अगर आप क‍िसी भी गुरुद्वारे में जाती हैं, तो वहां मि‍लने वाला गरमा-गरम और स्‍वाद‍िष्‍ट हलवा जरूर खाया होगा। गुरुद्वारे में अरदास के बाद संगत में बांटे जाने वाले इस प्रसाद को हम कड़ा प्रसाद कहते हैं। इसे लेने के ल‍िए लोग दोनों हाथ आगे करते हैं और बड़े ही सम्‍मान के साथ इसे ग्रहण करते हैं। हाल ही में मुझे भी अमृतसर में स्वर्ण मंदिर (गोल्डन टेंपल) जाने और वहां कड़ा प्रसाद ग्रहण करने का सौभाग्य मिला था।

प्रसाद लेते समय मेरे मन में एक सवाल आया कि आखिर इस स्वादिष्ट हलवे को कड़ा प्रसाद क्यों कहा जाता है? क्या इसके नाम के पीछे कोई खास वजह है या फिर ये सिर्फ एक पुरानी परंपरा है? इस बारे में जानने के ल‍िए हमने कई लोगों से बात की और इसके इतिहास को भी समझने की कोशिश की, तब जाकर मुझे इसके पीछे की बेहद दिलचस्प वजह पता चली। अगर आप भी कड़ा प्रसाद के नाम से जुड़ी ये खास बात जानना चाहती हैं, तो आपको ये लेख जरूर पढ़ना चाहिए। हम आपको इसके बारे में व‍िस्‍तार से जानकारी दे रहे हैं। आइए जानते हैं-

कड़ा प्रसाद क्यों कहलाता है?

बहुत से लोगों को लगता है कि‍ कड़ा प्रसाद में 'कड़ा' शब्‍द का मतलब क‍िसी धार्मिक न‍ियम से है, लेक‍िन ऐसा नहीं है। गोल्‍डन टेंपल में हमने कई लोगों से बात की तो पता चला क‍ि इसका नाम उस बड़ी कड़ाही से जुड़ा है जिसमें इस हलवे को तैयार किया जाता है। दरअसल, पंजाब में बड़ी कड़ाही को कड़ाहा कहा जाता है। पुराने समय में जब गांव या बड़ी संगत के लिए भोजन या प्रसाद बनाया जाता था, तब वो बड़े कड़ाहे में ही तैयार होता था। इसी वजह से इस प्रसाद को कड़ाहा प्रसाद कहा जाने लगा, जो समय के साथ बोलचाल में कड़ा प्रसाद बन गया।

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कड़ा प्रसाद को माना जाता है गुरु का आशीर्वाद

कुछ साइटों पर ऐसा देखने को म‍िला है क‍ि कड़ा प्रसाद को स‍िर्फ एक मिठाई की तरह नहीं देखा जाता है। सिख धर्म में इसे गुरु की कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि‍ गुरुद्वारे से कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। इसी वजह से अरदास के बाद सभी लोगों को कड़ा प्रसाद दिया जाता है। इसमें धर्म, जाति, अमीरी-गरीबी या किसी तरह का भेदभाव नहीं देखा जाता है। यहां हर क‍िसी को समान रूप से प्रसाद मिलता है।

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किन चीजों से बनता है कड़ा प्रसाद?

जो गुरुद्वारे में कड़ा प्रसाद द‍िया जाता है, उसे बहुत ही कम सामग्री से तैयार किया जाता है। इसमें गेहूं का आटा, घी, चीनी (या कुछ जगहों पर गुड़) और पानी का इस्तेमाल किया जाता है। इन सभी सामग्रियों को संतुलित मात्रा में मिलाकर बड़ी कड़ाही में पकाया जाता है।

कड़ा प्रसाद का धार्मिक महत्व क्या है?

सिख धर्म में कड़ा प्रसाद का बहुत बड़ा महत्व है। इससे हमें ये सीख म‍िलती है क‍ि सभी लोग एक समान हैं और हमें आपस में प्यार और एकता बनाए रखनी चाह‍िए। इसे बनाने में जो चीजें (आटा, घी, चीनी) इस्तेमाल होती हैं, वो भी आपस में मिलजुलकर एकता से रहने का संदेश देती हैं। इस प्रसाद को बनाने के बाद सबसे पहले इसे गुरु ग्रंथ साहिब के आगे रखा जाता है और फिर अरदास (प्रार्थना) के बाद वहां मौजूद सभी लोगों में बांट दिया जाता है।

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दोनों हाथों से क्यों लिया जाता है प्रसाद?

आपने देखा होगा क‍ि गुरुद्वारे में कड़ा प्रसाद लेते समय लोग दोनों हाथों को जोड़कर आगे करते हैं। ऐसा वो सम्मान और विनम्रता दिखाने के लिए करते हैं। दरअसल, इसे गुरु का आशीर्वाद माना जाता है, इसलिए इसे सम्‍मान से ग्रहण किया जाता है। आमतौर पर न‍ियम यही है क‍ि कड़ा प्रसाद को वहीं (गुरुद्वारे में ही) बैठकर खाया जाता है।

दुनिया के बड़े गुरुद्वारों में रोज बनता है कड़ा प्रसाद

अगर आपको लग रहा है क‍ि गुरुद्वारे में स‍िर्फ खास मौकों पर ही कड़ा प्रसाद तैयार क‍िया जाता है, तो ऐसा नहीं है। देश और विदेश के लगभग हर गुरुद्वारे में कड़ा प्रसाद रोजाना बनता है। खासतौर पर अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में हर दिन बड़ी मात्रा में कड़ा प्रसाद बनाया और श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। हजारों लोग रोज यहां प्रसाद ग्रहण करते हैं।

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तो कड़ा प्रसाद के नाम के पीछे की वजह आप जान गईं होंगी। अब जब आप गुरुद्वारे में मि‍ले वाला कड़ा प्रसाद ग्रहण करें तो सभी को इसके नाम का मतलब जरूर बताएं। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Source-
https://www.sikhiwiki.org/index.php/Kara_Parshad
https://www.sikhism.net.in/gurdwara/karah-prasad.php

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