आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बच्चों की परवरिश करना माता-पिता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अक्सर पेरेंट्स इस उलझन में रहते हैं कि बच्चों को सही रास्ते पर लाने के लिए उन पर सख्ती बरती जाए या फिर उन्हें पूरी छूट दे दी जाए। इन दोनों तरीकों के बीच का रास्ता जेंटल पेरेंटिंग है। यह बच्चों को डर या सजा से डराने के बजाय, प्यार, आपसी सम्मान और समझ के जरिए ढालने का तरीका है। नीचे लेख में स्टेरिस हेल्थकेयर की चेयरमैन जीवन कसारा से जानें जेंटल पेरेंटिंग के फायदे।

क्या है जेंटल पेरेंटिंग?

जेंटल पेरेंटिंग, पेरेंटिंग का एक ऐसा तरीका है जो सहानुभूति, सम्मान और समझ पर आधारित होता है। पहले जहां पेरेंट्स बच्चों को चुप कराने के लिए डांट देते थे। वहीं आज जेंटल पेरेंटिंग में बच्चों के व्यवहार के पीछे के कारण को जानने की कोशिश की जाती है। अगर बच्चा जिद कर रहा है या गुस्सा कर रहा है, तो उसे डांटने के बजाय शांत रहकर उसके नजरिए को समझने का प्रयास करते हैं।

प्यार और सख्ती के बीच सही बैलेंस बनाने के 5 तरीके

अगर आप भी अपने बच्चों के साथ प्यार और अनुशासन का सही संतुलन बनाना चाहती हैं, तो आप नीचे बताए गए तरीकों को आजमा सकती हैं। जानें-

बच्चों की भावनाओं को समझें

जब बच्चा गुस्सा करे, रोए या जिद करे, तो उस पर तुरंत चिल्लाने या डांटने के बजाय शांत रहें। उसकी जगह खुद को रखकर सोचें कि वह ऐसा क्यों कर रहा है। उसकी भावनाओं को स्वीकार करें और कहें, "मैं समझ सकती हूँ कि आप इस समय क्यों नाराज हैं।" इससे बच्चा सुरक्षित महसूस करता है और जल्दी शांत होता है।

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प्यार के साथ स्पष्ट सीमाएं तय करें

जेंटल पेरेंटिंग का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बच्चे को हर बात की छूट दे दी जाए। घर के कुछ बुनियादी नियम और सीमाएं जरूर तय करें, जैसे- सोने का समय, स्क्रीन टाइम या बड़ों का आदर करना। इन नियमों को बच्चों को डर दिखाकर नहीं, बल्कि प्यार और दृढ़ता के साथ समझाएं कि ये नियम उनके भले के लिए क्यों जरूरी हैं।

चिल्लाने के बजाय बात करने की आदत डालें

बच्चों पर चिल्लाने से वे जिद्दी हो जाते हैं या डर के मारे बात छुपाने लगते हैं। इसके बजाय, उनके स्तर पर झुककर आंखों में आंखें डालकर प्यार से बात करें। उन्हें समझाएं कि उनके किस व्यवहार से क्या परेशानी हुई है। जब आप शांत रहकर बात करती हैं, तो बच्चे भी आपकी बात को ध्यान से सुनते हैं और समझते हैं।

सजा के बजाय होने वाले परिणाम के बारे में बताएं

पुराने पेरेंटिंग में गलतियों पर सजा दी जाती है, जबकि जेंटल पेरेंटिंग में बच्चों को उनके एक्शन के परिणामों से सिखाया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर बच्चा खिलौने बिखेरकर समेटने से मना करता है, तो उसे डांटने के बजाय प्यार से कहें कि जब तक खिलौने वापस बॉक्स में नहीं रखे जाएंगे, तब तक नए खिलौने से नहीं खेला जाएगा। इससे वे अपनी जिम्मेदारी खुद उठाना सीखते हैं।

खुद अपने गुस्से पर कंट्रोल रखें

बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने आस-पास देखते हैं। अगर आप चाहती हैं कि आपका बच्चा गुस्सा न करे या चिल्लाए नहीं, तो आपको भी उसके सामने संयम रखना होगा। जब आप खुद मुश्किल परिस्थितियों में शांत रहकर समस्या का समाधान निकालती हैं, तो बच्चा आपको देखकर खुद-ब-खुद सही व्यवहार करना सीख जाता है।

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बच्चे की आज के समय परवरिश कैसे करें ताकि वह डर की वजह से कोई गलत कदम न उठाएं और सही राह पर चले, तो आप इन तरीकों को आजमा सकती हैं। अगर आपको यह लेख पसंद आया है, तो इसे शेय करें। साथ ही पेरेंटिंग से जुड़े लेख पढ़ने के लिए जुड़े रहे हरजिंदगी के साथा।

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