बॉलीवुड के क्लासिक गानों और स्वर कोकिला लता मंगेशकर की जादुई आवाज के दीवाने आज भी करोड़ों लोग हैं। जितने खूबसूरत उनके गाए नगमे हैं, उतनी ही दिलचस्प उनके पीछे की कहानियां भी हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही सदाबहार गाने के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे मूल रूप से एक गुजराती थिएटर नाटक के लिए तैयार किया गया था, लेकिन आगे चलकर यह हिंदी सिनेमा का एक ऐतिहासिक और कल्ट गीत बन गया। नीचे लेख में पढ़ें दिलचस्प किस्सा-
गुजराती नाटक के लिए लिखा गया था मुगल-ए-आजम का यह गाना
61 साल पुराना गाना 'मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे' फिल्म के लिए नहीं बल्कि गुजराती नाटक 'छत्र विजय' के लिए लिखा था, जो वहां काफी लोकप्रिय हुआ था। दशकों बाद जब हिंदी सिनेमा के इतिहास में मुगल-ए-आजम फिल्म बनीं, तो इस धुन और भाव को फिल्म की कहानी के अनुकूल ढालकर इसमें शामिल किया गया।
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मुगल-ए-आजम को बनने में लगा था 16 साल का समय
साल 1960 में आई फिल्म मुगर-ए-आजम का बॉलीवुड इतिहास में अपना नाम दर्ज कर रखा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस फिल्म को बनने में कुल 16 साल का समय लगा था। वहीं इस फिल्म का गीत 'मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे' गाना जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी है। इसे गुजराती रंगमंच के लिए तैयार किया गया था। जैसा कि ऊपर लेख में बताया है। इसकी धुन गुजराती कवि और नाटककार रघुनाथ ब्रह्मभट्ट ने लिखी थी।
'मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे' गाने का मतलब
अब हम बात करते हैं 'मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे' गाने के मतलब की। यह गाना श्रीकृष्ण और राधा रानी के पौराणिक प्रेमलीला कृष्ण के नटखट लीला का वर्णन करता है।
गाने के बोल- "मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे, मोरी नाजुक कलाईयां मरोड़ गयो रे"
इसका अर्थ है कि जब गोपी (राधा) पानी भरने के लिए पनघट (नदी या कुएं के घाट) पर गई थी, तब नंद के लाडले यानी कृष्ण ने उसे छेड़ा और उसकी नाजुक कलाई पकड़कर मरोड़ दी (शरारत की)।
गाने के बोल- "कंकरी मोहे मारी, गगरिया फोड़ डाली, मोरी साड़ी अनारी भिगोये गयो रे"
कृष्ण ने शरारत करते हुए उस पर कंकड़ फेंका, जिससे उसकी पानी भरने की मटकी (गागर) फूट गई और वह नासमझ (नटखट) कन्हैया उसकी साड़ी भी भिगोकर चला गया।
गाने के बोल- नैनों से जादू किया, जियरा मोह लिया, मोरा घूंघटा नजरियो से तोड़ गयो रे"
कान्हा ने अपनी जादुई नजरों से ऐसा सम्मोहन किया कि गोपी का दिल (जियरा) उन्होंने मोह लिया। अपनी तिरछी नजरों से ही उन्होंने उसका घूंघट सरका दिया।
- गीतकार- शकील बदायूंनी (मूल रूप से यह गीत वर्ष 1920 में गुजराती नाटक 'छत्र विजय' के लिए कवि रघुनाथ ब्रह्मभट्ट 'रस्कवि' द्वारा लिखा गया था)
- गायक- लता मंगेशकर
- फिल्म का नाम- मुगल-ए-आजम
- फिल्म रिलीज- 1960
- फिल्म के मुख्य कलाकार- मधुबाला, दिलीप कुमार, पृथ्वीराज कपूर और दुर्गा खोटे
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