आज के डिजिटल दौर में प्यार का इजहार करने के तरीके भी पूरी तरह बदल चुके हैं। कभी खत और तोहफे प्यार जताने का जरिया हुआ करते थे। वहीं अब सोशल मीडिया अकाउंट्स और फोन के पासवर्ड शेयर करना कई लोगों के लिए प्यार और भरोसे की निशानी माना जाता है। बहुत से लोग इसे अपने रिश्ते की गहराई और पारदर्शिता से जोड़कर देखते हैं। मगर क्या वाकई पासवर्ड देना सच्चे प्यार की निशानी है या फिर यह रिश्ते में शक, पाबंदियों और टॉक्सिक कंट्रोल की एक खतरनाक शुरुआत है? स्टेरिस हेल्थकेयर की चेयरमैन जीवन कसारा से जानते हैं कि इस मामले में क्या सच है और क्या झूठ।
क्या यह वाकई प्यार और भरोसे की निशानी है?
कई कपल्स का मानना है कि पासवर्ड शेयर करने से उनके बीच कुछ भी छिपा नहीं रहता। जब आप अपनी मर्जी से और बिना किसी दबाव के अपना फोन या पासवर्ड पार्टनर को देते हैं, तो यह दिखाता है कि आप उन पर पूरा भरोसा करते हैं। कभी-कभी इमरजेंसी में या सामान्य तौर पर ओटीटी ऐप्स के पासवर्ड शेयर करना एक आम बात है। मगर एक्सपर्ट्स का कहना है कि भरोसा साबित करने के लिए पासवर्ड शेयर करना ही एकमात्र तरीका नहीं होना चाहिए।
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कब यह कंट्रोल और शक में बदल जाता है?
दिक्कत तब शुरू होती है, जब पासवर्ड मांगना एक शर्त या दबाव बन जाए। अगर आपका पार्टनर इन बातों पर जोर देता है, तो यह कंट्रोल की शुरुआत हो सकती है-
- अगर तुम मुझसे प्यार करते हो, तो अपना पासवर्ड दो। आपके मैसेज चेक करना, आप किससे बात कर रहे हैं इस पर नजर रखना।
- अगर आप अपना पासवर्ड बदल लें, तो पार्टनर का गुस्सा होना या शक करना। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह प्यार नहीं बल्कि असुरक्षा और कंट्रोल करने की चाहत को दर्शाता है।
रिश्ते में प्राइवेसी का महत्व
कई लोगों को लगता है कि रिश्ते में प्राइवेसी का मतलब कुछ छिपाना या धोखा देना है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। हर इंसान की अपनी एक पर्सनल लाइफ होती है, जिसमें उनके दोस्तों, परिवार और सहकर्मियों से जुड़ी बातें होती हैं। हो सकता है आपका कोई दोस्त आपसे अपनी कोई बहुत सीक्रेट बात शेयर कर रहा हो। ऐसे में आपका फोन आपके पार्टनर के पास होना आपके दोस्त की प्राइवेसी का भी उल्लंघन है। एक हेल्दी रिश्ते में 'पर्सनल स्पेस' होना बहुत जरूरी है।
एक्सपर्ट्स की क्या सलाह है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि एक मजबूत रिश्ता पासवर्ड शेयर करने पर नहीं, बल्कि आपसी समझ, सम्मान और बातचीत पर टिका होता है। अपने पार्टनर पर भरोसा रखें और उन्हें भी खुद पर भरोसा करने का मौका दें। अगर आप पासवर्ड शेयर नहीं करना चाहते, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। इसे प्यार की कमी से न जोड़ें। रिश्ते में पारदर्शिता बातों से और आपके व्यवहार से आनी चाहिए, न कि फोन की जासूसी से।
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अगर आप भी इस सवाल को लेकर अक्सर उलझी रहती हैं, तो एक्सपर्ट की राय आपकी मदद कर सकती है। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया है तो इसे शेयर करें। ऐसे आर्टिकल को पढ़ने के लिए जुड़े रहे हरजिंदगी के साथ।
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