कुछ ही हफ्ते पहले मेरे क्लिनिक में एक यंग कपल बैठा था। इससे पहले कि मैं उनकी फाइल खोलती, पत्नी ने अपना फोन दिखाया और कहा, डॉक्टर, देखिए। वह उसकी बहन की गोद भराई का इनविटेशन था। उसने उदास होकर कहा, "मैं उसके लिए बहुत खुश हूं, सच में, पर समझ नहीं आया कि मैं बाथरूम में खुद को बंद करके घंटे भर क्यों रोती रही? पास बैठा उसका पति चुपचाप नीचे देखता रहा, उसके पास कोई जवाब नहीं था। 

यह छोटी सी बात आईवीएफ की पूरी सच्चाई को किसी भी स्कैन या रिपोर्ट से कहीं बेहतर तरीके से समझाती है। 15 साल से कपल्स का इलाज करते हुए मैंने देखा है कि आईवीएफ के इंजेक्शन या दवाइयां उतनी कठिन नहीं होतीं। महिलाएं एक हफ्ते में इसकी आदत डाल लेती हैं। असली थकान तो उस मेंटल प्रेशर की होती है जो इस पूरे ट्रीटमेंट के आसपास रहता है। वह लंबा इंतजार, बात को छुपाने की मजबूरी और हर फैमिली फंक्शन में रिश्तेदारों का वही सवाल 'गुड न्यूज कब सुना रहे हो?' अपने इस अनुभव को शेयर करते हुए डॉ. ऋचिका सहाय शुक्ला (को-फाउंडर और मेडिकल डायरेक्टर, इंडिया आईवीएफ फर्टिलिटी) ने बताया कि इस मुश्किल दौर में कपल्स खुद को कैसे संभालें? जानते हैं आगे...

एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद का 2 हफ्ते का इंतजार

आईवीएफ में एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद के 14 दिन उम्मीद और घबराहट के बीच बीतते हैं। यह 2 हफ्ते का टाइम पिछले कई सालों से भी ज्यादा लंबा लगता है। कई पेशेंट्स बार-बार कैलेंडर देखती हैं। एक पेशेंट ने डॉ. ऋचिका सहाय को बताया था कि वह हर रात अपने पेट पर हाथ रखकर उस आने वाले बच्चे से बातें करती थी।

जब कोई आईवीएफ साइकिल फेल होता है, तो यह सिर्फ एक मेडिकल फेलियर नहीं होता, बल्कि एक गहरा दुख होता है। दुनिया उम्मीद करती है कि आप अगले ही दिन नॉर्मल होकर काम पर लौट आएं, पर यह दर्द बहुत रियल है। मैं हर कपल से यही कहती हूं कि आप कमजोर नहीं हैं और न ही ओवररिएक्ट कर रहे हैं। आप उस सपने के टूटने का दुख मना रहे हैं, जिसे आपने देखा था।

गिल्ट और कम कॉन्फिडेंस

ट्रीटमेंट के दौरान महिलाएं अक्सर खुद को ब्लेम करने लगती हैं। वे पूछती हैं, 'क्या यह मेरे लेट नाइट काम करने से हुआ? क्या हमने शादी के बाद ज्यादा वेट कर दिया? या उस एक ट्रिप की वजह से ऐसा हुआ?' इसका जवाब है, बिल्कुल नहीं। इनफर्टिलिटी थायराइड या शुगर जैसी ही एक नॉर्मल मेडिकल कंडीशन है, यह किसी की गलती या सजा नहीं है। बता दें कि ऋचिका ने स्मार्ट और समझदार महिलाओं को इस दौरान अपना कॉन्फिडेंस खोते देखा है।

रिश्ते पर पड़ता मेंटल प्रेशर

इस स्ट्रेस का असर पति-पत्नी के रिश्ते पर भी पड़ता है। पति अक्सर चुप हो जाता है, जिसे पत्नी उसका अनकेयरिंग एटीट्यूड समझ लेती है। पत्नी देर रात इस पर बात करना चाहती है, जबकि पति सोकर सब भूलना चाहता है। सच यह है कि दोनों गलत नहीं हैं, बस दोनों के दुख जताने का तरीका अलग है। कई बार क्लिनिक में जब मैं पति से पूछती हूं कि वह कैसा फील कर रहा है, तो पहली बार पत्नी उसकी बात सुन पाती है और उनके बीच की गलतफहमी दूर होती है।

इस मुश्किल दौर में खुद को कैसे संभालें?

अगर आप इस दौर से बाहर निकलना चाहते हैं तो यहां निम्न तरीके दिए गए हैं-

1. अपनी बात कम लोगों से शेयर करें

यह मिलकर तय करें कि ट्रीटमेंट के बारे में किसे बताना है और किसे नहीं। आपका सर्कल जितना छोटा होगा, आपको लोगों के सवालों का सामना उतना ही कम करना पड़ेगा।

2. दो हफ्ते के वेट को पहले से प्लान करें

एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद के 14 दिनों में खुद को हल्के-फुल्के काम में बिजी रखें। शाम को साथ बैठकर पुरानी मूवीज देखें, स्ट्रीट फूड खाएं या वॉक पर जाएं।

3. काउंसलर की हेल्प लें

किसी काउंसलर से बात करना कोई लग्जरी नहीं, बल्कि ट्रीटमेंट का ही एक जरूरी हिस्सा है।

4. बीच में ब्रेक लें

अगर आपको एक साइकिल के बाद दूसरे साइकिल के बीच 1-2 महीने का ब्रेक चाहिए, तो जरूर लें। खुद को मेंटली रिलैक्स करना बहुत जरूरी है।

हस्बैंड्स के लिए एक खास टिप: डॉक्टर कहती हैं कि हस्बैंड्स से मेरी एक रिक्वेस्ट है, जब आपकी वाइफ उदास हो, तो उसकी उदासी को तुरंत 'फिक्स' करने की कोशिश न करें। बस उसके पास बैठें, उसके लिए चाय लाएं और उसके साथ रहें। आपका यह छोटा सा सपोर्ट बहुत मायने रखता है।

निष्कर्ष

आईवीएफ का सफर सिर्फ मेडिकल रिपोर्ट्स और टेस्ट्स तक सीमित नहीं है, यह आपकी मेंटल और इमोशनल हेल्थ से जुड़ा सफर भी है। इस दौरान खुद को फिजिकली संभालने के साथ-साथ मेंटली मजबूत रखना भी उतना ही जरूरी है। 

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Images: magnific