परवरिश में अनजाने में हुई चूक बच्चों के मानसिक विकास पर गहरा असर डालती है। कई बार माता-पिता अपने बच्चों की भलाई के लिए जो बातें कहते हैं या उनके सामने करते हैं, वे बच्चों के आत्मविश्वास को चोट पहुंचा सकती हैं। अगर परवरिश के सही तरीकों पर वक्त रहते ध्यान न दिया जाए, तो बच्चे अंदर से कमजोर महसूस करने लगते हैं। ऐसे में ये जानना तो बनता है कि पेरेंटिंग से जुड़ी वे कौन-सी आदतें हैं, जिनसे बचना बेहद जरूरी है। इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...

1 - बच्चों की भावनाओं को नजरअंदाज करना

जब बच्चे अपनी किसी परेशानी, डर या दुख को बताते हैं, तो कई पेरेंट्स उसे छोटी बात मानकर छोड़ देते हैं। बच्चों से यह कहना कि इसमें रोने या परेशान होने जैसी कोई बात नहीं है, उनके मन में यह भावना बैठा देता है कि उनकी भावनाएं मायने नहीं रखतीं। बच्चों की बात को हमेशा सहानुभूति के साथ सुनें।

2 - सीखने से ज्यादा अच्छे नंबरों पर जोर देना

पढ़ाई में सिर्फ अच्छे अंक लाने का दबाव बच्चों में नया सीखने का उत्साह खत्म कर देता है। जब पेरेंट्स का पूरा ध्यान सिर्फ रिपोर्ट कार्ड पर होता है, तो बच्चे परीक्षा के स्ट्रेस में जीने लगते हैं। ऐसे में रिजल्ट के बजाय उनके प्रयास और कुछ नया सीखने की सराहना करना सीखें।

3 - जेंडर के आधार पर दायरा तय करना

एक्सपर्ट के मुताबिक, लड़कों को रोने से रोकना या लड़कियों को हर हाल में नम्र और शांत रहने की सीख देना बच्चों के व्यक्तित्व को सीमित कर देता है। रोना इंसान की स्वाभाविक भावना है, चाहे वह लड़का हो या लड़की। बच्चों को अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करने की आजादी दें।

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4 - असफलता से हमेशा बचाने की कोशिश करना

बच्चों को हर मुश्किल से बचाकर रखना उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने में कमजोर बनाता है। अगर बच्चे कभी नाकाम होते हैं, तो उन्हें खुद उस स्थिति से निपटने का मौका दें। हार से सीखकर आगे बढ़ना ही बच्चों को आत्मनिर्भर बनाता है।

5 - दूसरों को खुद से ऊपर रखने की सीख देना

बच्चों को बचपन से ही सबकी बात मानने और अपनी खुशियों को किनारे रखने की आदत डालना नुकसानदेह हो सकता है। इससे बच्चे भविष्य में अपनी सीमाएं तय नहीं कर पाते और हमेशा दूसरों को खुश करने के दबाव में रहते हैं। उन्हें अपनी जरूरतों को प्राथमिकता देना भी सिखाएं।

6 - गलतियों को अपराध की तरह देखना

भूल होने पर बच्चों को कड़ी सजा देना या डांटना उनमें डर पैदा करता है। इस डर की वजह से बच्चे सच छिपाना और झूठ बोलना सीख जाते हैं। उन्हें समझाएं कि गलतियां इंसान से ही होती हैं और वे सीखने का एक हिस्सा हैं।

7 - अजनबियों को लेकर सिर्फ डर का माहौल बनाना

बच्चों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करना जरूरी है, लेकिन हर अनजान व्यक्ति को सिर्फ खतरनाक बताना उनमें बेवजह का खौफ भर सकता है। उन्हें सही और गलत व्यवहार का अंतर समझाएं, ताकि वे सुरक्षित महसूस करते हुए सतर्क रहना सीखें।

इस लेख के माध्यम से पता चलता है कि परवरिश एक जिम्मेदारी भरा सफर है, जिसमें बच्चों को सिर्फ शारीरिक रूप से बढ़ाना ही नहीं, बल्कि उन्हें मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना भी शामिल है।

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Images: magnific