प्यार का तरीका समय-समय पर बदलता जा रहा है। एक समय था जब रिश्ते धीरे-धीरे आगे बढ़ते थे। लोग महीनों तक एक दूसरे को समझते थे और बिना ज्यादा बातें किए भी सब कुछ समझ लिया जाता था, लेकिन अब जेन-जी रिश्तों को बिल्कुल अलग नजरिए से देखती है। उनके लिए किसी भी रिश्ते में क्लियर कट बातचीत, पर्सनल स्पेस, इमोशंस और दोनों की सहमति बहुत मायने रखती है।

यही वजह है कि कई मिलेनियल्स को जेन जी की डेटिंग स्टाइल थोड़ी अलग, नई और कभी-कभी समझ से परे लगती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कोई एक तरीका सही है और दूसरा गलत। दोनों जनरेशंस अलग-अलग माहौल में पली-बढ़ी हैं। इसलिए सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स और बदलती लाइफस्टाइल ने रिश्तों को देखने का तरीका भी बदल दिया है। आइए डॉ. लीना परांजपे (पीएचडी, रिलेशनशिप और मैरिज एक्सपर्ट, रिलेशनशिप ट्रांसफॉर्मेशन कोच और स्पीकर) से जानते हैं कि आखिर Gen Z की कौन-सी डेटिंग हैबिट्स मिलेनियल्स को सबसे ज्यादा हैरान करती हैं।

डेट पर जाने का मतलब रिलेशनशिप नहीं

पहले अगर दो लोग लगातार मिलते थे, तो अक्सर माना जाता था कि वे एक-दूसरे के साथ रिलेशनशिप में हैं, लेकिन Gen Z ऐसा नहीं मानती है। जेन जी के लिए सिर्फ डेट पर जाना या साथ समय बिताना कमिटमेंट नहीं होता है। जब तक दोनों लोग खुलकर यह क्लियर नहीं कर लेते है कि वे एक्सक्लूसिव रिलेशनशिप में हैं, तब तक वो खुद को पार्टनर नहीं मानते है। यानी रिश्ते की शुरुआत में बातें क्लियर करके रखना उनके लिए जरूरी है।

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'टॉकिंग स्टेज' में क्या होता है?

आजकल टॉकिंग स्टेज (Talking Stage) वर्ड बहुत ज्यादा सुनने को मिल रहा है। Gen Z इसे किसी रिश्ते की शुरुआत का एक बिल्कुल अलग मोड़ मानते हैं। इस दौरान दो लोग आपस में बातें करते हैं, एक-दूसरे की पसंद-नापसंद जानते हैं और यह समझते हैं कि उनकी सोच आपस में मिलती है या नहीं। इस दौरान वो खुद को कपल नहीं कहते हैं। दूसरी तरफ Millennials इसे कोई नया नाम देने के बजाय सिर्फ दोस्ती या डेटिंग की शुरुआत ही मानते हैं।

सोशल मीडिया पर नहीं रिवील करते रिलेशनशिप

पहले लोग जैसे ही रिलेशनशिप में आते थे, तुरंत सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट कर देते थे, लेकिन Gen Z ऐसा बिल्कुल नहीं करती है। आज के यूथ रिश्ते को थोड़ा टाइम देते हैं। वे एक ही बार में सब कुछ रिवील नहीं करते, बल्कि कभी साथ में चाय-कॉफी की फोटो, तो कभी सिर्फ हाथ की एक झलक शेयर करके धीरे-धीरे हिंट देते हैं कि उनकी लाइफ में कोई स्पेशल आ गया है। सोशल मीडिया की इस निंजा टेक्निक को सॉफ्ट लॉन्च (Soft Launch) कहते हैं। इससे उनकी प्राइवेसी भी बनी रहती है और रिश्ते पर दुनिया भर का फालतू प्रेशर भी नहीं आता है।

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शुरुआत में ही साफ कर देते हैं अपनी उम्मीदें

