ने से बचाना है।
पर्सनल च्वाइस पर सवाल उठे, तब सीमाएं तय करें
आप क्या पहनती हैं, किससे दोस्ती रखती हैं, खाली समय कैसे बिताती हैं या अपने पैसे कहां खर्च करती हैं, ये आपकी निजी पसंद से जुड़े फैसले हो सकते हैं। हर फैसले के लिए दूसरों की मंजूरी लेना जरूरी नहीं है। अगर कोई करीबी आपकी पसंद से असहमत है, तो उसकी बात सुनना ठीक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको हर बार अपनी पसंद का छोड़ना या फिर बचाव करना पड़े।
ऐसी स्थिति में शांत रहकर अपनी बाउंड्री क्लियर करें। उदाहरण के लिए, आप कह सकती हैं, "मैं आपका ओपियन समझती हूं, लेकिन इस फैसले पर मैंने सोच-विचार किया है।" रिश्तों में हेल्दी बाउंड्री बनाना जरूरी है, ताकि दोनों लोग अपनी पसंद और जरूरतों का सम्मान कर सकें।
गलती होने पर सफाई देने के बजाय स्वीकार करें
हर बार अपनी बात समझाने की कोशिश में कभी-कभी हम अपनी गलती स्वीकार करना भूल जाते हैं। अगर आपकी किसी बात से सामने वाले को दुख पहुंचा है, तो तुरंत यह कहना कि आपका इरादा गलत नहीं था, उसकी भावनाओं को नजरअंदाज करने जैसा लग सकता है।
ऐसी स्थिति में पहले उसकी बात सुनें और समझें कि उसे किस बात से परेशानी हुई। अगर गलती आपकी है, तो उसे स्वीकार करें और जरूरत पड़ने पर माफी मांगें। आप कह सकती हैं, "मेरा इरादा आपको दुख पहुंचाने का नहीं था, लेकिन मैं समझती हूं कि मेरी बात से आपको बुरा लगा।"
गुस्से में चुप रहें, लेकिन प्रॉब्लम को दबाएं नहीं
जब आप या सामने वाला गुस्से में हों, तब तुरंत जवाब देना स्थिति बिगाड़ सकता है। ऐसे समय में थोड़ी देर चुप रहना, पानी पीना या बातचीत से छोटा-सा विराम लेना मददगार साबित हो सकता है। इससे आप अपनी भावनाओं को समझकर बेहतर तरीके से जवाब दे पाते हैं।
हालांकि, हर बार चुप रहकर बात टालते रहना सही नहीं है। अगर कोई समस्या बार-बार सामने आ रही है, तो शांत होने के बाद उस पर बात जरूर करें। विशेषज्ञों के अनुसार, सम्मानजनक संवाद और एक-दूसरे को ध्यान से सुनना रिश्तों में मतभेद सुलझाने के महत्वपूर्ण तरीके हैं।
कैसे पहचानें कि सफाई देना जरूरी है या नहीं?
अपनी बात रखने से पहले खुद से तीन सवाल पूछें। क्या सामने वाला मेरी बात समझना चाहता है? क्या यह मुद्दा हमारे रिश्ते को प्रभावित कर सकता है? क्या मेरी सफाई से कोई गलतफहमी दूर होगी? अगर जवाब हां है, तो आराम से बात करें। मगर आप अगर केवल लोगों की नाराजगी से बचने या हर किसी की नजर में अच्छा बने रहने के लिए सफाई दे रही हैं, तो एक बार रुककर सोचें।
रिश्तों में अपनी बात समझाना जरूरी है, लेकिन हर किसी को अपनी बात मनवाना जरूरी नहीं। जहां बातचीत करने से समाधान निकल सकता है, वहां बात करें। जहां केवल बहस बढ़ रही हो, वहां फुलस्टॉप लगाएं और जहां आपकी बाउंड्री का सम्मान नहीं किया जा रहा हो, वहां अपनी बात क्लियर रखें।
इसे भी पढ़ें- सिर्फ 'आई लव यू' कहना काफी नहीं! जानिए क्यों रिश्ते को मजबूत बनाए रखने के लिए भरोसा है जरूरी
यकीनन आपको लेख में दी गई जानकारी से क्लियर हो गया होगा कि कहां और किस स्थिति में अपनी बात रखनी चाहिए और कहां पर नहीं।
Image Credit-Magnific(all images)
Contnet Source
American Psychological Association (APA)- (https://www.apa.org/topics/marriage-relationships/healthy-relationships?utm_source)
Mayo Clinic- (https://www.mayoclinic.org/healthy-lifestyle/stress-management/in-depth/assertive/art-20044644?utm_source)
Current Opinion in Psychology में प्रकाशित शोध-(https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC5181851/?utm_source)
-1792678267775_m.webp)