यह बात काफी अजीब है कि कोई आपसे बेहद प्यार करता है, आपकी परवाह करता है और हर मुश्किल में आपके साथ खड़ा रहता है, फिर भी आपके मन के किसी कोने में एक डर बना रहता है। साथी के वफादार होने के बाद भी अंदर ही अंदर यह सवाल उठता रहता है कि 'यह रिश्ता ज्यादा दिन नहीं टिकेगा' या 'कुछ न कुछ गलत जरूर होगा'। अगर आप भी कभी ऐसा महसूस करते हैं, तो समझ लीजिए कि आप अकेले नहीं हैं। असल में यह समस्या प्यार की कमी की नहीं, बल्कि आपके अंदर छुपी किसी गहरी उलझन की है। इस विषय पर 'गेटवे ऑफ हीलिंग' की संस्थापक, साइकोथेरेपिस्ट और लाइफ कोच डॉ. चांदनी तुगनैत का कहना है कि रिश्ते में सुरक्षा का एहसास बाहर से नहीं, बल्कि इंसान के अपने अंदर से आता है। जानते हैं, इसके बारे में...
प्यार के बाद भी मन में क्यों उठता है शक?
किसी से प्यार पाना और मन में सुरक्षित महसूस करना दो अलग-अलग बातें हैं। भले ही आपको दुनिया का सारा प्यार मिल जाए, लेकिन अगर आप अंदर से असुरक्षित महसूस करते हैं तो वो प्यार भी कम लगने लगता है। असली मुद्दा यह नहीं है कि आपका पार्टनर आपसे कितना प्यार करता है, बल्कि यह है कि क्या आप खुद को उस प्यार के काबिल समझते हैं? जब तक आपको अपनी अहमियत का एहसास नहीं होगा, पार्टनर की बार-बार दी गई तसल्ली भी आपके डर को दूर नहीं कर पाएगी और मन में शक पैदा होने लगता है।
अकेला प्यार क्यों काफी नहीं होता?
अक्सर बचपन के कुछ कड़वे अनुभव या पुरानी बातें मन के किसी कोने में बैठ जाती हैं कि हम शायद दूसरों से कमतर हैं।
- बचपन के पुराने अनुभव: अगर बचपन में माता-पिता का रवैया सख्त रहा हो या हमेशा खुद को साबित करने का दबाव रहा हो, तो मन में यह डर घर कर जाता है कि हम काबिल नहीं हैं।
- हमेशा अनहोनी का डर: ऐसे में जब कोई आपसे सच्चा प्यार करता है, तब भी आप किसी अनहोनी का इंतजार करने लगते हैं।
- बात-बात पर खुद पर शक: मन में बार-बार ख्याल आता है कि जब पार्टनर को मेरी असली कमियां पता चलेंगी, तो वह मुझे छोड़ देगा।
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बात को सिर्फ समझना और उसे महसूस करना, दोनों में है अंतर
दिमागी तौर पर आप जानते हैं कि आपका पार्टनर आपसे सच्चा प्यार करता है और आपके पास इस बात के कई सबूत भी हैं, लेकिन बात को दिमाग से जानना और उसे दिल से महसूस करना, दो अलग चीजें हैं। कम आत्मविश्वास वाला व्यक्ति कई बार बिना चाहे भी रिश्ते का इम्तिहान लेने लगता है। वह पार्टनर को खुद से दूर धकेल कर यह देखना चाहता है कि क्या वह फिर भी रुकेगा या नहीं। ऐसा व्यक्ति रिश्ते को खराब करने के लिए नहीं, बल्कि अपने अंदर के डर को दूर करने के लिए ऐसा करता है।
खुद के अंदर भरोसा और सुरक्षा का एहसास कैसे जगाएं?
रिश्ते में असली सुरक्षा तब महसूस होती है जब आपको खुद पर पूरा यकीन हो जाता है। यह भरोसा रातों-रात नहीं बनता, बल्कि छोटे-छोटे अनुभवों से विकसित होता है-
- असफलताओं को स्वीकार करना: किसी निराशा या गलती के बाद भी खुद को संभालना और आगे बढ़ना।
- आपसी मतभेदों को सुलझाना: रिश्ते में झगड़ा या तनाव होने पर घबराने के बजाय शांति से स्थिति को संभालना।
- अपनी अहमियत पहचानना: यह समझना कि आप अच्छी चीजों और सच्चे प्यार के पूरी तरह हकदार हैं।
आपका पार्टनर आपका समर्थन कर सकता है, लेकिन आपके अंदर आत्मविश्वास और सुरक्षा का एहसास केवल आप खुद पैदा कर सकते हैं।
निष्कर्ष
जब आप अंदर से पूरी तरह सुरक्षित महसूस करने लगते हैं, तो आप किसी के प्यार को बिना किसी शर्त या डर के स्वीकार कर पाते हैं। तब आपको अपने पार्टनर पर हर वक्त नजर रखने या उसके जाने के संकेतों को ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती।
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