फ‍िल्‍म ‘हनुमान अंश’ का ‘पार्वती’ सॉन्‍ग इन दिनों काफी पसंद किया जा रहा है। इस गाने की खास बात इसके बुंदेली बोल हैं, जिनमें माता पार्वती और भगवान शिव से जुड़ा एक प्रसंग है। गाने में माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करने की जिद करती हैं और उनके लिए तपस्या करती हैं। इसके बाद सप्तऋषि उन्हें समझाने के ल‍िए पहुंचते हैं।

वे पार्वती माता को भगवान शिव के रूप, उनके रहन-सहन और उनके जीवन के बारे में बताते हैं। गाने में बुंदेली के ऐसे कई शब्द यूज क‍िए गए हैं, जिनका मतलब हर किसी को आसानी से समझ नहीं आता है। खासकर ‘काय’, ‘मड़इया’ और दूसरे देसी शब्द सुनकर लोग इसका सही मतलब जानना चाहते हैं। ऐसे में आज हम आपको अपने इस लेख में ‘पार्वती’ भजन के हर अंतरे का आसान ह‍िंदी में मतलब बताएंगे। आइए जानते हैं-

जब जिद पर अड़ जाती हैं पार्वती में गाने के बोल और उनके ह‍िंदी मतलब

गाने के बाेल- जब जिद पे आ गई पार्वती
पार्वती पार्वती
समझाने पहुंचे सप्तऋषि
सप्तऋषि सप्तऋषि

हिंदी मतलब- जब माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करने की जिद करने लगती हैं, तो उन्हें समझाने के लिए सप्तऋषि उनके पास पहुंचे।

गाने के बाेल- काय जिद कर रही
काय को मर रही
काय जिद कर रही
काय को मर रही
ऐसे वर के लाने

हिंदी मतलब- सप्तऋषि पार्वती माता से पूछते हैं कि तुम ऐसी जिद क्यों कर रही हो और ऐसे वर को पाने के लिए खुद को इतना कष्ट क्यों दे रही हो? यहां ‘काय’ का मतलब ‘क्यों’ है।

गाने के बाेल- काय जिद कर रही
काय को मर रही
ऐसे वर के लाने

हिंदी मतलब- तुम ऐसे वर को पाने के लिए इतनी जिद क्यों कर रही हो और खुद को इतना कष्ट क्यों दे रही हो?

गाने के बाेल- जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ

हिंदी मतलब- सप्तऋषि कहते हैं कि जिनके सिर पर गंगा है और गले में सांप रहता है, ऐसे शिव को लोग भोलेनाथ कहते हैं। वे पार्वती को शिव के इसी अलग रूप के बारे में समझा रहे हैं।

गाने के बाेल- जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ

हिंदी मतलब- जिनके सिर पर गंगा और गले में सांप है, उनके रूप और रहन-सहन को देखकर सप्तऋषि पार्वती को समझाते हैं। फिर कहते हैं कि लोग उन्हें भोलेनाथ कहते हैं।

गाने के बाेल- ना खपरा ना छपरा
ना फूस की धरे मड़इया
का खावे को धरो वहां
बस रोवत रहत लड़इया

हिंदी मतलब- सप्तऋषि फ‍िर माता पार्वती से कहते हैं कि शिव के पास रहने के लिए न पक्की छत है, न फूस की झोपड़ी। वहां खाने-पीने का भी कोई खास इंतजाम नहीं है। उनका जीवन सुख-सुविधाओं वाला नहीं है। यहां ‘मड़इया’ का मतलब झोपड़ी या छोटा घर है।

गाने के बाेल- ना खपरा ना छपरा
ना फूस की धरे मड़इया
का खावे को धरो वहां
बस रोवत रहत लड़इया

हिंदी मतलब- भगवान शिव के पास घर और आराम की चीजें नहीं हैं। सप्तऋषि पार्वती को यही बात बताकर समझा रहे हैं कि उनका जीवन आम गृहस्थ जैसा नहीं है।

गाने के बाेल- भेष धरे अवधूत फिरे
अब तुमसे का कहे बिन्नू
डोरा डांगर ले घूमें
वे इनके कछुए नइयां
वे इनके कछुए नइयां

हिंदी मतलब- शिव साधु जैसा भेष बनाकर घूमते हैं। सप्तऋषि माता पार्वती से कहते हैं कि उनके बारे में और क्या बताएं, उनका जीवन भी आम लोगों जैसा नहीं है।

गाने के बाेल- काय जिद कर रही
काय तप कर रही
काय जिद कर रही
काय को मर रही
ऐसे वर के लाने
हां ऐसे वर के लाने

हिंदी मतलब- सप्तऋषि फिर माता पार्वती से कहते हैं कि तुम ऐसे वर के लिए जिद और तपस्या क्यों कर रही हो? ऐसे व्यक्ति को पाने के लिए खुद को इतना कष्ट देने की क्या जरूरत है?

