पेरेंट्स अपने बच्चे को दुनिया की हर मुश्किलों से बचाना चाहते हैं, लेकिन कई बार यह फिक्र इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि वे हेलीकॉप्टर पेरेंट्स बन जाते हैं। जी हा, हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग यानि हर वक्त बच्चे के सिर पर मंडराते रहना और उसकी हर छोटी-बड़ी हरकत पर कड़ी नजर रखना। हालांकि, पेरेंट्स ऐसा प्यार और चिंता के कारण करते हैं, लेकिन हर समय की यह निगरानी बच्चे की पर्सनल ग्रोथ के लिए फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। ऐसे में यह जानना तो बनता है कि आखिर बच्चों पर पल-पल की नजर रखना कैसे उनके जीवन को प्रभावित कर सकता है? इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...
हर वक्त बच्चों पर नजर रखना क्यों है गलत?
जब आप बच्चे पर हर वक्त नजर रखते हैं, तो अनजाने में आप उसका आत्मविश्वास छीन लेते हैं। ऐसे बच्चों को हमेशा यह महसूस होता है कि वे अकेले कोई काम सही ढंग से नहीं कर सकते।
बता दें कि हर वक्त टोकने और नजर रखने से बच्चा स्ट्रेस और एंग्जायटी का शिकार होने लगता है। सबसे बड़ा नुकसान यह भी होता है कि वह अपनी गलतियों से सीखना ही बंद कर देता है, क्योंकि उन्हें पता होता है कि कोई न कोई आकर उनकी समस्या तुरंत सुलझा देगा।
बच्चों के साथ कैसे डील करें?
- बच्चों को कंट्रोल करने के बजाय उनका मार्गदर्शन करें।
- उन्हें खुद अपने छोटे-मोटे फैसले लेने दें।
- जब वे कोई गलती करें, तो तुरंत न डांटें।
- उन्हें घर के छोटे कामों की जिम्मेदारी सौंपें ताकि वे आत्मनिर्भरत बनें।
एक्सपर्ट की राय
पेरेंटिंग का असली मतलब बच्चे को अपनी छांव में रखना नहीं है, बल्कि उसे धूप में डटकर खड़े होने के काबिल बनाना है। इससे अलग माता-पिता को अपने बच्चों को सेफ स्पेस देना चाहिए, न कि घर को पिंजरा बना देना चाहिए। साथ ही बच्चे के होमवर्क, प्रोजेक्ट या दोस्तों को चुन में जरूरत से ज्यादा दखल न दें।
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