फिल्म हनुमान अंश (Hanuman Ansh) काे र‍िलीज हुए काफी समय बीत चुका है, लेक‍िन अभी भी फ‍िल्‍म का लोकगीत 'जब जिद पे आ गई पार्वती' इन दिनों इंटरनेट पर जमकर धमाल मचा रहा है। इस गाने पर हजारों लोग शॉर्ट्स और रील्स बना रहे हैं, झूमकर डांस कर रहे हैं और खुलकर गा भी रहे हैं, लेकिन क्या आप जानती हैं कि इस गाने को गाते समय ज्यादातर लोग एक बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं?

जी हां, जिस एक लाइन को सब लोग गलत तरीके से र‍िपीट कर रहे हैं, असल में उसमें एक बहुत ही खूबसूरत बुंदेली शब्द छिपा हुआ है, जिसका मतलब समझे बिना लोग इसे गलत गाते जा रहे हैं। आइए जानते हैं क‍ि वो शब्‍द काैन सा है और इसके मतलब क्‍या हैं?

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हनुमान अंश के 'पार्वती' गाने की किस लाइन में हो रही गलती?

इस गाने में जब सप्तऋषि माता पार्वती को समझाने आते हैं, तो वे उनसे कहते हैं- 'काय जिद कर रही, काय को मर रही ऐसे वर के लाने...' इसी लाइन में सबसे बड़ी गलती है। इसके सही बोल 'काय जिद कर रही, काय खुमर रही ऐसे वर के लाने...' हैं। ज्यादातर लोग इसे जल्दबाजी में या बोली की समझ न होने के कारण 'काय को मर रही' बोलकर ही गा रहे हैं। जबकि वहां 'को मर' जैसा कोई शब्द ही नहीं है, असली शब्द है 'खुमर रही'!

बुंदेली भाषा में क्या है 'खुमर रही' का असली मतलब?

आपको बता दें क‍ि 'खुमर रही' एक बुंदेली भाषा है। बुंदेलखंडी (बुंदेली) लोकबोली में 'खुमर रही' शब्द का भाव बहुत ही गहरा और प्यारा है। इसका सीधा मतलब है- तीव्र चाह और जिद। यानी किसी चीज या इंसान को पाने के लिए बेइंतहा तड़प और जुनून होना। ऐसे भी आप समझ सकती हैं क‍ि किसी को पाने के लिए बहुत ज्यादा बेचैन रहना, ज‍िद करना या नखरे दिखाना। आसान शब्दों में कहें तो बहुत ज्यादा जिद पर अड़ी होना और दिल से बेचैन होना ही इस शब्‍द का प्‍यारा मतलब है।

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सप्तऋषि असल में पार्वती माता से क्या कह रहे हैं?

गाने के सीन में सप्तऋषि माता पार्वती जी को समझाने पहुंचे हैं। वे पार्वती माता से कहते हैं कि आखिर तुम भोलेनाथ को पाने के लिए इतनी जिद क्यों पकड़कर बैठी हो? किसी के लिए ऐसा पागलपन और ऐसी तड़प क्यों दिखा रही हो? वे माता को बताते हैं कि जिनके सिर पर गंगा है, गले में सांप लटके हैं, जो इतने सीधे-साधे हैं, जिनके पास रहने को ढंग का घर-मड़इया (घर-बार) तक नहीं है, उनके लिए इतनी बेचैनी और हठ करने की क्या जरूरत आन पड़ी है?

गाना गाते समय इस बात का रखें ध्यान

अब अगर अगली बार जब भी आप इस गाने को गाएं, तो 'काय को मर रही' गाने की गलती न करें। जब आप इसे 'काय खुमर रही' गाएंगी, तो इसका एक प्‍यारा सा मतलब न‍िकलकर आएगा। सीधी शब्‍दों में कहें तो इस बुंदेली लोकगीत की असली मिठास और शिव-पार्वती की भक्ति का सच्चा भाव 'काय खुमर रही' से ही सामने आएगा।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रहे गाने 'जब जिद पे आ गई पार्वती' में इस्तेमाल हुई बुंदेली लोकबोली और उसके सही शब्दों की समझ के आधार पर जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसका मकसद किसी भी कलाकार, गायक या दर्शकों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है, बल्कि भाषा और शब्दों के सही प्रयोग व अर्थ को उजागर करना है।

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