रणबीर कपूर की 4000 करोड़ी फिल्म 'रामायण' को लेकर इन दिनों फैंस में जबरदस्त उत्साह है। यह फिल्म 5 नवंबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म के दो ट्रेलर और कुछ गाने रिलीज हुए हैं, जिन्हें मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला है। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन करेगी, क्या रणबीर और साई, राम-सीता के रूप में ऑडियंस के दिलों में जगह बना पाएंगे, ये सवाल सभी के मन में हैं। इसी बीच एक और सवाल है जो बार-बार ऑडियंस के मन में और सोशल मीडिया पर उठ रहा है कि क्या यह फिल्म 39 साल पहले आई रामानंद सागर की 'रामायण' की तरह कल्ट साबित होगी? साल 1987 में दूरदर्शन पर आई रामानंद सागर की 'रामायण' आज भी फैंस के दिलों और यादों में बसती है। चलिए जरा समझने की कोशिश करते हैं कि आधुनिक तकनीक, बड़े स्टार्स, मेगा बजट और शानदार विजुअल्स से सजी रणबीर कपूर की 'रामायण' क्या रामानंद सागर की 'रामायण' जैसा जादू दोहरा पाएगी?
1987 की 'रामायण' ने कैसे रचा था इतिहास?
रामानंद सागर की 'रामायण' केवल एक टीवी शो नहीं थी, बल्कि यह करोड़ों भारतीय परिवारों के लिए इमोशन बन चुकी थी। आज भी जब कभी 'रामायण' का जिक्र चलता है, तो सबसे पहले इसी का नाम आता है।
- कहा जाता है कि उस वक्त जब दूरदर्शन पर यह 'रामायण' टेलीकास्ट होती थी, तो सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था। लॉकडाउन के दौरान जब इसे दोबारा टेलीकास्ट किया गया था, तब भी इसे काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला था।
- इस शो में राम के रूप में अरुण गोविल की शांत और मर्यादित छवि, दीपिका चिखलिया का सीता के रूप में अभिनय और संवादों की सादगी ने किरदारों को दर्शकों के करीब ला दिया। यहां तक कि लोग इन्हें राम-सीता के रूप में पूजने लगे थे।
- उस वक्त सीमित साधनों और कम बजट के बावजूद इस सीरियल ने इतिहास रच दिया था। तब वीएफएक्स का दौर नहीं था, ऐसे में इस सीरियल के संगीत, कहानी कहने के ढंग और सभी किरदारों की एक्टिंग ने इसे सफलता दिलाई थी।
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रणबीर कपूर की 'रामायण' कितनी अलग होगी?
बात अगर नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही रणबीर कपूर की 'रामायण' की करें, तो यह उस वक्त की 'रामायण' से काफी अलग होगी। फिल्म में फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता, यश रावण और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे। इस फिल्म की खासियत इसका बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा सिनेमाई अनुभव है। आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स, भव्य सेट, एक्शन और तकनीक के जरिए रामायण की कथा को ग्लोबल लेवल पर पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। फिल्म के हर सीन और सेट को काफी भव्य तरीके से दिखाने की कोशिश की गई है। हालांकि, किसी फिल्म की सफलता केवल उसके बजट या विजुअल्स पर निर्भर नहीं करती। अभिनय, पटकथा, संगीत और फिल्म से लोगों का इमोशनली जुड़ाव ज्यादा जरूरी है।
क्या 4000 करोड़ रुपये का बजट दिला पाएगा पुरानी 'रामायण' जैसी लोकप्रियता?
- यहां यह समझना जरूरी है कि बेशक फिल्म 'रामायण' का बजट बहुत अधिक है और मेकर्स ने इसे भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन फिल्म का दर्शकों से जुड़ना बहुत जरूरी है।
- 'रामायण' कोई साधारण कहानी नहीं है, बल्कि एक महाकाव्य है और ऐसे में राम-सीता के रूप में साई और रणबीर दर्शकों का दिल जीत पाते हैं या नहीं, यह फिल्म की सबसे बड़ी कसौटी होगी।
- फिल्म में धार्मिक भावनाओं और तथ्यों का कितना ध्यान रखा गया है, क्रिएटिविटी के चक्कर में कहीं सही तथ्यों से छेड़छाड़ तो नहीं की गई है, ये भी कुछ ऐसी बातें हैं, जो इस फिल्म का हिट या फ्लॉप करा सकती हैं।
- इससे पहले फिल्म 'आदिपुरुष' से भी काफी उम्मीदें थीं, लेकिन फिल्म के घटिया डायलॉग्स और कमजोर प्रेजेंटेशन की वजह से दर्शकों ने इसे सिरे से नकार दिया था।
- साल 1987 से साल 2026 तक वक्त भी काफी बदल गया है, आज सोशल मीडिया का जमाना है और आज की पीढ़ी की सोच भी काफी अलग है, ऐसे में इस नई फिल्म को इन सारी बातों पर खरा उतरना होगा।
- रामानंद सागर की 'रामायण' ने सीमित तकनीक और सुविधाओं के बावजूद अपनी कहानी और कलाकारों के दम पर दर्शकों से गहरा रिश्ता बनाया था।
- वहीं, नई फिल्म के सामने चुनौती है कि वह आधुनिक दर्शकों की उम्मीदों को पूरा करते हुए मूल कथा की गरिमा और इमोशनल गहराई भी बनाए रखे।
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