माता-पिता की छोटी-छोटी बातें बच्चों के दिल पर गहरा असर डाल सकती हैं। खासकर बेटियां कई बार परिवार की खुशी के लिए अपनी भावनाओं को दबा लेती हैं और मन में चल रही परेशानियों के बारे में खुलकर बात नहीं कर पाती हैं। कभी भाई से तुलना, कभी करियर को लेकर ताने तो कभी अपनी पसंद जाहिर करने पर डांट; ये बातें धीरे-धीरे उनके आत्मविश्वास को कमजोर कर देती हैं। बाहर से नॉर्मल दिखने वाली बेटी अंदर ही अंदर दुखी रहती है। ऐसे में एम्स दिल्ली की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और BSF में एमिनेंट फैकल्टी डॉक्टर विधि पिलनिया से समझते हैं कि माता-पिता की किन आदतों से बेटियों को भावनात्मक चोट पहुंचती है और रिश्ते में भरोसा बनाए रखने के लिए क्या बदलाव करने चाहिए?
बेटियां मां बाप की इन बातों से रहती हैं परेशान
बेटियां अक्सर अपने माता-पिता को नाराज करने से बचने के लिए कई बातें मन में ही रख लेती हैं। उन्हें डर रहता है कि अपनी परेशानी बताने पर कहीं डांट न पड़े या उनकी भावनाओं को गलत न समझ लिया जाए। कई बार माता-पिता अनजाने में ऐसी बातें कह देते हैं, जो बेटी के मन में लंबे समय तक रह जाती हैं। दूसरों से तुलना करना, हर फैसले पर सवाल उठाना या उसकी बात सुने बिना उसे गलत ठहराना उसके मेंटल स्ट्रेस और आत्मविश्वास को प्रभावित कर देता है। इसलिए, जरूरी है कि माता-पिता अपनी बातचीत के तरीके पर ध्यान दें और घर में ऐसा माहौल बनाएं, जहां बेटी बिना किसी डर के अपनी बात कह सके।
Photo Credit: Magnific
1. भावनाओं को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
जब बेटी अपनी परेशानी बताती है और माता-पिता उसे छोटी बात कहकर टाल देते हैं, तो उसे लग सकता है कि उसकी भावनाओं की कोई अहमियत नहीं दी जा रही है। बार-बार ऐसा होने पर वह अपनी परेशानियां साझा करना कम कर देती है। लगातार अकेलेपन, तनाव और आत्मविश्वास में कमी जैसी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। बेटी को सलाह देने से पहले उसकी बात ध्यान से सुनना जरूरी है।
2. भाई या दूसरों से तुलना करना
'तुम्हारा भाई तुमसे ज्यादा समझदार है' या 'दूसरी लड़कियों को देखो, कितना अच्छा करती हैं; ऐसी बातें बेटी को खुद के बारे में नकारात्मक सोचने पर मजबूर कर सकती हैं। लगातार तुलना होने से उसे लग सकता है कि वह कभी अच्छी नहीं बन सकती है। इससे आत्मसम्मान कमजोर हो जाता है और भाई-बहनों के बीच भी दूरी बढ़ जाती है। बच्चों की तुलना करने के बजाय उनकी अलग-अलग खूबियों और प्रयासों की सराहना करनी चाहिए।
3. हर बात पर चुप रहने की आदत
अगर बेटी को बार-बार यह महसूस कराया जाए कि अपनी बात रखना बदतमीजी है, तो वह धीरे-धीरे भावनाएं दबाना सीख जाती है। आगे चलकर यही आदत दोस्ती और शादीशुदा जिंदगी में अपनी जरूरतें बताने में मुश्किल पैदा कर देती है। वह दूसरों को नाराज करने के डर से अपनी सीमाएं तय नहीं कर पाती है। इसलिए, असहमति जताने और अपनी भावनाएं जाहिर करने का मौका देना जरूरी है।
Photo Credit: Magnific
4. करियर और निजी फैसलों पर रोक-टोक
बेटी के करियर, कपड़ों, दोस्तों या जीवन से जुड़े हर फैसले पर सवाल उठाना उसके मन में गलती करने का डर पैदा कर सकता है। उसे लग सकता है कि अपने फैसले लेने की क्षमता उसमें नहीं है। जरूरत से ज्यादा नियंत्रण उसकी स्वतंत्रता और निर्णय लेने के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है। माता-पिता को अपनी चिंताएं बताने के साथ बेटी की पसंद और विचारों को भी महत्व देना चाहिए।
5. बातचीत का तरीका बदलना जरूरी
बेटियों के साथ भरोसेमंद रिश्ता बनाने के लिए मां-बार को उनकी बात बीच में काटने या तुरंत फैसला सुनाने से बचना चाहिए। उनकी परेशानी सुनें, सवाल पूछें और बिना मजाक उड़ाए उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। गलती होने पर अपमानित करने के बजाय समाधान पर बात करें। साथ ही, उम्र और परिस्थिति के अनुसार उन्हें फैसले लेने की आजादी दें। इससे बेटी को महसूस होगा कि परिवार उसकी बात सुनने और जरूरत पड़ने पर उसका साथ देने के लिए मौजूद है।
Photo Credit: Magnific
बेटी को सलाह के साथ भरोसा भी दें
मां-बाप की भूमिका सिर्फ बच्चों को सही-गलत समझाना नहीं, बल्कि उन्हें भावनात्मक सुरक्षा देना भी है। हर बेटी चाहती है कि उसकी बात सुनी जाए और उसे बिना शर्त समझने की कोशिश की जाए। जरूरी नहीं कि माता-पिता हर फैसले से सहमत हों, लेकिन असहमति जताने का एक तरीका होना चाहिए। जब घर में बातचीत, भरोसे और सम्मान की जगह होती है, तो बेटियां अपनी परेशानियां छिपाने के बजाय उन्हें साझा करना सीखती हैं। यही मजबूत रिश्ते और बेहतर मेंटल स्ट्रेस की दिशा में अहम कदम है।
यह भी पढ़ें- बाउंड्रीज, थेरेपी और नो कॉन्टैक्ट! जानिए क्यों आजकल अपने पेरेंट्स से दूरी बना रहे हैं यंग एडल्ट्स?
मां-बाप का प्यार कभी गलत नहीं होता है, लेकिन प्यार जताने का तरीका गलत हो सकता है। बेटी को अगर सच में मजबूत बनाना है तो उसे तुलना, तानों और रोक-टोक से नहीं, बल्कि भरोसे, खुलकर बात करने की आजादी और बराबरी का हक देकर बनाना होगा। जब बेटी को लगेगा कि घर में उसकी बात सुनी और समझी जा रही है, तभी वह अंदर से खुश और आत्मविश्वासी बन पाएगी। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
-1793094147423_m.webp)