Gen Z किसी भी रिलेशनशिप की शुरुआत में ही क्लैरिटी पसंद करती है। वो शुरू में ही सारे कार्ड्स टेबल पर रख देते हैं ताकि बाद में कोई ड्रामा न हो। वे शुरुआत में ही इन बातों पर खुलकर बात कर लेते हैं-

  • कम्युनिकेशन स्टाइल: उन्हें रोज-रोज घंटों कॉल पर बात करना पसंद है या सिर्फ टेक्स्ट्स से काम चल जाता है।
  • एक्सपेक्टेशंस: वो इस रिश्ते से क्या चाहते हैं, टाइमपास या कुछ सीरियस।
  • पर्सनल बाउंड्रीज: उनके लिए क्या सही है और क्या बिल्कुल 'नो-नो' (रेड फ्लैग) है।
  • मी-टाइम: उन्हें अपने लिए कितना अकेला समय या स्पेस चाहिए।
  • फ्यूचर प्लान्स: करियर और लाइफ को लेकर उनकी क्या सोच है।

कुल मिलाकर Gen Z का सिंपल रूल है कि शुरुआत में ही सब क्लियर कर लो, ताकि बाद में कोई मिसअंडरस्टैंडिंग न हो। वहीं Millennials का मानना होता है कि ये सब बातें धीरे-धीरे, जैसे-जैसे रिश्ता पुराना हो, तब करनी चाहिए।

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रिश्ता न चले तो मूव ऑन करने में नहीं करते देरी

अगर Gen Z को शुरुआत में ही लग जाए कि वाइब्स मैच नहीं हो रही, आदतें या फ्यूचर प्लान्स अलग हैं, तो वे जबरदस्ती घसीटने की बजाय 'कट ऑफ' करना बेहतर समझते हैं। उनके लिए अपनी मेंटल पीस, सेल्फ-रिस्पेक्ट और कम्फर्ट सबसे पहले आता है। अगर कहीं रेड फ्लैग्स दिखें, तो वे बिना टाइम वेस्ट किए आगे बढ़ जाते हैं। वहीं Millennials का मानना होता है कि रिश्ते को थोड़ा टाइम देना चाहिए, एडजस्ट करना चाहिए और हर छोटी बात पर गिव-अप नहीं करना चाहिए।

पर्सनल स्पेस को भी रिश्ते का हिस्सा मानते हैं

Gen Z के लिए 'मी-टाइम' भी रिश्ते में बहुत जरूरी होता है। इनका मानना है कि एक हेल्दी रिलेशनशिप वही है, जहां पार्टनर होने के बाद भी आपको अपनी लाइफ जीने की पूरी आजादी मिले। दोस्तों के साथ चिल करना, अपनी हॉबीज पूरी करना या बस अकेले बैठकर टाइम बिताना, ये सब भी उतना ही जरूरी है। Gen Z के लिए चौबीस घंटे चिपके रहना या हर समय साथ रहना ही प्यार का सबूत नहीं होता है।

क्या Millennials और Gen Z की सोच बिल्कुल अलग है?

ऐसा बिल्कुल नहीं है। दोनों का अल्टीमेट गोल एक ही है- एक सच्चा, भरोसेमंद और रिस्पेक्टफुल रिश्ता। बस फर्क इतना है कि दोनों का तरीका थोड़ा अलग है। Millennials जहां रिश्ते को थोड़ा टाइम देकर धीरे-धीरे मजबूत बनाने में बिलीव करते हैं, वहीं Gen Z को शुरुआत से ही नो-ड्रामा, फुल क्लैरिटी और ओपन कम्युनिकेशन चाहिए होता है।

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आखिर क्यों होता है यह कन्फ्यूजन?

इसकी असली वजह है दोनों जनरेशन का अलग-अलग बैकग्राउंड। Millennials उस दौर में बड़े हुए, जब ना तो इतने डेटिंग ऐप्स थे और ना ही सोशल मीडिया का इतना क्रेज था। वहीं Gen Z तो पैदा ही डिजिटल दुनिया में हुई है। इसीलिए रिश्तों को लेकर इनकी सोच, भाषा और स्टाइल सब कुछ एक-दूसरे से काफी अलग है।

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