गाने के बाेल- जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ

हिंदी मतलब- सप्तऋषि फिर भगवान शिव के रूप की बात करते हैं। उनके सिर पर गंगा और गले में सांप है। इसके बावजूद उन्हें भोलेनाथ कहा जाता है।

गाने के बाेल- जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ

हिंदी मतलब- शिव के अलग रूप का जिक्र करते हुए सप्तऋषि पार्वती को समझाते हैं कि उनका रहन-सहन सामान्य लोगों से बिल्कुल अलग है। वो बहुत ही सीधे और शांत स्‍वभाव वाले हैं। इसील‍िए उन्‍हें सब भोलेनाथ कहते हैं।

गाने के बाेल- शंभु.. शिव शंभु, भोलेनाथ

हिंदी मतलब- इन शब्दों में भगवान शिव का नाम लिया गया है और उनकी स्तुति की गई है।

गाने के बाेल- जटा लटा न कबहुं संवारे
दीसत महा भयंकर
मूड़ पे आधो चंदा और
बेला पे घूमे शंकर

हिंदी मतलब- फ‍िर सप्‍तऋष‍ि माता पार्वती से कहते हैं क‍ि शिव अपनी जटाओं को कभी नहीं संवारते और उनका रूप बहुत भयंकर दिखाई देता है। उनके सिर पर आधा चांद है और वे अपने अलग अंदाज में घूमते रहते हैं।

गाने के बाेल- जटा लटा न कबहुं संवारे
दीसत महा भयंकर
मूड़ पे आधो चंदा और
बेला पे घूमे शंकर

हिंदी मतलब- इस हिस्से में भगवान शिव के रूप का वर्णन किया गया है। उनकी बिखरी जटाएं, सिर पर आधा चांद और उनका अलग रूप सप्तऋषि पार्वती के सामने बताते हैं।

गाने के बाेल- राम नाम के रसिया हैं वे
और उन्हें क्या चाहने
कामदेव के मर्दनहारी
घर-गृहस्थी क्या जाने
वे घर-गृहस्थी क्या जाने

हिंदी मतलब- शिव राम नाम में डूबे रहते हैं और उन्हें सांसारिक चीजों की चाह नहीं है। वे कामदेव को हराने वाले हैं। ऐसे में सप्तऋषि कहते हैं कि उन्हें घर-गृहस्थी के बारे में क्या ही पता होगा।

गाने के बाेल- काय जिद कर रही
काय को मर रही
अरे काय जिद कर रही
काय तप कर रही
ऐसे वर के लाने
तेन्नू ऐसे वर के लाने 

हिंदी मतलब- सप्तऋषि फिर पार्वती को समझाते हैं कि ऐसे वर को पाने के लिए तुम इतनी जिद और तपस्या क्यों कर रही हो? वे उन्हें शिव से विवाह करने की इच्छा छोड़ने के लिए समझा रहे हैं।

गाने के बाेल- जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ

हिंदी मतलब- जिनके सिर पर गंगा और गले में सांप है, ऐसे शिव को लोग भोलेनाथ कहते हैं। सप्तऋषि इसी तरह शिव के रूप और उनके जीवन का जिक्र करते हुए पार्वती को समझाते हैं।

गाने के बाेल- भोले बम भोले
भोले बम भोले
भोले बम भोले
जय जय शिवशंभु

हिंदी मतलब- इस अंतरे में भगवान शिव का नाम लेकर उनकी जय-जयकार की गई है।

'पार्वती' भजन का पूरा मतलब क्या है?

पूरे भजन में एक ही प्रसंग को बुंदेली अंदाज में बताया गया है। माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करना चाहती हैं और इसके लिए तपस्या कर रही हैं। ऐसे में उन्हें समझाने के लिए सप्तऋषि आते हैं। वे पार्वती माता को बताते हैं कि शिव का रूप आम लोगों से ब‍िल्‍कुल अलग है। उनके सिर पर गंगा है, गले में सांप है, जटाएं हैं और वे साधु के रूप में घूमते हैं। उनके पास घर-गृहस्थी वाली सुख-सुविधाएं भी नहीं हैं।

इसी वजह से सप्तऋषि पार्वती से बार-बार पूछते हैं कि वह ऐसे वर के लिए इतनी जिद और तपस्या क्यों कर रही हैं। यही इस पूरे बुंदेली भजन का मुख्य भाव है। आसान शब्दों में कहें तो सप्तऋषि पार्वती को भगवान शिव के बारे में समझाकर उन्हें उनसे विवाह करने की जिद छोड़ने के लिए मना रहे हैं।

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'पार्वती' भजन के क्रेडिट्स

  • फिल्म: 'हनुमान अंश'
  • भजन: 'पार्वती'
  • गीतकार और गायक: साधू एस तिवारी                 
  • संगीत: साधू एस तिवारी और समीरन दास
  • फ‍िल्‍म के निर्देशक: डॉ. विशाल चतुर्वेदी
  • मुख्य कलाकार: शोभिनव सत्य

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Image Credit- AI/IMBD